चूल्हा पड़ा ठंडा पर नहीं रुके हाथ: गैस संकट ने बदला रोजगार, कचौड़ी-मोमोज वाले बेच रहे जूस-शिकंजी; कमाई हुई डबल
रसोई गैस की किल्लत के बीच एक समय हर घर की जरूरत रहे केरोसिन स्टोव की मांग अचानक बढ़ गई है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि बाजार में अब स्टोव मिल ही नहीं रहे। अगर कहीं उपलब्ध हैं भी, तो उनकी कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। सदर बाजार के व्यापारियों के अनुसार, पहले जहां 400 रुपये में मिलने वाला साधारण स्टोव अब 1500 से 1700 रुपये तक बिक रहा है।
विस्तार
दिल्ली में गैस सिलिंडर की कमी ने जहां छोटे फास्ट फूड कारोबारियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया। वहीं, कई लोगों ने इसी मुश्किल में नया रास्ता खोज निकाला है। चूल्हा ठंडा पड़ा तो हाथ भी नहीं रुके। टिक्की, कचौड़ी और मोमोज बेचने वाले अब बेल का जूस, शिकंजी, जल-जीरा और लेमन सोडा बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं। भीषण गर्मी में ठंडे पेय और ताजे फलों की बढ़ती मांग ने इन दुकानदारों की किस्मत बदल दी है। हालात ऐसे बदले कि जिनकी आय पहले ठप हो गई थी, अब वही लोग पहले से ज्यादा कमा रहे हैं। यह कहानी बताती है कि सही सोच हो तो आपदा भी अवसर बन सकती है।
पहले बेचता था कचौड़ी अब शिकंजी
दरअसल, सिलिंडर की कमी के चलते इन दुकानदारों के लिए चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया था। गैस के बिना टिक्की, कचौड़ी या मोमोज जैसे खाद्य पदार्थ बनाना संभव नहीं था, जिससे उनका कारोबार लगभग ठप हो गया। कुछ समय तक तो उन्हें बेरोजगारी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। ऐसे में सरोजिनी नगर में शिकंजी बेचने वाले मन्नू ने बताया कि उनका काम लगभग खत्म हो गया था। घर का खर्चा चलाना तक मुश्किल हो रहा था। ऐसे में कुछ समय बाद बढ़ती गर्मी के बीच उन्होंने नया रास्ता चुना और ठंडे पेय पदार्थों की बिक्री शुरू कर दी। अब वह शिकंजी बेच रहे हैं। इससे उनकी कमाई पहले की तुलना में दोगुना हो गई है। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह कचौड़ी बेचने का काम करते थे।
आमदनी में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी
दुकानदारों का कहना है कि गर्मी के मौसम में लोगों की मांग को देखते हुए उन्होंने यह बदलाव किया और इसका उन्हें अच्छा फायदा भी मिला। पहले जहां उनकी कमाई सीमित थी, वहीं अब ठंडे पेय और फलों की बिक्री से आमदनी में करीब 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। उत्तम नगर में जल-जीरा बेकने वाले महेश कुमार ने बताया कि वह पहले चाउमीन बेचने का काम करते थे। गैस सिलिंडर की समस्या ने उन्हें मजबूर किया, लेकिन इसी ने उन्हें नया रास्ता भी दिखाया। अब उन्हें न तो ज्यादा खर्च करना पड़ता है और न ही गैस की चिंता रहती है। ग्राहकों को भी यह बदलाव पसंद आ रहा है। गर्मी में लोग हल्का और ठंडा खाने-पीने को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे इन दुकानदारों का कारोबार तेजी से बढ़ा है।
फ्रूट सैलेड, खीरा और ककड़ी जैसी ताजगी देने वाली चीजें भी खूब बिक रही
गर्मी बढ़ते ही शहर के बाजारों में ठंडे पेय और हल्के खाद्य पदार्थों की मांग तेजी से बढ़ गई है। सड़क किनारे अब बेल का जूस, शिकंजी और लेमन सोडा बेचने वाले ठेले लोगों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं। इसके साथ ही फ्रूट सैलेड, खीरा और ककड़ी जैसी ताजगी देने वाली चीजें भी खूब बिक रही हैं। लोग भारी और तले-भुने खाने से बचते हुए हल्का और ठंडा विकल्प चुन रहे हैं। नवादा के निवासी विनीत बताते हैं कि पहले वह फास्ट फूड बेचते थे, लेकिन अब ठंडे पेय और फल ज्यादा बिक रहे हैं। ग्राहक भी खुश हैं और कमाई भी बढ़ी है। दोपहर की तेज धूप में राहगीर इन स्टॉल्स पर रुककर राहत महसूस करते हैं। कम कीमत और ताजगी भरे स्वाद की वजह से इन चीजों की बिक्री लगातार बढ़ रही है, जिससे छोटे कारोबारियों को भी अच्छा फायदा हो रहा है।
गैस संकट के बीच बाजार से गायब हुए केरोसिन स्टोव, बढ़े दाम
रसोई गैस की किल्लत के बीच एक समय हर घर की जरूरत रहे केरोसिन स्टोव की मांग अचानक बढ़ गई है। हालांकि, हैरानी की बात यह है कि बाजार में अब स्टोव मिल ही नहीं रहे। अगर कहीं उपलब्ध हैं भी, तो उनकी कीमतें कई गुना बढ़ चुकी हैं। सदर बाजार के व्यापारियों के अनुसार, पहले जहां 400 रुपये में मिलने वाला साधारण स्टोव अब 1500 से 1700 रुपये तक बिक रहा है। वहीं, बड़े कामों में इस्तेमाल होने वाली डीजल-केरोसिन भट्टियों की कीमत 8-9 हजार से बढ़कर करीब 30 हजार रुपये तक पहुंच गई है। कन्फेडरेशन ऑफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के महामंत्री देवराज बावेजा बताते हैं कि एक समय बाजार में स्टोव और लालटेन के कई विक्रेता और निर्माता हुआ करते थे। लेकिन एलपीजी गैस के बढ़ते उपयोग के कारण धीरे-धीरे यह कारोबार लगभग खत्म हो गया। कई व्यापारियों ने स्टोव का काम छोड़कर गैस बर्नर का व्यापार शुरू कर दिया। अब जब गैस की कमी हुई, तो लोगों को फिर से स्टोव की याद आई, लेकिन बाजार में न तो तैयार स्टोव उपलब्ध हैं और न ही उन्हें बनाने वाला कच्चा माल मिल रहा है। हालात ऐसे हैं कि पुराने स्टोव का कबाड़ तक बिक चुका है।