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Faridabad News: हरियाणा की संस्कृति को बढ़ावा देने में बुजुर्ग भी नहीं है पीछे
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मेले में करनाल से आई पवन धेरू पार्टी के कलाकार रागनी के जरिये लोगों का कर रहे मनोरंजन
बल्लभगढ़। हरियाणवी संस्कृति को बचाने के लिए मेले में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से विभिन्न कलाकारों को बुलाया गया है। जो हरियाणा की संस्कृति को बढ़वा दे रहे है। इस बार मेले में करनाल से आए पवन धेरू पार्टी को लोग काफी पसंद कर रहे है। जो मेले में रागनी के जरिये हरियाणी संस्कृति का प्रर्दशन कर रहे हैं।
पवन धेरू पार्टी के अंदर छह कलाकार शामिल है। इनमें अतर सिंह उम्र 70, भीम सिंह उम्र 60, जसवंत उम्र 55, जय भगवान उम्र 50, ओम प्रकाश उम्र 45 और पवन उम्र 40 साल शामिल है। यह सभी पिछले कई सालों में मेले में आ रहे है और रागिनी प्रस्तुत करते है। उनकी ओर से सूरजकुंड मेले में सौ-सौ पड़े मुसीबत बेटा उमर जवानी मैं... भगत सिंह कदे जी घबरा ज्या तेरा बंद मकान में... ने पंडाल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। उनकी हरियाणवीं बोली में प्रस्तुत की गई यह रागिनी शहीद ऐ आजम भगत सिंह की वीरगाथा पर आधारित रही। इस रागिनी के हर शब्द को दर्शकों ने खूब बारीकी से सुना तथा पहले और आधुनिक समय में हो रहे बदलाव की कहानी को महसूस किया। इन रागिनियों के जरिये उन्होंने सूरजकुंड मेले के बारे में भी लोगों को जागरूक कर रहे है।
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बल्लभगढ़। हरियाणवी संस्कृति को बचाने के लिए मेले में कला एवं सांस्कृतिक कार्य विभाग की ओर से विभिन्न कलाकारों को बुलाया गया है। जो हरियाणा की संस्कृति को बढ़वा दे रहे है। इस बार मेले में करनाल से आए पवन धेरू पार्टी को लोग काफी पसंद कर रहे है। जो मेले में रागनी के जरिये हरियाणी संस्कृति का प्रर्दशन कर रहे हैं।
पवन धेरू पार्टी के अंदर छह कलाकार शामिल है। इनमें अतर सिंह उम्र 70, भीम सिंह उम्र 60, जसवंत उम्र 55, जय भगवान उम्र 50, ओम प्रकाश उम्र 45 और पवन उम्र 40 साल शामिल है। यह सभी पिछले कई सालों में मेले में आ रहे है और रागिनी प्रस्तुत करते है। उनकी ओर से सूरजकुंड मेले में सौ-सौ पड़े मुसीबत बेटा उमर जवानी मैं... भगत सिंह कदे जी घबरा ज्या तेरा बंद मकान में... ने पंडाल को देशभक्ति के रंग में रंग दिया। उनकी हरियाणवीं बोली में प्रस्तुत की गई यह रागिनी शहीद ऐ आजम भगत सिंह की वीरगाथा पर आधारित रही। इस रागिनी के हर शब्द को दर्शकों ने खूब बारीकी से सुना तथा पहले और आधुनिक समय में हो रहे बदलाव की कहानी को महसूस किया। इन रागिनियों के जरिये उन्होंने सूरजकुंड मेले के बारे में भी लोगों को जागरूक कर रहे है।
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