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Faridabad News: हुलिया मिला न पहचान हुई साबित, मोबाइल स्नैचिंग केस में दो युवक दोषमुक्त
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छह सितंबर 2022 के मामले में कोर्ट ने दिया आदेश
फरीदाबाद। सत्र अदालत ने मोबाइल स्नैचिंग के एक मामले में युवक उदयन को संदेह का लाभ देते हुए 26 मई को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता अदालत में आरोपी की पहचान नहीं कर सका और पुलिस द्वारा पेश किए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी युवक को वारदात से सीधे तौर पर जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
मामला छह सितंबर 2022 का था। शिकायतकर्ता साकिब ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह एनएचपीसी चौक से सराय की ओर पैदल जा रहा था, तभी बाइक सवार दो युवक उसका मोबाइल छीनकर भाग गए। पीछा करने के दौरान दोनों युवक बाइक से गिर भी गए थे, लेकिन भीड़ जुटने का फायदा उठाकर भाग निकलें। बाद में पुलिस ने उदयन और मोहित को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन और बाइक बरामद करने का दावा किया।
सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता साकिब ने यह तो माना कि उसके भाई का मोबाइल छीना गया था, लेकिन अदालत में उसने साफ कहा कि वह आरोपियों की पहचान नहीं कर सकता। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायत में भी किसी आरोपी का हुलिया या पहचान संबंधी विवरण दर्ज नहीं था, जिससे प्रत्यक्ष साक्ष्य के आधार पर उदयन की पहचान साबित नहीं हो सकी। अदालत ने यह भी कहा कि जिस बाइक की बरामदगी दिखाई गई, उसका नंबर शिकायतकर्ता ने घटना के समय नोट नहीं किया था। इन सभी तथ्यों को देखते हुए सत्र न्यायाधीश संदीप कुमार गर्ग की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष युवकों के खिलाफ संदेह से परे आरोप साबित करने में असफल रहा।
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फरीदाबाद। सत्र अदालत ने मोबाइल स्नैचिंग के एक मामले में युवक उदयन को संदेह का लाभ देते हुए 26 मई को दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने माना कि शिकायतकर्ता अदालत में आरोपी की पहचान नहीं कर सका और पुलिस द्वारा पेश किए गए परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी युवक को वारदात से सीधे तौर पर जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
मामला छह सितंबर 2022 का था। शिकायतकर्ता साकिब ने पुलिस को दी शिकायत में बताया था कि वह एनएचपीसी चौक से सराय की ओर पैदल जा रहा था, तभी बाइक सवार दो युवक उसका मोबाइल छीनकर भाग गए। पीछा करने के दौरान दोनों युवक बाइक से गिर भी गए थे, लेकिन भीड़ जुटने का फायदा उठाकर भाग निकलें। बाद में पुलिस ने उदयन और मोहित को गिरफ्तार कर मोबाइल फोन और बाइक बरामद करने का दावा किया।
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सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता साकिब ने यह तो माना कि उसके भाई का मोबाइल छीना गया था, लेकिन अदालत में उसने साफ कहा कि वह आरोपियों की पहचान नहीं कर सकता। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि शिकायत में भी किसी आरोपी का हुलिया या पहचान संबंधी विवरण दर्ज नहीं था, जिससे प्रत्यक्ष साक्ष्य के आधार पर उदयन की पहचान साबित नहीं हो सकी। अदालत ने यह भी कहा कि जिस बाइक की बरामदगी दिखाई गई, उसका नंबर शिकायतकर्ता ने घटना के समय नोट नहीं किया था। इन सभी तथ्यों को देखते हुए सत्र न्यायाधीश संदीप कुमार गर्ग की अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष युवकों के खिलाफ संदेह से परे आरोप साबित करने में असफल रहा।