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Faridabad News: सरकारी बोरवेल के पानी को बेचने का आरोप, मेयर ने दिए जांच के आदेश

Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jun 2026 11:37 PM IST
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Allegation of selling water from government borewells; Mayor orders an inquiry.
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निगम आयुक्त से तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी

पूरे नेटवर्क में कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका

अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। बड़खल विधानसभा क्षेत्र में पेयजल संकट के दौरान जरूरतमंद लोगों तक मुफ्त पहुंचाया जाने वाला नगर निगम का पानी कथित रूप से बेचने के आरोपों ने निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने मामले की जांच के आदेश देते हुए निगम आयुक्त से तीन दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

शिकायतों के अनुसार वार्ड-16, 18, 19, 21, 22 और 23 में निगम के बोरवेल से निकाले जा रहे पानी को टैंकरों के माध्यम से जरूरतमंदों तक निशुल्क पहुंचाने के बजाय उससे अवैध वसूली की जा रही है। आरोप यह भी हैं कि इस पूरे नेटवर्क में टैंकर संचालकों के साथ निगम के कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत हो सकती है।
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दरअसल, गर्मी के मौसम से पहले नगर निगम ने उन इलाकों के लिए विशेष व्यवस्था बनाई थी जहां रेनीवेल का पानी नहीं पहुंचता या जलापूर्ति लाइन बाधित रहने के कारण पेयजल संकट बना रहता है। ऐसी स्थिति में स्थानीय पार्षद या संबंधित जूनियर इंजीनियर (जेई) की मांग पर निगम की ओर से टैंकर भेजा जाता है और उसका रिकॉर्ड निगम की डायरी में दर्ज किया जाता है।
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हालांकि हाल के दिनों में मेयर कार्यालय को मिली शिकायतों में दावा किया गया कि इस व्यवस्था का दुरुपयोग कर सरकारी बोरवेल के पानी को निजी तौर पर बेचा जा रहा है। इससे एक ओर लोगों को मुफ्त सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक संसाधनों से अवैध कमाई किए जाने की आशंका भी जताई जा रही है।

मेयर ने निगम आयुक्त से 23 जून तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है। रिपोर्ट में प्रत्येक वार्ड में प्रतिदिन भेजे जा रहे टैंकरों की संख्या, उनके संचालन का रिकॉर्ड और वास्तविक जल वितरण की स्थिति का पूरा ब्यौरा शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।

मेयर प्रवीण बत्रा जोशी ने कहा कि जांच में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। निगम प्रशासन की इस जांच पर अब प्रभावित क्षेत्रों के लोगों की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इससे यह स्पष्ट होगा कि सरकारी व्यवस्था का लाभ आम जनता तक पहुंच रहा है या बीच रास्ते में ही उसका दुरुपयोग किया जा रहा है।
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