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Faridabad News: ईएसआईसी स्वास्थ्य जांच में बड़ा खुलासा...42% कर्मचारियों का मिला बढ़ा रक्तचाप
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7 मई से शुरू एनुअली प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप अभियान में 24 मई तक 1000 लाभार्थियों की की गई विस्तृत जांच
नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शुरू किए गए एनुअली प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप (एपीएचसी) अभियान के शुरुआती नतीजों ने बीमित कर्मचारियों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखी है। नई श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के बीमित कर्मचारियों के लिए शुरू किए गए इस अभियान में पहले 1000 लाभार्थियों की जांच के दौरान बड़ी संख्या में लोग गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम से जूझते मिले। सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि जांच में शामिल 42 प्रतिशत कर्मचारियों का रक्तचाप सामान्य से अधिक पाया गया, जबकि कई लाभार्थियों को अपनी स्वास्थ्य समस्या का पहले से पता ही नहीं था। विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी का संकेत मान रहे हैं।
7 मई से शुरू हुए इस अभियान में 24 मई तक 1000 लाभार्थियों की विस्तृत जांच की गई। इनमें 665 पुरुष और 335 महिलाएं शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार 42 प्रतिशत लोगों का रक्तचाप बढ़ा हुआ मिला, जबकि 28.1 प्रतिशत में हाई कोलेस्ट्रॉल पाया गया। इसके अलावा 19.4 प्रतिशत लाभार्थी एनीमिया से पीड़ित मिले। 26.8 प्रतिशत लोग अधिक वजन और 6.8 प्रतिशत मोटापे की श्रेणी में पाए गए। दो प्रतिशत कर्मचारियों का रैंडम ब्लड शुगर स्तर सामान्य से अधिक मिला, वहीं 14 लाभार्थियों की छाती के एक्स-रे में असामान्यताएं सामने आईं, जिन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए रेफर किया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 9.4 प्रतिशत कर्मचारी पहले से उच्च रक्तचाप और 5.2 प्रतिशत मधुमेह से पीड़ित थे।
महिलाओं में मोटापा और एनीमिया, पुरुषों में हाई बीपी अधिक
स्क्रीनिंग के दौरान पुरुष और महिला लाभार्थियों की स्वास्थ्य स्थिति में भी अंतर देखने को मिला। पुरुषों में उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए ब्लड शुगर के मामले अधिक पाए गए, जबकि महिलाओं में हाई कोलेस्ट्रॉल, अधिक वजन, मोटापा और एनीमिया की समस्या अपेक्षाकृत ज्यादा सामने आई। चिकित्सकों का कहना है कि यह स्थिति भविष्य में हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। समय रहते जांच और उपचार से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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चार हजार से अधिक ने कराया पंजीकरण
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एपीएचसी केवल सामान्य स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं है। इसमें ब्लड टेस्ट, किडनी और लीवर फंक्शन टेस्ट, थायरॉयड जांच, लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर, छाती का एक्स-रे तथा मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग, नेत्र और ईएनटी विशेषज्ञों की जांच शामिल है। साथ ही तंबाकू और शराब के सेवन जैसी आदतों का भी मूल्यांकन किया जाता है। अभियान शुरू होने के बाद अब तक करीब चार हजार बीमित लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया है। जिन लोगों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम मिले हैं, उन्हें जीवनशैली में सुधार की सलाह, दवा और आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञों के पास रेफर किया जा रहा है।
रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश गैर-संचारी बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती हैं। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग से बीमारी की समय पर पहचान संभव होती है, जिससे गंभीर जटिलताओं और इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। ईएसआईसी का यह अभियान इलाज आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
एनुअली प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप का उद्देश्य केवल बीमारियों का पता लगाना नहीं, बल्कि कर्मचारियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और रोगों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार सुनिश्चित करना है। शुरुआती रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों में गैर-संचारी रोगों के जोखिम मौजूद हैं। समय पर जांच, जीवनशैली में सुधार और नियमित फॉलोअप से इन बीमारियों के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
