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Faridabad News: बेनतीजा रही नगर निगम सदन की बैठक, गुटबाजी रही हावी
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46 वार्डों के 101 प्रस्ताव पर होनी थी चर्चा, लेकिन फाइनेंस कमेटी की मांग रही हावी
अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम फरीदाबाद की सदन बैठक सोमवार को करीब छह घंटे तक चली लेकिन लंबी चर्चा और 101 एजेंडों के बावजूद बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। शहर के 46 वार्डों से जुड़े विकास प्रस्ताव सदन रखे जाने थे वहीं बैठक में सबसे अहम मुद्दा फाइनेंस कमेटी का गठन का रहा। बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों के बीच मतभेद साफ तौर पर नजर आए, जिससे कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
बैठक की शुरुआत में कुछ पार्षदों ने सदन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराने के लिए रजिस्टर में हस्ताक्षर करने को कहा लेकिन इसी दौरान पार्षद अपनी मांगों को लेकर एकजुट हो गए। अधिकांश पार्षदों की राय थी कि जब तक फाइनेंस कमेटी का गठन नहीं होता, तब तक विकास कार्यों को गति मिलना मुश्किल है।
फाइनेंस कमेटी बनी मुख्य मुद्दा
वार्ड-21 से पार्षद विरेंद्र भड़ाना सहित कई पार्षदों ने सदन में कहा कि फाइनेंस कमेटी के अभाव में पार्षद अपने ही वार्डों में काम कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पार्षदों ने बताया कि नगर निगम आयुक्त के पास ढाई करोड़ रुपये तक के कार्यों को स्वीकृति देने का अधिकार है जबकि इससे अधिक लागत वाले कार्यों को फाइनेंस कमेटी से ही पास किया जा सकता है।
फाइनेंस कमेटी न होने के कारण बड़े विकास कार्यों को सीधे मंत्रालय स्तर से करवाना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है। पार्षदों का कहना था कि इसी वजह से शहर में कई जरूरी काम महीनों से फाइलों में अटके पड़े हैं।
46 वार्डों के प्रस्ताव सदन में
बैठक में शहर के सभी 46 वार्डों से जुड़े कुल 101 प्रस्ताव रखे जाने थे। इनमें सड़क निर्माण, नालों की सफाई, सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का विकास, बरसाती जल निकासी, अंडरपास, सफाई व्यवस्था और मरम्मत कार्य शामिल थे। इसके अलावा अवैध कब्जों को हटाने, सीवर ओवरफ्लो की समस्या, पेयजल आपूर्ति, पार्कों की हालत सुधारने और सफाई व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होनी थी। कुछ प्रस्तावों पर चर्चा हुई लेकिन पार्षदों का कहना था कि जब तक फाइनेंस कमेटी सक्रिय नहीं होती तब तक इन प्रस्तावों का धरातल पर उतरना मुश्किल है।
बीजेपी के भीतर दिखी अलग-अलग धाराएं
बैठक के दौरान भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी भी खुलकर सामने आई। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर से जुड़े पार्षद फाइनेंस कमेटी के गठन की मांग को लेकर मुखर दिखाई दिए। उन्होंने इसे विकास कार्यों के लिए सबसे जरूरी बताते हुए जल्द निर्णय लेने की मांग की। वहीं कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के समर्थन वाले पार्षद और निगम अधिकारी बैठक को व्यवस्थित ढंग से चलाने और एजेंडों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते नजर आए। दोनों पक्षों के बीच तालमेल की कमी का असर सदन की कार्यवाही पर भी दिखा।
11 अगस्त की बैठक का अधूरा मामला फिर उठा
सदन में यह मुद्दा भी उठा कि 11 अगस्त में फाइनेंस कमेटी के गठन के लिए बुलाई गई बैठक बेनतीजा रही थी। पार्षदों ने बताया कि उस दिन वे कई घंटों तक बैठक स्थल पर मौजूद रहे लेकिन मेयर के न पहुंचने के कारण बैठक नहीं हो सकी थी। उस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, विधायक मूलचंद शर्मा, धनेश अदलक्खा और सतीश फागना भी मौजूद थे फिर भी कोई निर्णय नहीं हो पाया।
