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Delhi NCR News: ऑनलाइन पर्ची से कतरा रहे बुजुर्ग, अस्पताल में भटकने को मजबूर
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- अधूरी जानकारी और मार्गदर्शन के अभाव से बढ़ी दिक्कतें-अस्पताल प्रशासन ने मानी खामियां
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के स्वामी दयानंद अस्पताल में ओपीडी पर्ची के लिए क्यूआर स्कैन सुविधा शुरू होने के बाद भी मरीजों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है। डिजिटल व्यवस्था के बावजूद मरीजों को अस्पताल में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
कम मरीजों ने अपनाई क्यूआर सुविधा
अस्पताल प्रशासन द्वारा कतारों से बचाने के लिए यह नई सुविधा लागू की गई है, लेकिन बुधवार को क्यूआर कोड के माध्यम से केवल 45 मरीजों ने ही पर्ची बनवाई। मरीज अभी इस व्यवस्था को अपनाने में पूरी तरह सहज नहीं हैं। कुछ मरीज ऐसे हैं जिनके पास कीपैड मोबाइल ही है ऐसे में वह क्यूआर स्कैन कर पर्ची बनवाने की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं। वहीं, कुछ मरीज अभी इस सुविधा के प्रति विश्वास नहीं जता पा रहे हैं और क्यूआर स्कैन करने से डर रहे हैं।
मरीजों का कहना है कि क्यूआर स्कैन के बाद केवल नाम, उम्र और मोबाइल नंबर जैसी मूलभूत जानकारी भरने पर टोकन जारी हो रहा है। इसके बाद यह स्पष्ट नहीं होता कि उन्हें किस विभाग या डॉक्टर के पास जाना है, जिससे वे एक कमरे से दूसरे कमरे तक भटकते रहते हैं। कई मरीजों ने बताया कि पहले काउंटर पर मौजूद कर्मचारी सही मार्गदर्शन कर देते थे, लेकिन अब डिजिटल प्रक्रिया में यह सुविधा नहीं मिल रही। खासकर बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे मरीजों को इस नई व्यवस्था को समझने में ज्यादा परेशानी हो रही है। परेशानी यह आ रही है कि जिस कमरे की टोकन उन्हें मिल रही है उसके बाद यदि उन्हें किसी और डिपार्टमेंट में रेफर किया जाता है तो इसका कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो पा रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने मानी खामियां
अस्पताल की एमएस डॉ. सुनीता कुजूर ने बताया कि नई व्यवस्था में कुछ दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिन्हें जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए जरूरी सुधार किए जा रहे हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। पूर्वी दिल्ली के स्वामी दयानंद अस्पताल में ओपीडी पर्ची के लिए क्यूआर स्कैन सुविधा शुरू होने के बाद भी मरीजों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है। डिजिटल व्यवस्था के बावजूद मरीजों को अस्पताल में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
कम मरीजों ने अपनाई क्यूआर सुविधा
अस्पताल प्रशासन द्वारा कतारों से बचाने के लिए यह नई सुविधा लागू की गई है, लेकिन बुधवार को क्यूआर कोड के माध्यम से केवल 45 मरीजों ने ही पर्ची बनवाई। मरीज अभी इस व्यवस्था को अपनाने में पूरी तरह सहज नहीं हैं। कुछ मरीज ऐसे हैं जिनके पास कीपैड मोबाइल ही है ऐसे में वह क्यूआर स्कैन कर पर्ची बनवाने की सुविधा का लाभ नहीं उठा सकते हैं। वहीं, कुछ मरीज अभी इस सुविधा के प्रति विश्वास नहीं जता पा रहे हैं और क्यूआर स्कैन करने से डर रहे हैं।
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मरीजों का कहना है कि क्यूआर स्कैन के बाद केवल नाम, उम्र और मोबाइल नंबर जैसी मूलभूत जानकारी भरने पर टोकन जारी हो रहा है। इसके बाद यह स्पष्ट नहीं होता कि उन्हें किस विभाग या डॉक्टर के पास जाना है, जिससे वे एक कमरे से दूसरे कमरे तक भटकते रहते हैं। कई मरीजों ने बताया कि पहले काउंटर पर मौजूद कर्मचारी सही मार्गदर्शन कर देते थे, लेकिन अब डिजिटल प्रक्रिया में यह सुविधा नहीं मिल रही। खासकर बुजुर्ग और कम पढ़े-लिखे मरीजों को इस नई व्यवस्था को समझने में ज्यादा परेशानी हो रही है। परेशानी यह आ रही है कि जिस कमरे की टोकन उन्हें मिल रही है उसके बाद यदि उन्हें किसी और डिपार्टमेंट में रेफर किया जाता है तो इसका कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं हो पा रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने मानी खामियां
अस्पताल की एमएस डॉ. सुनीता कुजूर ने बताया कि नई व्यवस्था में कुछ दिक्कतें सामने आ रही हैं, जिन्हें जल्द ही ठीक कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुविधा के लिए जरूरी सुधार किए जा रहे हैं।