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Delhi NCR News: ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में खाने की दिक्कत, समय पर पहचान जरूरी
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) से पीड़ित कई बच्चों को खाने-पीने में परेशानी होती है। इसके पीछे स्वाद, गंध, बनावट और छूने जैसी चीजों को महसूस करने में होने वाली संवेदी दिक्कतें एक बड़ी वजह हो सकती हैं। ऐसे बच्चे कई बार कुछ खास तरह के भोजन से पूरी तरह परहेज करते हैं, जिससे उनका खान-पान सीमित हो जाता है और इसका असर पोषण पर पड़ सकता है। दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन समस्याओं की समय रहते पहचान कर इलाज शुरू किया जाए और परिवार भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाए, तो बच्चों की खाने की आदतों और स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है।
दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल की डॉ. भावना वर्मा ने कहा कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में केवल व्यवहार संबंधी समस्याओं पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। उनकी संवेदी दिक्कतों की समय पर पहचान और इलाज भी उतना ही जरूरी है। अगर परिवार, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ और पोषण विशेषज्ञ मिलकर काम करें, तो बच्चों की खाने की आदतों और पोषण में बेहतर सुधार लाया जा सकता है। डॉ. भावना का कहना है कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के नियमित उपचार में संवेदी जांच को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि उनकी जरूरत के अनुसार देखभाल और उपचार दिया जा सके। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार संभव है। उनका कहना है कि ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ और अभिभावक मिलकर काम करें तो बच्चों को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
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नई दिल्ली। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (एएसडी) से पीड़ित कई बच्चों को खाने-पीने में परेशानी होती है। इसके पीछे स्वाद, गंध, बनावट और छूने जैसी चीजों को महसूस करने में होने वाली संवेदी दिक्कतें एक बड़ी वजह हो सकती हैं। ऐसे बच्चे कई बार कुछ खास तरह के भोजन से पूरी तरह परहेज करते हैं, जिससे उनका खान-पान सीमित हो जाता है और इसका असर पोषण पर पड़ सकता है। दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल के विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इन समस्याओं की समय रहते पहचान कर इलाज शुरू किया जाए और परिवार भी इसमें सक्रिय भूमिका निभाए, तो बच्चों की खाने की आदतों और स्वास्थ्य में सुधार लाया जा सकता है।
दिल्ली के वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज और सफदरजंग अस्पताल की डॉ. भावना वर्मा ने कहा कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों में केवल व्यवहार संबंधी समस्याओं पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। उनकी संवेदी दिक्कतों की समय पर पहचान और इलाज भी उतना ही जरूरी है। अगर परिवार, ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ और पोषण विशेषज्ञ मिलकर काम करें, तो बच्चों की खाने की आदतों और पोषण में बेहतर सुधार लाया जा सकता है। डॉ. भावना का कहना है कि ऑटिज्म से पीड़ित बच्चों के नियमित उपचार में संवेदी जांच को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि उनकी जरूरत के अनुसार देखभाल और उपचार दिया जा सके। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार संभव है। उनका कहना है कि ऑक्यूपेशनल थेरेपिस्ट, बाल रोग विशेषज्ञ, पोषण विशेषज्ञ और अभिभावक मिलकर काम करें तो बच्चों को बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
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