{"_id":"69f25125dc5c4ca55e0c5fc4","slug":"online-games-have-become-silent-killers-trapping-young-people-in-a-web-of-tasks-addiction-and-money-faridabad-news-c-26-1-fbd1021-68807-2026-04-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Faridabad News: ऑनलाइन गेम बना खामोश कातिल, टास्क, लत और पैसों के जाल में फंस रहे युवा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Faridabad News: ऑनलाइन गेम बना खामोश कातिल, टास्क, लत और पैसों के जाल में फंस रहे युवा
विज्ञापन
विज्ञापन
एनसीआर में लगातार सामने आ रहे मामले, ऑनलाइन गेमिंग आत्मघाती कदमों की वजह बनती जा रही
सचिन कुमार
फरीदाबाद। मोबाइल स्क्रीन पर शुरू होने वाला खेल अब कई जिंदगियों का अंत बनता जा रहा है। ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-77 में 22 वर्षीय छात्र द्वारा खुद को गोली मारने की घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन गेमिंग के खतरनाक असर को सामने ला दिया है। युवक लंबे समय से गेमिंग में डूबा हुआ था और पैसों के नुकसान के साथ मानसिक दबाव में था। यही दबाव उसे उस मोड़ पर ले गया, जहां से लौटना संभव नहीं रहा।
यह सिर्फ एक घटना नहीं है। एनसीआर में बीते महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां गेमिंग की लत ने युवाओं और किशोरों को धीरे-धीरे वास्तविक दुनिया से दूर कर दिया। गुरुग्राम में एक व्यक्ति का लाखों रुपए हारने के बाद आत्मघाती कदम उठाना, इस बढ़ते खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।
ऑनलाइन गेमिंग का यह नया रूप केवल समय बिताने का साधन नहीं रह गया है। टास्क-बेस्ड गेम्स, चैलेंज और रिवॉर्ड सिस्टम के जरिए यूजर को इस तरह बांध लिया जाता है कि वह खुद को इससे अलग नहीं कर पाता। धीरे-धीरे यह लत मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और भावनात्मक टूटन में बदल जाती है। कई मामलों में खिलाड़ी वास्तविक रिश्तों से कटने लगता है और अकेलेपन में फंस जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इन गेम्स की डिजाइन ही ऐसी होती है, जो यूजर को बार-बार खेलने के लिए मजबूर करती है। लेवल, रिवॉर्ड और पेनल्टी का दबाव दिमाग पर असर डालता है। जब खिलाड़ी हारता है या गेम से दूर किया जाता है, तो उसे बेचैनी, गुस्सा और निराशा घेर लेती है। यही स्थिति कई बार खतरनाक फैसलों में बदल जाती है।
खतरनाक गेम्स और चैलेंज
•
टास्क-बेस्ड गेम्स: यूजर को मानसिक रूप से कंट्रोल करना, असली दुनिया से दूरी
•
ब्लू व्हेल / मोमो जैसे चैलेंज: खतरनाक टास्क देकर आत्म-हानि की ओर धकेलना
•
पास आउट चैलेंज: सांस रोकने जैसे जोखिम भरे टास्क
•
बैटल गेम्स : आक्रामकता और हिंसक सोच में बढ़ोतरी
•
ऑनलाइन कैश गेम्स: लगातार पैसे हारने से आर्थिक और मानसिक दबाव
लत के संकेत
•
हर समय गेम के बारे में सोचना
•
मना करने पर गुस्सा और चिड़चिड़ापन
•
पढ़ाई और दिनचर्या से दूरी
•
नींद का बिगड़ना
•
अकेले रहना पसंद करना
•
चोरी-छिपे मोबाइल इस्तेमाल
बचाव के उपाय
• स्क्रीन टाइम तय और मॉनिटर करें
•
पेरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करें
•
बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें
•
पेमेंट और बैंकिंग एक्सेस सुरक्षित रखें
•
डिजिटल जोखिमों के प्रति जागरूक करें
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
मोबाइल में अभिभावक नियंत्रण ऐसे करें
ऐसे मामलों को देखते हुए बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण जरूरी है। एंड्रॉयड फोन में प्ले स्टोर की सेटिंग में जाकर परिवार विकल्प के तहत अभिभावक नियंत्रण चालू करें, चार अंकों का गुप्त कोड सेट करें और उम्र के अनुसार एप व खेलों की सीमा तय कर दें। आईफोन में सेटिंग के अंदर स्क्रीन समय चालू कर सामग्री व गोपनीयता प्रतिबंध सक्रिय करें और उपयोग की सीमा निर्धारित करें। इससे बच्चों की पहुंच खतरनाक खेलों और अनुपयुक्त सामग्री तक सीमित हो जाती है तथा उनकी सुरक्षा बेहतर तरीके से की जा सकती है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
