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Gas Crisis: राजधानी में पलायन की पीड़ा से परेशान हैं प्रवासी, बोले- मकान मालिक नहीं जलाने दे रहे लकड़ी-कोयला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 08 Apr 2026 06:57 AM IST
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सार

महंगे दामों पर गैस खरीदने के लिए जेब में पैसे हैं लेकिन अगर पैसे सिलिंडर पर खर्च कर दिए गांव में बच्चों और परिजनों के लिए क्या भेजेंगे। यही चिंता है जो मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर कर रही है।

Gas Crisis: Migrants in the capital are distressed by the ordeal of displacement
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

एलपीजी संकट ने राजधानी में गरीब मजदूरों की जिंदगी को इस कदर झकझोर दिया है कि अब उनके सामने दिल्ली छोड़कर गांव लौटने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। महंगे दामों पर गैस खरीदने के लिए जेब में पैसे हैं लेकिन अगर पैसे सिलिंडर पर खर्च कर दिए गांव में बच्चों और परिजनों के लिए क्या भेजेंगे। यही चिंता है जो मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर कर रही है। लकड़ी और कोयले पर अगर खाना बनाना चाहें तो मकान मालिक मना कर देते हैं। ऐसे में कई मजदूर उधार लेकर घर लौट रहे हैं। 

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सोचा था कि कुछ पैसे अगर जुट गए तो गांव का खंडहर में तबदील हो रहे घर की मरम्मत करवा लूंगा लेकिन गैस संकट में बजट ऐसा बिगड़ा कि अब गांव वापस जाना मजबूरी बन गया है। गैस बहुत महंगी है, लकड़ी जल्दी मिलती नहीं और मिल भी जाए तो 12 घंटे काम कर थक कर चूर हो जाता हूं। ऐसे में चूल्हा कौन फूंकेगा?। ये कहना है जमशेदपुर निवासी करम चंद का, जो गैस संकट के चलते पलायन के लिए मजबूर हैं।
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600  रुपये दिहाड़ी में कहां तक बाहर से खा सकता हूं। बच्चे भी पालने हैं अब  गैस संकट ने तो कमर ही तोड़ दी है। दोनों हाथों में अपनी गृहस्ती समेंटे बिलासपुर अपने गांव जा रहे शोएब ने अपना दुखड़ा रोते हुए सरकार को जिम्मेदार बताते हुए जमकर कोसा। बिहार से कमाने आए अनिल ने बताया कि सिलिंडर इतना महंगा मिल रहा है कि उसे खरीदना हम जैसे मजदूरू के लिए संभव नहीं है। 13 हजार के वेतन में तेल, आटा खरीदूं या सिलिंडर, इस लिए गांव वापस जाना ही उचित समझ आया। 

प्रवासी मजदूरों के लिए सिलिंडर कोटा दोगुना : सिरसा
गैस की कमी की शिकायतों के बीच दिल्ली सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति बढ़ा दी है। खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने घोषणा की, प्रवासी मजदूरों और जरूरतमंद वर्ग के लिए सिलिंडर की संख्या दोगुनी कर दी गई है। पांच किलो के छोटे सिलेंडर प्रतिदिन 1368 उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रवासी मजदूरों के लिए कॉमर्शियल एलपीजी कोटा 180 से बढ़ाकर 360 सिलिंडर प्रतिदिन कर दिया गया है।

कुल दैनिक आपूर्ति सीमा 6,480 सिलिंडर तय की गई है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। मंत्री के अनुसार, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे तय सीमा का सख्ती से पालन करें और यदि किसी श्रेणी में अतिरिक्त स्टॉक बचता है, तो जरूरतमंद वर्गों में वितरित करें। वितरण प्रणाली पारदर्शी बनाने के लिए आधार वेरिफिकेशन अनिवार्य किया गया है और एक केंद्रीकृत डेटाबेस के जरिए डुप्लीकेशन रोकने के उपाय किए गए हैं। ब्यूरो 

400 रुपये प्रति किलो पर भी कई जगह नहीं मिल रही एलपीजी गैस
सरकारी स्तर पर भले ही गैस की पर्याप्त उपलब्धता का दावा किया जा रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। आनंद विहार, नई और पुरानी दिल्ली, निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन पर इन दिनों पलायन करने वाले लोगों की भीड़ देखने को मिल रही है। 

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बिहार जा रहे प्रेम मौर्य ने बताया कि वे 10 दिन पहले बड़ी उम्मीदों के साथ दिल्ली आए थे। दिन भर काम करने पर 400 रुपये दिहाड़ी मिलती है। अब आप ही बताइए, अगर गैस सिलेंडर भी 400 रुपये किलो मिलेगा, तो हम खाएंगे क्या? दो-तीन दिन भूखा रहा, दोस्तों ने खिलाया। अब भूखे-प्यासे ही गांव लौट रहा हूं। मजदूरों का कहना है कि गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। मयूर विहार में रहने वाले हर्षित ने बताया कि जिनके पास कनेक्शन नहीं है, उनसे एक सिलेंडर के लिए 3500 से 4000 रुपये तक वसूले जा रहे हैं। 

गैस संकट की आंच शादियों तक पहुंची
कैटरिंग कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि पहले जहां शादी में 20 से 35 तरह के व्यंजन तैयार किए जाते थे, वहीं अब लोग खर्च और गैस की कमी देखते हुए इनमें 30 से 40 फीसदी तक कटौती कर रहे हैं। कई परिवार केवल मेन कोर्स का ही ऑर्डर दे रहे हैं। 

फास्टफूड वाले परेशान 
ढाबे, रेस्टोरेंट, फास्टफूड और चाय की दुकान चलाने वाले दुकानदारों का कहना है कि कई दिनों से उन्हें कॉमर्शियल गैस सिलेंडर नहीं मिल पाया है। ऐसे में दुकान बंद न करनी पड़े, इसलिए कई दुकानदार मजबूरी में घरेलू सिलिंडर लाकर काम चला रहे हैं। 

बदल गया चूल्हा 
पहाड़गंज में चाय विक्रेता रमेश कुमार ने बताया कि सिलिंडर की कमी के कारण रोजाना चाय बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। ग्राहकों की भीड़ देखते हुए मजबूरन इंडक्शन पर चाय बनानी पड़ रही है। इसके अलावा, बाजार में लोग मंहगी दरों पर गैस भरवा रहे हैं।

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