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मालवीय मिशन: दिल्ली-एनसीआर और इंद्रप्रस्थ शाखा के विलय पर मतभेद, ऑडिटेड खातों पर भी सहमति नहीं
Sun, 09 Aug 2026 08:10 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
संवाद न्यूज एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Sun, 09 Aug 2026 08:10 PM IST
सार
महामना मालवीय मिशन की इकाई की बैठक में दिल्ली-एनसीआर और इंद्रप्रस्थ शाखाओं के प्रस्तावित विलय को लेकर मतभेद सामने आए। महासचिव अर्चना गुप्ता ने नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया, जबकि दूसरे पक्ष ने विलय पूरा होने से इनकार करते हुए प्रक्रिया जारी होने की बात कही।
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दिल्ली-एनसीआर और इंद्रप्रस्थ शाखाओं के विलय पर मतभेद
- फोटो : अमर उजाला संवाद
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विस्तार
महामना मालवीय मिशन की दिल्ली-एनसीआर इकाई की आमसभा मालवीय स्मृति भवन में हुई। बैठक में दिल्ली-एनसीआर और इंद्रप्रस्थ शाखाओं के प्रस्तावित विलय को लेकर तीखे मतभेद सामने आए। महासचिव अर्चना गुप्ता ने आरोप लगाया कि विलय की प्रक्रिया संगठन के नियमों को दरकिनार कर आगे बढ़ाई जा रही है।
गुप्ता के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से सात मार्च को पत्र और 11 मार्च को नोटिफिकेशन जारी कर विलय की घोषणा कर दी गई, जबकि दिल्ली-एनसीआर इकाई को इसकी पूर्व सूचना तक नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि दो इकाइयों का विलय तभी वैध माना जा सकता है,जब दोनों शाखाओं के सदस्यों की सहमति के साथ संगठन के नियमों और जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। गुप्ता ने पूर्व अध्यक्ष और वकील रोहित सिन्हा पर भी विलय के लिए दबाव बनाने और समानांतर अंतरिम कमेटी गठित करने की कोशिश का आरोप लगाया।
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गुप्ता के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष की ओर से सात मार्च को पत्र और 11 मार्च को नोटिफिकेशन जारी कर विलय की घोषणा कर दी गई, जबकि दिल्ली-एनसीआर इकाई को इसकी पूर्व सूचना तक नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि दो इकाइयों का विलय तभी वैध माना जा सकता है,जब दोनों शाखाओं के सदस्यों की सहमति के साथ संगठन के नियमों और जरूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए। इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। गुप्ता ने पूर्व अध्यक्ष और वकील रोहित सिन्हा पर भी विलय के लिए दबाव बनाने और समानांतर अंतरिम कमेटी गठित करने की कोशिश का आरोप लगाया।
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ऑडिटेड खाते पेश नहीं हो सके
बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड खाते भी पेश नहीं हो सके। ऐसे में सदस्य खातों को मंजूरी नहीं दे पाए। गुप्ता ने कहा कि अब अगली बैठक में ऑडिटर के समक्ष खाते पेश किए जाएंगे और उसके बाद सदस्य उन पर फैसला लेंगे।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के ऑडिटेड खाते भी पेश नहीं हो सके। ऐसे में सदस्य खातों को मंजूरी नहीं दे पाए। गुप्ता ने कहा कि अब अगली बैठक में ऑडिटर के समक्ष खाते पेश किए जाएंगे और उसके बाद सदस्य उन पर फैसला लेंगे।
दूसरे पक्ष का दावाः विलय अभी पूरा नहीं हुआ
वहीं, अनीमेष सक्सेना ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों शाखाओं का विलय अभी हुआ नहीं है, बल्कि प्रक्रिया जारी है और दोनों शाखाओं की सदस्यता का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने 28 जुलाई 2026 के महासचिव के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा पदाधिकारी सितंबर 2027 तक अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।
इसके बाद दोनों शाखाओं के चुनाव कराए जाएंगे और दोनों के पदाधिकारियों से सलाह-मशविरा के बाद संयुक्त कार्यकारिणी गठित की जाएगी। सक्सेना ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष हरि शंकर सिंह और महासचिव के अलावा किसी अन्य संस्था या व्यक्ति की ओर से जारी आदेश को मान्य नहीं माना जाएगा।
वहीं, अनीमेष सक्सेना ने इन आरोपों को तथ्यात्मक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि दोनों शाखाओं का विलय अभी हुआ नहीं है, बल्कि प्रक्रिया जारी है और दोनों शाखाओं की सदस्यता का सत्यापन किया जा रहा है। उन्होंने 28 जुलाई 2026 के महासचिव के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा पदाधिकारी सितंबर 2027 तक अपना कार्यकाल पूरा करेंगे।
इसके बाद दोनों शाखाओं के चुनाव कराए जाएंगे और दोनों के पदाधिकारियों से सलाह-मशविरा के बाद संयुक्त कार्यकारिणी गठित की जाएगी। सक्सेना ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष हरि शंकर सिंह और महासचिव के अलावा किसी अन्य संस्था या व्यक्ति की ओर से जारी आदेश को मान्य नहीं माना जाएगा।