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मेट्रो नहीं, अब मेट्रोपोलिस कहलाएगी दिल्ली : एलजी
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उपराज्यपाल ने भारत-जापान कॉन्क्लेव में पेश किया विकसित दिल्ली का इंफ्रा इकोसिस्टम विजन
उन्होंने कहा-दिल्ली का सबसे बड़ा आकर्षण होगा द्वारका उप-शहर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार को राजधानी के भविष्य को लेकर बड़ा और महत्वाकांक्षी विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब दिल्ली अपनी मेट्रो सिटी की पहचान से आगे बढ़कर एक विश्वस्तरीय मेट्रोपोलिस (महानगर) के रूप में अपनी जगह बनाए। भारत-जापान कॉन्क्लेव के दौरान एलजी ने साफ किया कि दिल्ली अब केवल बुनियादी ढांचा खड़ा करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यहां एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया जाएगा जहां आधुनिक सुविधाएं और बेहतर जीवनशैली साथ-साथ चलेंगे।
एलजी ने कहा कि मेट्रोपोलिस दिल्ली के नए विजन में सबसे बड़ा आकर्षण द्वारका उप-शहर होगा, इस क्षेत्र का कायाकल्प होगा। द्वारका केवल एक रिहायशी इलाके के रूप में नहीं, बल्कि बिजनेस हब बनेगा। योजना के मुताबिक, द्वारका को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, रिसर्च सेंटर और इनोवेशन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यह इलाका आने वाले समय में बड़ी वैश्विक कंपनियों के क्षेत्रीय मुख्यालयों का घर बनेगा। उन्होंने कहा कि द्वारका भारत के द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग का प्रतीक भी बनेगा, जहां दुनिया भर का निवेश, तकनीक और टैलेंट एक साथ आएंगे।
पांच मुख्य स्तंभों को मजबूत करना होगा
दिल्ली को एक ग्लोबल सिटी बनाने के लिए एलजी ने पांच मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्मार्ट मोबिलिटी है। इसके तहत मेट्रो, बस और आखिरी मील तक की कनेक्टिविटी को डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा के जरिए आपस में जोड़ा जाएगा। ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए एआई आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। एलजी ने कहा कि दिल्ली को आपदा प्रबंधन में भी मजबूत होना होगा। जैसे टोक्यो ने खुद को बेहद कुशल और रहने लायक बनाया है, वैसे ही दिल्ली को भी बाढ़ और भूकंप जैसी चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा, प्रदूषण और जल संकट से निपटने के लिए वेस्ट वाटर रीसाइक्लिंग और हाइड्रोजन एनर्जी जैसी तकनीकों पर जापान के सहयोग से काम किया जाएगा।
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इंटीग्रेटेड गवर्नेंस से होगा सुधार
एलजी संधू ने इस बात पर जोर दिया कि अब हमें छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स के बजाय इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट यानी एकीकृत विकास की ओर बढ़ना होगा। विकास ऐसा होगा, जो टिकाऊ हो और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने कहा कि भारत और जापान स्वाभाविक साझेदार हैं और ये साझेदारी दिल्ली को बदलने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।
उन्होंने कहा-दिल्ली का सबसे बड़ा आकर्षण होगा द्वारका उप-शहर
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने शुक्रवार को राजधानी के भविष्य को लेकर बड़ा और महत्वाकांक्षी विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब दिल्ली अपनी मेट्रो सिटी की पहचान से आगे बढ़कर एक विश्वस्तरीय मेट्रोपोलिस (महानगर) के रूप में अपनी जगह बनाए। भारत-जापान कॉन्क्लेव के दौरान एलजी ने साफ किया कि दिल्ली अब केवल बुनियादी ढांचा खड़ा करने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यहां एक ऐसा इकोसिस्टम बनाया जाएगा जहां आधुनिक सुविधाएं और बेहतर जीवनशैली साथ-साथ चलेंगे।
एलजी ने कहा कि मेट्रोपोलिस दिल्ली के नए विजन में सबसे बड़ा आकर्षण द्वारका उप-शहर होगा, इस क्षेत्र का कायाकल्प होगा। द्वारका केवल एक रिहायशी इलाके के रूप में नहीं, बल्कि बिजनेस हब बनेगा। योजना के मुताबिक, द्वारका को अंतरराष्ट्रीय कंपनियों, रिसर्च सेंटर और इनोवेशन हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यह इलाका आने वाले समय में बड़ी वैश्विक कंपनियों के क्षेत्रीय मुख्यालयों का घर बनेगा। उन्होंने कहा कि द्वारका भारत के द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग का प्रतीक भी बनेगा, जहां दुनिया भर का निवेश, तकनीक और टैलेंट एक साथ आएंगे।
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पांच मुख्य स्तंभों को मजबूत करना होगा
दिल्ली को एक ग्लोबल सिटी बनाने के लिए एलजी ने पांच मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही। इसमें सबसे महत्वपूर्ण स्मार्ट मोबिलिटी है। इसके तहत मेट्रो, बस और आखिरी मील तक की कनेक्टिविटी को डिजिटल प्लेटफॉर्म और डेटा के जरिए आपस में जोड़ा जाएगा। ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए एआई आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा। एलजी ने कहा कि दिल्ली को आपदा प्रबंधन में भी मजबूत होना होगा। जैसे टोक्यो ने खुद को बेहद कुशल और रहने लायक बनाया है, वैसे ही दिल्ली को भी बाढ़ और भूकंप जैसी चुनौतियों के लिए तैयार रहना होगा। इसके अलावा, प्रदूषण और जल संकट से निपटने के लिए वेस्ट वाटर रीसाइक्लिंग और हाइड्रोजन एनर्जी जैसी तकनीकों पर जापान के सहयोग से काम किया जाएगा।
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एलजी संधू ने इस बात पर जोर दिया कि अब हमें छोटे-छोटे प्रोजेक्ट्स के बजाय इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट यानी एकीकृत विकास की ओर बढ़ना होगा। विकास ऐसा होगा, जो टिकाऊ हो और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने कहा कि भारत और जापान स्वाभाविक साझेदार हैं और ये साझेदारी दिल्ली को बदलने में केंद्रीय भूमिका निभाएगी।