डेढ़ साल से विकास कार्यों पर असर
बैठक में यह बात भी सामने आई कि आपसी समन्वय और निर्णयों में देरी के कारण एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद शहर के कई इलाकों में विकास कार्य प्रभावित हैं। सड़कें, नालियां, सीवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं।
मीडिया की एंट्री पर रोक उठे सवाल
इस बार की बैठक को लेकर एक और विवाद तब खड़ा हुआ जब निगम प्रशासन ने पत्रकारों के सदन में प्रवेश पर रोक लगा दी। इस फैसले पर कई लोगों ने सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि यदि बैठक में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही थी तो मीडिया को बाहर रखने की जरूरत क्यों पड़ी। इससे बैठक की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हुए। लोगों का कहना था कि विधानसभा व लोकसभा के साथ राज्यसभा तक की कार्यवाही लाइव चलती है तो इसमें ऐसा क्या था कि बैठक को चोरी छिपे करने की जरूरत पड़ गई।
नतीजा वही उम्मीदें फिर अधूरी
लंबी बैठक और दर्जनों प्रस्तावों के बावजूद फाइनेंस कमेटी के गठन पर सहमति नहीं बन सकी। विकास कार्यों को लेकर पार्षदों की चिंता जस की तस बनी रही। पिछली बैठकों की तरह यह बैठक भी ठोस फैसलों के बिना समाप्त हो गई जिससे शहरवासियों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा।
बैठक काफी अच्छी रही। हम सभी मिलकर काम कर रहे हैं। सभी पार्षद मिलकर काम कर रहे हैं, मैं भी सभी पार्षदों के साथ खड़ी हूं, फाइनेंस कमेटी का चुनाव सभी जिलों का रुका है केवल दो जिलों का हुआ है। यहां बीजेपी बहुमत में है कभी भी एक पार्टी के लोग आपस में चुनाव नहीं करते हैं। इसे शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। - मेयर प्रवीण बत्रा जोशी
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अमर उजाला ब्यूरो
फरीदाबाद। नगर निगम फरीदाबाद की सदन बैठक सोमवार को करीब छह घंटे तक चली लेकिन लंबी चर्चा और 101 एजेंडों के बावजूद बैठक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। शहर के 46 वार्डों से जुड़े विकास प्रस्ताव सदन रखे जाने थे वहीं बैठक में सबसे अहम मुद्दा फाइनेंस कमेटी का गठन का रहा। बैठक के दौरान भारतीय जनता पार्टी के पार्षदों के बीच मतभेद साफ तौर पर नजर आए, जिससे कार्यवाही कई बार बाधित हुई।
बैठक की शुरुआत में कुछ पार्षदों ने सदन की औपचारिक प्रक्रिया पूरी कराने के लिए रजिस्टर में हस्ताक्षर करने को कहा लेकिन इसी दौरान पार्षद अपनी मांगों को लेकर एकजुट हो गए। अधिकांश पार्षदों की राय थी कि जब तक फाइनेंस कमेटी का गठन नहीं होता, तब तक विकास कार्यों को गति मिलना मुश्किल है।
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फाइनेंस कमेटी बनी मुख्य मुद्दा
वार्ड-21 से पार्षद विरेंद्र भड़ाना सहित कई पार्षदों ने सदन में कहा कि फाइनेंस कमेटी के अभाव में पार्षद अपने ही वार्डों में काम कराने के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। पार्षदों ने बताया कि नगर निगम आयुक्त के पास ढाई करोड़ रुपये तक के कार्यों को स्वीकृति देने का अधिकार है जबकि इससे अधिक लागत वाले कार्यों को फाइनेंस कमेटी से ही पास किया जा सकता है।
फाइनेंस कमेटी न होने के कारण बड़े विकास कार्यों को सीधे मंत्रालय स्तर से करवाना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है। पार्षदों का कहना था कि इसी वजह से शहर में कई जरूरी काम महीनों से फाइलों में अटके पड़े हैं।
