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दिल्ली जल बोर्ड में घपला: 1943 करोड़ के टेंडर में कंपनियों के फायदे के लिए शर्तों में बदलाव, एसीबी का दावा

Wed, 19 Aug 2026 03:24 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 19 Aug 2026 03:24 AM IST
सार

जांच एजेंसियों के मुताबिक पहले टेंडर की शर्तों को इस तरह मोड़ा गया कि एक खास तकनीक और कंपनी के अलावा दूसरे दावेदारों की गुंजाइश ही न रहे, फिर उसी रास्ते से निकली रकम को कमीशन और कथित रिश्वत के जरिए आगे पहुंचाया गया।

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Delhi Jal Board scam: Tender conditions worth Rs 1943 crore changed to benefit companies
demo - फोटो : FREEPIK

विस्तार

दिल्ली जल बोर्ड के 1943 करोड़ रुपये के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) टेंडर में निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए कई स्तरों पर शर्ताें में बदलाव किए गए। जांच एजेंसियों के मुताबिक पहले टेंडर की शर्तों को इस तरह मोड़ा गया कि एक खास तकनीक और कंपनी के अलावा दूसरे दावेदारों की गुंजाइश ही न रहे, फिर उसी रास्ते से निकली रकम को कमीशन और कथित रिश्वत के जरिए आगे पहुंचाया गया।

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अब एसीबी की जांच में तत्कालीन जल बोर्ड सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों के खातों तक 1.52 करोड़ रुपये पहुंचने का दावा सामने आया है। इससे पहले ईडी अपनी चार्जशीट में इसी टेंडर नेटवर्क से 6.73 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत, 9.96 करोड़ रुपये के अनुचित लाभ और कुल 17.70 करोड़ रुपये की आय की कड़ी जोड़ चुकी है।
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ईडी के मुताबिक दिल्ली जल बोर्ड के 10 एसटीपी के अपग्रेडेशन के लिए चार टेंडर किए गए थे। अक्तूबर 2022 में इनकी कुल कीमत 1943 करोड़ रुपये थी। जांच में आरोप है कि टेंडर की तकनीकी शर्तों में तकनीक के साथ फिक्स्ड मीडिया की अनिवार्यता इस तरह रखी गई कि हैदराबाद की यूरोटेक एनवायरमेंटल प्राइवेट लिमिटेड उस तकनीक की एकमात्र आपूर्तिकर्ता बन गई। यानी जिस काम के लिए करोड़ों रुपये का सरकारी टेंडर खुली प्रतिस्पर्धा में होना था, उसमें तकनीकी शर्तों ने प्रतिस्पर्धा का रास्ता ही संकरा कर दिया।
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एसीबी का कहना है कि निजी लोगों और सरकारी अधिकारियों के बीच टेंडर की शर्तों, कॉरिजेंडम और दूसरे दस्तावेजों का इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से आदान-प्रदान हुआ। इन दस्तावेज और शर्तों को टेंडर में शामिल किए जाने के साक्ष्य मिले। ईडी की जांच में आरोप है कि यूरोटेक से जुड़े लोगों ने टेंडर में कथित फायदा हासिल करने के बदले 6.73 करोड़ रुपये की रिश्वत दी। एजेंसी के मुताबिक रकम का एक हिस्सा बैंकिंग चैनल में फर्जी बिल और एडवांस के जरिए छिपाया गया, जबकि कुछ रकम नकद और हवाला माध्यम से पहुंचाई गई। इसी प्रक्रिया से यूरोटेक को करीब 9.96 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ मिलने का आरोप है।


15.36 करोड़ की संपत्ति की जा चुकी है अटैच
ईडी इस मामले में आरोपियों की करीब 15.36 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां अस्थायी तौर पर अटैच कर चुकी है। दिसंबर 2025 में एजेंसी ने सत्येंद्र जैन समेत 14 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत अदालत में दाखिल की थी। इसमें जैन, तत्कालीन दिल्ली जलबोर्ड के सीईओ उदित प्रकाश राय और अन्य अधिकारियों व निजी पक्षों को करीब 17.70 करोड़ रुपये की कथित अपराध आय के सृजन, अधिग्रहण, छिपाने, कब्जे या इस्तेमाल से जोड़ा गया है।
 

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