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Faridabad News: मकान विवाद में कोर्ट ने 2025 की रजिस्ट्री की रद्द
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कब्जा लौटाने और आपराधिक जांच के दिए आदेश
- 2004 के सौदे को प्रथमदृष्टया सही मानते हुए सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-28 स्थित 250 वर्गगज के मकान को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) नवीन कुमार-प्रथम की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने तीसरे पक्ष के आपत्तिकर्ता विजय कुमार भगत और हरीश कुमार केशवानी के पक्ष में निर्णय देते हुए छह मई 2025 को दीपक पांडेय के नाम हुई रजिस्ट्री रद्द कर दी। साथ ही दोनों को दोबारा मकान का कब्जा दिलाने के आदेश दिए हैं।
51 पृष्ठों के आदेश में अदालत ने माना कि आपत्तिकर्ताओं ने 11 अक्तूबर 2004 के बिक्री समझौते, नौ नवंबर 2004 के इकरारनामा, बिक्री राशि के भुगतान, कब्जा मिलने और मूल दस्तावेज के साक्ष्य पेश किए हैं। अदालत ने कहा कि बाद में 14 दिसंबर 2007 के समझौते और उसके आधार पर दायर दीवानी वाद के दौरान 2004 के पहले हुए सौदे और आपत्तिकर्ताओं के कब्जे की जानकारी न्यायालय से छिपाई गई। इसी कारण 22 नवंबर 2022 की डिक्री और उसके आधार पर छह मई 2025 को हुई रजिस्ट्री को आपत्तिकर्ताओं के अधिकारों पर बाध्यकारी नहीं माना गया।
न्यायालय ने सब-रजिस्ट्रार को रजिस्ट्री निरस्त करने संबंधी आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज करने व बेलिफ को तत्काल कब्जा वारंट जारी कर मकान का कब्जा विजय कुमार भगत और हरीश कुमार केशवानी को सौंपने के निर्देश दिए हैं। यदि विरोध होता है तो आवश्यक प्रक्रिया अपनाते हुए ताला तोड़ने तक की अनुमति भी दी गई है। संबंधित थाना प्रभारी को पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
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अदालत ने आर.के. तनेजा, दीपक पांडेय और साहिल तनेजा को संपत्ति का हस्तांतरण करने या तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने से भी रोक दिया है। साथ ही रिकॉर्ड के आधार पर प्रथमदृष्टया आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य अपराधों की जांच के लिए पुलिस आयुक्त फरीदाबाद को निर्देश दिए हैं। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और साक्ष्यों के आधार पर होगा। दीपक पांडेय पर 25 हजार रुपये का वाद व्यय भी लगाया गया है।
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- 2004 के सौदे को प्रथमदृष्टया सही मानते हुए सुनाया फैसला
संवाद न्यूज एजेंसी
फरीदाबाद। सेक्टर-28 स्थित 250 वर्गगज के मकान को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में सिविल जज (जूनियर डिवीजन) नवीन कुमार-प्रथम की अदालत ने फैसला सुनाया है। अदालत ने तीसरे पक्ष के आपत्तिकर्ता विजय कुमार भगत और हरीश कुमार केशवानी के पक्ष में निर्णय देते हुए छह मई 2025 को दीपक पांडेय के नाम हुई रजिस्ट्री रद्द कर दी। साथ ही दोनों को दोबारा मकान का कब्जा दिलाने के आदेश दिए हैं।
51 पृष्ठों के आदेश में अदालत ने माना कि आपत्तिकर्ताओं ने 11 अक्तूबर 2004 के बिक्री समझौते, नौ नवंबर 2004 के इकरारनामा, बिक्री राशि के भुगतान, कब्जा मिलने और मूल दस्तावेज के साक्ष्य पेश किए हैं। अदालत ने कहा कि बाद में 14 दिसंबर 2007 के समझौते और उसके आधार पर दायर दीवानी वाद के दौरान 2004 के पहले हुए सौदे और आपत्तिकर्ताओं के कब्जे की जानकारी न्यायालय से छिपाई गई। इसी कारण 22 नवंबर 2022 की डिक्री और उसके आधार पर छह मई 2025 को हुई रजिस्ट्री को आपत्तिकर्ताओं के अधिकारों पर बाध्यकारी नहीं माना गया।
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न्यायालय ने सब-रजिस्ट्रार को रजिस्ट्री निरस्त करने संबंधी आवश्यक प्रविष्टियां दर्ज करने व बेलिफ को तत्काल कब्जा वारंट जारी कर मकान का कब्जा विजय कुमार भगत और हरीश कुमार केशवानी को सौंपने के निर्देश दिए हैं। यदि विरोध होता है तो आवश्यक प्रक्रिया अपनाते हुए ताला तोड़ने तक की अनुमति भी दी गई है। संबंधित थाना प्रभारी को पुलिस सहायता उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
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अदालत ने आर.के. तनेजा, दीपक पांडेय और साहिल तनेजा को संपत्ति का हस्तांतरण करने या तीसरे पक्ष का अधिकार बनाने से भी रोक दिया है। साथ ही रिकॉर्ड के आधार पर प्रथमदृष्टया आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य अपराधों की जांच के लिए पुलिस आयुक्त फरीदाबाद को निर्देश दिए हैं। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण जांच और साक्ष्यों के आधार पर होगा। दीपक पांडेय पर 25 हजार रुपये का वाद व्यय भी लगाया गया है।