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Faridabad News: बिना आधार और जन्म प्रमाणपत्र के प्रवासी लोगों के बच्चों को विद्यालय में मिलेगा प्रवेश
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संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। शहर में रोजी-रोटी की तलाश में आए लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि राजकीय विद्यालयों में दाखिले के लिए अब अभिभावकों को जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अक्सर देखा गया है कि अपना घर छोड़कर दूसरे शहरों में बसे मजदूरों के पास अपने बच्चों के पुख्ता दस्तावेज नहीं होते, जिसके कारण वे अपने बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में नहीं करा पाते थे। लेकिन अब विभाग के नए आदेशों के अनुसार इन दस्तावेजों के अभाव में भी बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
जानकारी के अनुसार शहर में वर्तमान में करीब 7.5 लाख से अधिक प्रवासी लोग निवास कर रहे हैं। इस बड़ी संख्या में से लगभग 5 लाख लोग विभिन्न निजी कंपनियों में कार्यरत हैं, जबकि करीब 2.5 लाख लोग दिहाड़ी मजदूरी और अन्य छोटे-मोटे कार्यों के माध्यम से अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
इसमें 2.5 लाख वाला मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित था, क्योंकि पलायन और अस्थाई आवास के कारण उनके पास बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड जैसे जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं थे। विद्यालयों में दाखिला प्रक्रिया के दौरान इन दस्तावेजों की मांग होने पर उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था और कई बच्चे स्कूल जाने से रह जाते थे।
इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए विभाग ने तकनीकी स्तर पर भी तैयारी पूरी कर ली है। जारी आदेशों के अनुसार जिन बच्चों के पास कोई पहचान पत्र नहीं है, उनके लिए विभाग द्वारा एक अलग से एमआईएस पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से ऐसे बच्चों का पंजीकरण विशेष श्रेणी में किया जा सकेगा, जिससे उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा।
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फरीदाबाद। शहर में रोजी-रोटी की तलाश में आए लाखों प्रवासी मजदूरों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग ने निर्देश जारी किए हैं कि राजकीय विद्यालयों में दाखिले के लिए अब अभिभावकों को जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड जैसे दस्तावेजों के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अक्सर देखा गया है कि अपना घर छोड़कर दूसरे शहरों में बसे मजदूरों के पास अपने बच्चों के पुख्ता दस्तावेज नहीं होते, जिसके कारण वे अपने बच्चों का नामांकन सरकारी स्कूलों में नहीं करा पाते थे। लेकिन अब विभाग के नए आदेशों के अनुसार इन दस्तावेजों के अभाव में भी बच्चों को स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे।
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जानकारी के अनुसार शहर में वर्तमान में करीब 7.5 लाख से अधिक प्रवासी लोग निवास कर रहे हैं। इस बड़ी संख्या में से लगभग 5 लाख लोग विभिन्न निजी कंपनियों में कार्यरत हैं, जबकि करीब 2.5 लाख लोग दिहाड़ी मजदूरी और अन्य छोटे-मोटे कार्यों के माध्यम से अपना जीवन यापन कर रहे हैं।
इसमें 2.5 लाख वाला मजदूर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित था, क्योंकि पलायन और अस्थाई आवास के कारण उनके पास बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र या आधार कार्ड जैसे जरूरी कागजात उपलब्ध नहीं थे। विद्यालयों में दाखिला प्रक्रिया के दौरान इन दस्तावेजों की मांग होने पर उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था और कई बच्चे स्कूल जाने से रह जाते थे।
इस समस्या के स्थाई समाधान के लिए विभाग ने तकनीकी स्तर पर भी तैयारी पूरी कर ली है। जारी आदेशों के अनुसार जिन बच्चों के पास कोई पहचान पत्र नहीं है, उनके लिए विभाग द्वारा एक अलग से एमआईएस पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पोर्टल के माध्यम से ऐसे बच्चों का पंजीकरण विशेष श्रेणी में किया जा सकेगा, जिससे उनका शैक्षणिक रिकॉर्ड भी सुरक्षित रहेगा।