गेमिंग की लत एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में तेजी से उभर रही है, जो विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को प्रभावित कर रही है। गेमिंग की लत को समय पर पहचानना बहुत जरूरी है। हम बच्चों और अभिभावकों को स्क्रीन टाइम सीमित करने, दैनिक दिनचर्या को अनुशासित बनाने और इसके स्वस्थ विकल्प जैसे शारीरिक गतिविधियां व सामाजिक मेलजोल अपनाने की सलाह देते हैं।-डॉ. पारुल सिंह, मनोरोग विशेषज्ञ
Trending Videos
सचिन कुमार
फरीदाबाद। मोबाइल स्क्रीन पर शुरू होने वाला खेल अब कई जिंदगियों का अंत बनता जा रहा है। ग्रेटर फरीदाबाद के सेक्टर-77 में 22 वर्षीय छात्र द्वारा खुद को गोली मारने की घटना ने एक बार फिर ऑनलाइन गेमिंग के खतरनाक असर को सामने ला दिया है। युवक लंबे समय से गेमिंग में डूबा हुआ था और पैसों के नुकसान के साथ मानसिक दबाव में था। यही दबाव उसे उस मोड़ पर ले गया, जहां से लौटना संभव नहीं रहा।
यह सिर्फ एक घटना नहीं है। एनसीआर में बीते महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां गेमिंग की लत ने युवाओं और किशोरों को धीरे-धीरे वास्तविक दुनिया से दूर कर दिया। गुरुग्राम में एक व्यक्ति का लाखों रुपए हारने के बाद आत्मघाती कदम उठाना, इस बढ़ते खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऑनलाइन गेमिंग का यह नया रूप केवल समय बिताने का साधन नहीं रह गया है। टास्क-बेस्ड गेम्स, चैलेंज और रिवॉर्ड सिस्टम के जरिए यूजर को इस तरह बांध लिया जाता है कि वह खुद को इससे अलग नहीं कर पाता। धीरे-धीरे यह लत मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और भावनात्मक टूटन में बदल जाती है। कई मामलों में खिलाड़ी वास्तविक रिश्तों से कटने लगता है और अकेलेपन में फंस जाता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इन गेम्स की डिजाइन ही ऐसी होती है, जो यूजर को बार-बार खेलने के लिए मजबूर करती है। लेवल, रिवॉर्ड और पेनल्टी का दबाव दिमाग पर असर डालता है। जब खिलाड़ी हारता है या गेम से दूर किया जाता है, तो उसे बेचैनी, गुस्सा और निराशा घेर लेती है। यही स्थिति कई बार खतरनाक फैसलों में बदल जाती है।
खतरनाक गेम्स और चैलेंज
•
टास्क-बेस्ड गेम्स: यूजर को मानसिक रूप से कंट्रोल करना, असली दुनिया से दूरी
•
ब्लू व्हेल / मोमो जैसे चैलेंज: खतरनाक टास्क देकर आत्म-हानि की ओर धकेलना
•
पास आउट चैलेंज: सांस रोकने जैसे जोखिम भरे टास्क
•
बैटल गेम्स : आक्रामकता और हिंसक सोच में बढ़ोतरी
•
ऑनलाइन कैश गेम्स: लगातार पैसे हारने से आर्थिक और मानसिक दबाव
लत के संकेत
•
हर समय गेम के बारे में सोचना
•
मना करने पर गुस्सा और चिड़चिड़ापन
•
पढ़ाई और दिनचर्या से दूरी
•
नींद का बिगड़ना
•
अकेले रहना पसंद करना
•
चोरी-छिपे मोबाइल इस्तेमाल
बचाव के उपाय
• स्क्रीन टाइम तय और मॉनिटर करें
•
पेरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करें
•
बच्चों के साथ संवाद बनाए रखें
•
पेमेंट और बैंकिंग एक्सेस सुरक्षित रखें
•
डिजिटल जोखिमों के प्रति जागरूक करें
मोबाइल में अभिभावक नियंत्रण ऐसे करें
ऐसे मामलों को देखते हुए बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नियंत्रण जरूरी है। एंड्रॉयड फोन में प्ले स्टोर की सेटिंग में जाकर परिवार विकल्प के तहत अभिभावक नियंत्रण चालू करें, चार अंकों का गुप्त कोड सेट करें और उम्र के अनुसार एप व खेलों की सीमा तय कर दें। आईफोन में सेटिंग के अंदर स्क्रीन समय चालू कर सामग्री व गोपनीयता प्रतिबंध सक्रिय करें और उपयोग की सीमा निर्धारित करें। इससे बच्चों की पहुंच खतरनाक खेलों और अनुपयुक्त सामग्री तक सीमित हो जाती है तथा उनकी सुरक्षा बेहतर तरीके से की जा सकती है।
गेमिंग की लत एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में तेजी से उभर रही है, जो विशेष रूप से बच्चों और किशोरों को प्रभावित कर रही है। गेमिंग की लत को समय पर पहचानना बहुत जरूरी है। हम बच्चों और अभिभावकों को स्क्रीन टाइम सीमित करने, दैनिक दिनचर्या को अनुशासित बनाने और इसके स्वस्थ विकल्प जैसे शारीरिक गतिविधियां व सामाजिक मेलजोल अपनाने की सलाह देते हैं।-डॉ. पारुल सिंह, मनोरोग विशेषज्ञ