-डॉ. कालिदास चव्हाण दत्तात्रेय, डीन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
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नीरज धर पाण्डेय
फरीदाबाद। ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में शुरू किए गए एनुअली प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप (एपीएचसी) अभियान के शुरुआती नतीजों ने बीमित कर्मचारियों की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर गंभीर तस्वीर सामने रखी है। नई श्रम संहिताओं के तहत 40 वर्ष और उससे अधिक आयु के बीमित कर्मचारियों के लिए शुरू किए गए इस अभियान में पहले 1000 लाभार्थियों की जांच के दौरान बड़ी संख्या में लोग गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम से जूझते मिले। सबसे अधिक चिंता की बात यह रही कि जांच में शामिल 42 प्रतिशत कर्मचारियों का रक्तचाप सामान्य से अधिक पाया गया, जबकि कई लाभार्थियों को अपनी स्वास्थ्य समस्या का पहले से पता ही नहीं था। विशेषज्ञ इसे बदलती जीवनशैली, तनाव, अनियमित खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी का संकेत मान रहे हैं।
7 मई से शुरू हुए इस अभियान में 24 मई तक 1000 लाभार्थियों की विस्तृत जांच की गई। इनमें 665 पुरुष और 335 महिलाएं शामिल थीं। रिपोर्ट के अनुसार 42 प्रतिशत लोगों का रक्तचाप बढ़ा हुआ मिला, जबकि 28.1 प्रतिशत में हाई कोलेस्ट्रॉल पाया गया। इसके अलावा 19.4 प्रतिशत लाभार्थी एनीमिया से पीड़ित मिले। 26.8 प्रतिशत लोग अधिक वजन और 6.8 प्रतिशत मोटापे की श्रेणी में पाए गए। दो प्रतिशत कर्मचारियों का रैंडम ब्लड शुगर स्तर सामान्य से अधिक मिला, वहीं 14 लाभार्थियों की छाती के एक्स-रे में असामान्यताएं सामने आईं, जिन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए रेफर किया गया। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि 9.4 प्रतिशत कर्मचारी पहले से उच्च रक्तचाप और 5.2 प्रतिशत मधुमेह से पीड़ित थे।
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महिलाओं में मोटापा और एनीमिया, पुरुषों में हाई बीपी अधिक
स्क्रीनिंग के दौरान पुरुष और महिला लाभार्थियों की स्वास्थ्य स्थिति में भी अंतर देखने को मिला। पुरुषों में उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए ब्लड शुगर के मामले अधिक पाए गए, जबकि महिलाओं में हाई कोलेस्ट्रॉल, अधिक वजन, मोटापा और एनीमिया की समस्या अपेक्षाकृत ज्यादा सामने आई। चिकित्सकों का कहना है कि यह स्थिति भविष्य में हृदय रोग, स्ट्रोक, किडनी रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है। समय रहते जांच और उपचार से इन जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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चार हजार से अधिक ने कराया पंजीकरण
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, एपीएचसी केवल सामान्य स्वास्थ्य जांच तक सीमित नहीं है। इसमें ब्लड टेस्ट, किडनी और लीवर फंक्शन टेस्ट, थायरॉयड जांच, लिपिड प्रोफाइल, ब्लड शुगर, छाती का एक्स-रे तथा मेडिसिन, स्त्री एवं प्रसूति रोग, नेत्र और ईएनटी विशेषज्ञों की जांच शामिल है। साथ ही तंबाकू और शराब के सेवन जैसी आदतों का भी मूल्यांकन किया जाता है। अभियान शुरू होने के बाद अब तक करीब चार हजार बीमित लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया है। जिन लोगों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम मिले हैं, उन्हें जीवनशैली में सुधार की सलाह, दवा और आवश्यकता अनुसार विशेषज्ञों के पास रेफर किया जा रहा है।
रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि अधिकांश गैर-संचारी बीमारियां शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होती हैं। ऐसे में नियमित स्क्रीनिंग से बीमारी की समय पर पहचान संभव होती है, जिससे गंभीर जटिलताओं और इलाज पर होने वाले खर्च को कम किया जा सकता है। ईएसआईसी का यह अभियान इलाज आधारित व्यवस्था से आगे बढ़कर रोकथाम आधारित स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
एनुअली प्रिवेंटिव हेल्थ चेकअप का उद्देश्य केवल बीमारियों का पता लगाना नहीं, बल्कि कर्मचारियों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और रोगों की समय रहते पहचान कर उनका उपचार सुनिश्चित करना है। शुरुआती रिपोर्ट बताती है कि बड़ी संख्या में लाभार्थियों में गैर-संचारी रोगों के जोखिम मौजूद हैं। समय पर जांच, जीवनशैली में सुधार और नियमित फॉलोअप से इन बीमारियों के बोझ को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
-डॉ. कालिदास चव्हाण दत्तात्रेय, डीन, ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल