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Delhi NCR News: बुखार ठीक, फिर भी खांसी बरकरार...प्रदूषण बना सांस की नलियों का दुश्मन
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बोलने पर खांसी और आवाज बैठने को न करें नजरअंदाज, हर बार एंटीबायोटिक लेना नहीं है समाधान
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बुखार उतरने और गले की खराश ठीक होने के बाद भी अगर खांसी पीछा नहीं छोड़ रही है, तो इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। कई बार बोलते ही खांसी शुरू हो जाती है और आवाज भी बैठने लगती है। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण ठीक होने के बाद भी सांस की नलियों में सूजन और संवेदनशीलता बनी रह सकती है। दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण इस समस्या को और गंभीर बना सकता है। ऐसे में खांसी की वजह पहचानकर उचित इलाज कराना जरूरी है।
इन दिनों डॉक्टरों के पास ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें कई सप्ताह या महीनों से खांसी बनी हुई है। पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. जीसी खिलनानी के अनुसार, संक्रमण खत्म होने के बाद भी सांस की नलियों को सामान्य होने में समय लग सकता है। इस दौरान धूल, धुआं और प्रदूषण खांसी को बढ़ा सकते हैं।
एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण में कारगर होती हैं। वायरल संक्रमण या सांस की नलियों में बची सूजन के कारण होने वाली खांसी में इनका लाभ नहीं मिलता। बार-बार बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचना चाहिए। लंबे समय तक खांसी रहने के पीछे अस्थमा, एलर्जी, टीबी, सीओपीडी और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
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बोलने पर इसलिए आने लगती है खांसी
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अनिमेष आर्य के अनुसार, लगातार खांसी से गले और स्वर यंत्र में जलन हो सकती है, जिससे खांसी का रिफ्लेक्स अधिक संवेदनशील हो जाता है। बोलते समय खांसी आना या आवाज बैठना वायरल संक्रमण, एसिड रिफ्लक्स, एलर्जी अथवा वोकल कॉर्ड में सूजन का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में अस्थमा भी इसकी वजह बनता है। ऐसी स्थिति में ईएनटी विशेषज्ञ या फेफड़ों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
प्रदूषण से बढ़ सकती है परेशानी
दिल्ली में पीएम 2.5, धूल, धुआं और वाहनों से निकलने वाली गैसें सांस की नलियों में जलन बढ़ा सकती हैं। बचाव के लिए प्रदूषण अधिक होने पर बाहर निकलने से बचें, खुले में भारी व्यायाम न करें और जरूरत पड़ने पर एन-95 मास्क पहनें। बुजुर्गों और अस्थमा, सीओपीडी या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। खांसी कई सप्ताह तक बनी रहे, बढ़ती जाए या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। बुखार उतरने और गले की खराश ठीक होने के बाद भी अगर खांसी पीछा नहीं छोड़ रही है, तो इसे सामान्य परेशानी समझकर नजरअंदाज न करें। कई बार बोलते ही खांसी शुरू हो जाती है और आवाज भी बैठने लगती है। डॉक्टरों के अनुसार, संक्रमण ठीक होने के बाद भी सांस की नलियों में सूजन और संवेदनशीलता बनी रह सकती है। दिल्ली में बढ़ता वायु प्रदूषण इस समस्या को और गंभीर बना सकता है। ऐसे में खांसी की वजह पहचानकर उचित इलाज कराना जरूरी है।
इन दिनों डॉक्टरों के पास ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जिन्हें कई सप्ताह या महीनों से खांसी बनी हुई है। पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर और स्लीप मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. जीसी खिलनानी के अनुसार, संक्रमण खत्म होने के बाद भी सांस की नलियों को सामान्य होने में समय लग सकता है। इस दौरान धूल, धुआं और प्रदूषण खांसी को बढ़ा सकते हैं।
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एंटीबायोटिक दवाएं बैक्टीरिया से होने वाले संक्रमण में कारगर होती हैं। वायरल संक्रमण या सांस की नलियों में बची सूजन के कारण होने वाली खांसी में इनका लाभ नहीं मिलता। बार-बार बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक लेने से बचना चाहिए। लंबे समय तक खांसी रहने के पीछे अस्थमा, एलर्जी, टीबी, सीओपीडी और एसिड रिफ्लक्स जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
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बोलने पर इसलिए आने लगती है खांसी
रेस्पिरेटरी मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. अनिमेष आर्य के अनुसार, लगातार खांसी से गले और स्वर यंत्र में जलन हो सकती है, जिससे खांसी का रिफ्लेक्स अधिक संवेदनशील हो जाता है। बोलते समय खांसी आना या आवाज बैठना वायरल संक्रमण, एसिड रिफ्लक्स, एलर्जी अथवा वोकल कॉर्ड में सूजन का संकेत हो सकता है। कुछ मामलों में अस्थमा भी इसकी वजह बनता है। ऐसी स्थिति में ईएनटी विशेषज्ञ या फेफड़ों के डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
प्रदूषण से बढ़ सकती है परेशानी
दिल्ली में पीएम 2.5, धूल, धुआं और वाहनों से निकलने वाली गैसें सांस की नलियों में जलन बढ़ा सकती हैं। बचाव के लिए प्रदूषण अधिक होने पर बाहर निकलने से बचें, खुले में भारी व्यायाम न करें और जरूरत पड़ने पर एन-95 मास्क पहनें। बुजुर्गों और अस्थमा, सीओपीडी या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। खांसी कई सप्ताह तक बनी रहे, बढ़ती जाए या सांस लेने में परेशानी हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं।