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Water Crisis Delhi: पानी को तरसती दिल्ली, पड़ोसी राज्यों पर टिकी प्यास; गर्मियों में बुरे हो जाते हैं हालात

अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 09 Jan 2026 03:36 AM IST
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सार

राजधानी में सप्लाई होने वाले कुल पानी का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा और उत्तराखंड से प्राप्त होता है।

Delhi thirsts for water, its neighbors rely on its neighbors; the situation worsens in the summer.
दिल्ली में जल संकट - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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देश की राजधानी दिल्ली अपनी बुनियादी जरूरत पेयजल के लिए लगभग पूरी तरह से पड़ोसी राज्यों पर निर्भर है। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के अनुसार, रोजाना राजधानी में सप्लाई होने वाले कुल पानी का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा हरियाणा और उत्तराखंड से प्राप्त होता है। स्थानीय जल स्रोतों की सीमित उपलब्धता के कारण बढ़ती आबादी की जरूरतें पूरी करना दिल्ली के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है, जिससे बाहरी जल आपूर्ति पर निर्भरता और गहराती जा रही है।

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दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, राजधानी में प्रतिदिन लगभग दस करोड़ गैलन पानी की जरूरत होती है। इसमें से करीब 9 करोड़ गैलन पानी हरियाणा और उत्तराखंड से आता है, जबकि मात्र एक करोड़ गैलन पानी दिल्ली में मौजूद ट्यूबवेलों के जरिये निकाला जाता है। यह आंकड़ा साफ तौर पर दर्शाता है कि दिल्ली की जल आपूर्ति प्रणाली कितनी हद तक बाहरी राज्यों पर टिकी है।
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हरियाणा से दिल्ली को पानी यमुना नदी और मुनक नहर के जरिये मिलता है जबकि उत्तराखंड से गंगनहर (गंगनगर प्रणाली) के माध्यम से पानी दिल्ली तक पहुंचाया जाता है, जो राजधानी की जल आपूर्ति का एक अहम स्रोत है। दिल्ली जल बोर्ड के अंतर्गत कुल नौ जल शोधन संयंत्र (वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट) कार्यरत हैं, जहां कच्चे पानी को शुद्ध कर पीने योग्य बनाया जाता है। इन संयंत्रों में वजीराबाद, चंद्रावल, हैदरपुर, ओखला, बवाना, द्वारका, नांगलोई और सोनिया विहार जैसे प्रमुख प्लांट शामिल हैं। इन संयंत्रों में हरियाणा और उत्तराखंड से आने वाले पानी को फिल्टर कर दिल्ली के विभिन्न इलाकों में सप्लाई किया जाता है। हालांकि, दिल्ली की तेजी से बढ़ती आबादी और शहरीकरण के चलते पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में राजधानी की आबादी दो करोड़ से अधिक है और अनुमान है कि आने वाले वर्षों में यह संख्या और बढ़ेगी। ऐसे में मौजूदा जल स्रोत भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में नाकाफी साबित हो सकते हैं।

गिरता भूजल और बढ़ा रहा चिंता
भू-जल स्तर राजधानी के कई इलाकों में तेजी से गिर रहा है, जिससे ट्यूबवेलों से मिलने वाला पानी भी अब भरोसेमंद नहीं रह गया है। कई क्षेत्रों में भूजल खारा या प्रदूषित हो चुका है, जिससे पीने योग्य पानी की उपलब्धता और चुनौतीपूर्ण हो गई है। पानी की आपूर्ति को लेकर दिल्ली और हरियाणा के बीच पहले भी कई बार विवाद सामने आ चुके हैं। गर्मियों के मौसम में जब पानी की मांग बढ़ जाती है, तब हरियाणा से मिलने वाली आपूर्ति में कमी आने पर दिल्ली में जल संकट गहरा जाता है। कई बार यमुना के जलस्तर में गिरावट या नहरों में मरम्मत कार्य के कारण भी आपूर्ति प्रभावित होती है।

वर्षा जल संचयन पर ध्यान देने की जरूरत
विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली को दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर गंभीरता से काम करना होगा। वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग), झीलों और जलाशयों के पुनर्जीवन, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से रिसाइकल्ड पानी का उपयोग और भूजल रिचार्ज जैसे उपायों को बड़े पैमाने पर लागू करने की जरूरत है। पानी की बर्बादी को रोकना भी बड़ी चुनौती है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार, सप्लाई किए जाने वाले पानी का एक बड़ा हिस्सा लीकेज, अवैध कनेक्शन और खराब पाइपलाइन व्यवस्था के कारण नष्ट हो जाता है।

संयंत्र का नाम/उत्पादन (एमजीडी में)

  • सोनिया विहार 150
  • भागीरथी 115
  • चंद्रावल 99
  • वजीराबाद 130
  • हैदरपुर 230
  • नांगलोई 45
  • ओखला 20
  • बवाना 20
  • द्वारका 55
  • रीसाइक्लिंग 46
  • रैनी वेल्सव ट्यूबवेल 90

नलों से बहती बदहाली पर प्रशासन मौन
राजधानी के कई इलाकों में पानी लोगों की प्यास बुझाने वाला नहीं, बल्कि उनकी सेहत और जिंदगी के लिए खतरा बनता जा रहा है। मोहन गार्डन, नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया, महावीर एन्क्लेव, कालकाजी और आली गांव जैसे इलाकों में रहने वाले सैकड़ों परिवार बदबूदार, पीले और काले पानी के सहारे जिंदगी जीने को मजबूर हैं। हालात इतने खराब हैं कि न यह पानी पीने लायक है, न खाना बनाने और न ही नहाने-धोने के काम का।

दिल्ली के लिए मुसीबत बन रहा गंदा पानी
गंदे पानी पीने के कारण कॉलोनी में कई लोग स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। हम टैक्स देते हैं, फिर भी हमें साफ पानी नहीं मिल रहा। नल खोलते ही बदबूदार पानी निकलता है। बच्चों को यह पानी पिलाने से डर लगता है, लेकिन करें तो क्या करें। मजबूरी में वही पानी इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
-कृपाल दत्त जोशी, मोहन गार्डन ए एक्सटेंशन

नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया में जो पानी आ रहा है उसे देखकर लगता है नाले का पानी है। बदबू इतनी होती है कि पानी को हाथ लगाने में भी डर लगता है। शिकायत करने पर भी सिर्फ आश्वासन मिलता है, समाधान नहीं। कालकाजी में तो पानी इतना गंदा है कि लोग पीना तो दूर, उसे घर में रखने से भी परहेज कर रहे हैं।
-निशा, कर्मचारी

महावीर एन्क्लेव से आली गांव तक स्वच्छ जल के लिए संघर्ष
महावीर एन्क्लेव और आली गांव में भी तस्वीर कुछ अलग नहीं है। महावीर एन्क्लेव स्थित नंदा ब्लॉक के लोग पिछले एक साल से पानी की कमी और स्वच्छ जल के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कॉलोनी में मीठा पानी सप्लाई नहीं होने से आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक गंदे पानी की वजह से बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत खराब हो रही है। स्थानीय निवासियों के मुताबिक शिकायत करने वालों को सिर्फ तारीख पर तारीख दी जा रही है। सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को हो रही है।

पब्लिक बोली, टैंकर के सहारे गुजर रही जिंदगी
पिछले एक साल से मीठा पानी नहीं आ रहा है। हर महीने टैंकर मंगवाने पर काफी पैसे खर्च हो जाते हैं, जो हर परिवार के लिए संभव नहीं है। पानी की कमी के कारण साफ सफाई पर भी असर पड़ रहा है। नहाने, कपड़े धोने और बर्तन साफ करने तक में परेशानी होती है।
-रिंकी भंडारी, पालम कालोनी, नंदा ब्लॉक

पानी की समस्या के कारण कई परिवारों के लिए खाना बनाना, बर्तन धोना, कपड़े साफ करना और नहाने जैसी बुनियादी जरूरतें भी अब चुनौती बन गई हैं। इस कारण महिलाओं को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ रही है। उन्हें पानी के लिए निजी टैंकर पर निर्भर रहना पड़ता है।
-महेश शर्मा, आली गांव

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