46 वार्डों के प्रस्ताव सदन में
बैठक में शहर के सभी 46 वार्डों से जुड़े कुल 101 प्रस्ताव रखे जाने थे। इनमें सड़क निर्माण, नालों की सफाई, सीवर लाइन, स्ट्रीट लाइट, पार्कों का विकास, बरसाती जल निकासी, अंडरपास, सफाई व्यवस्था और मरम्मत कार्य शामिल थे। इसके अलावा अवैध कब्जों को हटाने, सीवर ओवरफ्लो की समस्या, पेयजल आपूर्ति, पार्कों की हालत सुधारने और सफाई व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होनी थी। कुछ प्रस्तावों पर चर्चा हुई लेकिन पार्षदों का कहना था कि जब तक फाइनेंस कमेटी सक्रिय नहीं होती तब तक इन प्रस्तावों का धरातल पर उतरना मुश्किल है।
बीजेपी के भीतर दिखी अलग-अलग धाराएं
बैठक के दौरान भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी भी खुलकर सामने आई। केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर से जुड़े पार्षद फाइनेंस कमेटी के गठन की मांग को लेकर मुखर दिखाई दिए। उन्होंने इसे विकास कार्यों के लिए सबसे जरूरी बताते हुए जल्द निर्णय लेने की मांग की। वहीं कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के समर्थन वाले पार्षद और निगम अधिकारी बैठक को व्यवस्थित ढंग से चलाने और एजेंडों को आगे बढ़ाने का प्रयास करते नजर आए। दोनों पक्षों के बीच तालमेल की कमी का असर सदन की कार्यवाही पर भी दिखा।
11 अगस्त की बैठक का अधूरा मामला फिर उठा
सदन में यह मुद्दा भी उठा कि 11 अगस्त में फाइनेंस कमेटी के गठन के लिए बुलाई गई बैठक बेनतीजा रही थी। पार्षदों ने बताया कि उस दिन वे कई घंटों तक बैठक स्थल पर मौजूद रहे लेकिन मेयर के न पहुंचने के कारण बैठक नहीं हो सकी थी। उस बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री कृष्णपाल गुर्जर, विधायक मूलचंद शर्मा, धनेश अदलक्खा और सतीश फागना भी मौजूद थे फिर भी कोई निर्णय नहीं हो पाया।
डेढ़ साल से विकास कार्यों पर असर
बैठक में यह बात भी सामने आई कि आपसी समन्वय और निर्णयों में देरी के कारण एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद शहर के कई इलाकों में विकास कार्य प्रभावित हैं। सड़कें, नालियां, सीवर और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर लोग लगातार शिकायतें कर रहे हैं।
मीडिया की एंट्री पर रोक उठे सवाल
इस बार की बैठक को लेकर एक और विवाद तब खड़ा हुआ जब निगम प्रशासन ने पत्रकारों के सदन में प्रवेश पर रोक लगा दी। इस फैसले पर कई लोगों ने सवाल उठाए। लोगों का कहना था कि यदि बैठक में जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो रही थी तो मीडिया को बाहर रखने की जरूरत क्यों पड़ी। इससे बैठक की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हुए। लोगों का कहना था कि विधानसभा व लोकसभा के साथ राज्यसभा तक की कार्यवाही लाइव चलती है तो इसमें ऐसा क्या था कि बैठक को चोरी छिपे करने की जरूरत पड़ गई।
नतीजा वही उम्मीदें फिर अधूरी
लंबी बैठक और दर्जनों प्रस्तावों के बावजूद फाइनेंस कमेटी के गठन पर सहमति नहीं बन सकी। विकास कार्यों को लेकर पार्षदों की चिंता जस की तस बनी रही। पिछली बैठकों की तरह यह बैठक भी ठोस फैसलों के बिना समाप्त हो गई जिससे शहरवासियों की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा।
बैठक काफी अच्छी रही। हम सभी मिलकर काम कर रहे हैं। सभी पार्षद मिलकर काम कर रहे हैं, मैं भी सभी पार्षदों के साथ खड़ी हूं, फाइनेंस कमेटी का चुनाव सभी जिलों का रुका है केवल दो जिलों का हुआ है। यहां बीजेपी बहुमत में है कभी भी एक पार्टी के लोग आपस में चुनाव नहीं करते हैं। इसे शीर्ष नेतृत्व तय करेगा। - मेयर प्रवीण बत्रा जोशी