खतरे में भारत के पुरुष: 25 साल की उम्र में कमर दर्द को न करें नजरअंदाज, हो सकती है ये गंभीर बीमारी
कार्यक्रम में डॉक्टरों ने बताया कि कई रूमेटोलॉजिक बीमारियां कम उम्र में ही शुरू हो जाती हैं, लेकिन जानकारी की कमी के कारण लोग समय पर इलाज नहीं कराते।
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अगर 20-30 साल की उम्र में कमर या पीठ में लगातार दर्द रहता है, तो इसे हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। स्वामी दयानंद (एसडीएन) अस्पताल ने कैस इंडिया फाउंडेशन के साथ मिलकर मंगलवार को एक जागरूकता कार्यक्रम रुमो-ऑर्थो डॉक्टॉक का आयोजन किया। इसमें युवाओं में बढ़ रही रूमेटिक और ऑर्थोपेडिक बीमारियों पर चिंता जताई।
कार्यक्रम में डॉक्टरों ने बताया कि कई रूमेटोलॉजिक बीमारियां कम उम्र में ही शुरू हो जाती हैं, लेकिन जानकारी की कमी के कारण लोग समय पर इलाज नहीं कराते। एसडीएन अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. नरोत्तम दास ने कहा कि सही जानकारी और समय पर जांच गंभीर बीमारियों को बढ़ने से रोक सकती है।
उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि लगातार सिरदर्द को नजरअंदाज करने पर एक महिला में ब्रेन ट्यूमर पाया गया, लेकिन समय पर जांच से उसकी जान बच सकी। अस्पताल के ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. गौरव शर्मा ने बताया कि सुबह के समय कमर में अकड़न, आराम करने पर दर्द बढ़ना और लंबे समय तक पीठ दर्द रहना एंकिलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस नाम की बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं। यह बीमारी रीढ़ की हड्डी को नुकसान पहुंचा सकती है और भारत में यह पुरुषों में ज्यादा पाई जाती है।
कैस इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष अंकुर शुक्ला ने कहा कि इस तरह की बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है ताकि समय पर इलाज शुरू हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि भारत में विशेषज्ञ डॉक्टरों और इलाज की सुविधा कई देशों की तुलना में ज्यादा आसानी से उपलब्ध है। कार्यक्रम के अंत में डॉक्टरों ने साफ संदेश दिया कि लगातार दर्द को कभी नजरअंदाज न करें। समय पर डॉक्टर से सलाह लेने से न सिर्फ बीमारी को बढ़ने से रोका जा सकता है, बल्कि जिंदगी की गुणवत्ता भी बेहतर बनाई जा सकती है।