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Delhi NCR News: दिल्ली के सरकारी अस्पताल अब खुद करेंगे दवाओं और मेडिकल सामान की खरीद
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-सीपीए से खरीद व्यवस्था पर फिलहाल रोक, लंबित निविदाएं रद्द करने के आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं, सर्जिकल सामान, उपभोग्य सामग्री, उपकरण व अन्य स्वास्थ्य संबंधी वस्तुओं की खरीद को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने आदेश जारी कर सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है और अस्पतालों को अपने स्तर पर खरीद करने के निर्देश दिए हैं।
सीपीए द्वारा शुरू की गई सभी लंबित व अधूरी निविदाएं, जो अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं हुई हैं, तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। संबंधित चिकित्सा संस्थानों को इन्हें वापस लेना होगा। हालांकि, पहले से लागू वैध दर अनुबंध व खरीद अनुबंध अपनी अवधि पूरी होने तक जारी रहेंगे।
स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक दवाओं को छोड़कर सीपीए के माध्यम से नई खरीद स्थगित रहेगी। जब तक आवश्यक दवाओं के नए रेट कॉन्ट्रैक्ट तैयार नहीं होते, सभी सरकारी अस्पताल अपने विभागाध्यक्षों के माध्यम से आवश्यक व गैर-आवश्यक दवाओं, उपभोग्य सामग्री, सर्जिकल आइटम, चिकित्सा उपकरण व अन्य सामान की खरीद स्वयं करेंगे। विभाग ने यह भी कहा कि नीति में महत्वपूर्ण बदलाव से जुड़े प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष रखे जाने चाहिए, विभाग स्तर पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकता।
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नोटिस जारी कर विभाग से मांगा था जवाब
यह पूरी प्रक्रिया सामान्य वित्तीय नियम-2017, जीईएम दिशा-निर्देश, सीवीसी नियमावली और अन्य सरकारी प्रावधानों का पालन करते हुए होगी। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक केंद्रीकृत खरीद के लिए नया कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता। बता दें कि हाल में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह नोटिस दवाओं, चिकित्सीय सामान और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़ी लंबित प्रक्रिया के संबंध में कार्य योजना मांगी गई थी।
आखिर क्या है सीपीए घोटाला
बता दें कि जून में स्वास्थ्य विभाग के तहत आने वाले सीपीए में कथित तौर पर 650 करोड़ रुपये का चिकित्सा खरीद घोटाला सामने आया था। इस मामले में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर मुख्य अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। यह घोटाला सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं, सर्जिकल सामान और पोर्टेबल एक्सरे मशीनों की खरीद में हुई भारी धांधली से जुड़ा था।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं, सर्जिकल सामान, उपभोग्य सामग्री, उपकरण व अन्य स्वास्थ्य संबंधी वस्तुओं की खरीद को लेकर नई व्यवस्था लागू की है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने आदेश जारी कर सेंट्रल प्रोक्योरमेंट एजेंसी (सीपीए) की प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगा दी है और अस्पतालों को अपने स्तर पर खरीद करने के निर्देश दिए हैं।
सीपीए द्वारा शुरू की गई सभी लंबित व अधूरी निविदाएं, जो अंतिम रूप से स्वीकृत नहीं हुई हैं, तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई हैं। संबंधित चिकित्सा संस्थानों को इन्हें वापस लेना होगा। हालांकि, पहले से लागू वैध दर अनुबंध व खरीद अनुबंध अपनी अवधि पूरी होने तक जारी रहेंगे।
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स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक दवाओं को छोड़कर सीपीए के माध्यम से नई खरीद स्थगित रहेगी। जब तक आवश्यक दवाओं के नए रेट कॉन्ट्रैक्ट तैयार नहीं होते, सभी सरकारी अस्पताल अपने विभागाध्यक्षों के माध्यम से आवश्यक व गैर-आवश्यक दवाओं, उपभोग्य सामग्री, सर्जिकल आइटम, चिकित्सा उपकरण व अन्य सामान की खरीद स्वयं करेंगे। विभाग ने यह भी कहा कि नीति में महत्वपूर्ण बदलाव से जुड़े प्रस्ताव मंत्रिपरिषद के समक्ष रखे जाने चाहिए, विभाग स्तर पर अंतिम निर्णय नहीं लिया जा सकता।
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नोटिस जारी कर विभाग से मांगा था जवाब
यह पूरी प्रक्रिया सामान्य वित्तीय नियम-2017, जीईएम दिशा-निर्देश, सीवीसी नियमावली और अन्य सरकारी प्रावधानों का पालन करते हुए होगी। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी जब तक केंद्रीकृत खरीद के लिए नया कानूनी, वित्तीय और प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता। बता दें कि हाल में दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग के सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। यह नोटिस दवाओं, चिकित्सीय सामान और चिकित्सा उपकरणों की खरीद से जुड़ी लंबित प्रक्रिया के संबंध में कार्य योजना मांगी गई थी।
आखिर क्या है सीपीए घोटाला
बता दें कि जून में स्वास्थ्य विभाग के तहत आने वाले सीपीए में कथित तौर पर 650 करोड़ रुपये का चिकित्सा खरीद घोटाला सामने आया था। इस मामले में दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर मुख्य अधिकारियों को गिरफ्तार किया था। यह घोटाला सरकारी अस्पतालों के लिए दवाओं, सर्जिकल सामान और पोर्टेबल एक्सरे मशीनों की खरीद में हुई भारी धांधली से जुड़ा था।