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Ghaziabad News: तीन दिन बाद खुले अस्पताल में उमड़ी भीड़
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जिला अस्पताल की ओपीडी में कतार में खड़े मरीज। संवाद
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गाजियाबाद। जिला एमएमजी और संयुक्त अस्पताल में सोमवार को तीन दिन बाद ओपीडी खुलने पर मरीजों की भारी भीड़ देखने को मिली। शुक्रवार और शनिवार को रामनवमी के अवकाश के कारण अस्पताल सीमित समय 11 बजे तक के लिए ही खुले थे। जबकि रविवार को सार्वजनिक अवकाश था।
सोमवार को सुबह से ही मरीजों का दबाव बढ़ गया। सुबह होते ही दवा काउंटर, रजिस्ट्रेशन काउंटर और ओपीडी के बाहर लंबी कतारें लग गईं। दो बजे तक 2287 नए मरीजों ने इलाज कराया, जिनमें 1060 महिलाएं, 811 पुरुष और 416 बच्चे शामिल रहे। जबकि लगभग 1100 पुराने मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
बार-बार बिजली ट्रिपिंग से हुई परेशानी
मरीजों और तीमारदारों की भीड़ के बीच सबसे बड़ी समस्या रजिस्ट्रेशन काउंटर पर बार-बार बिजली की ट्रिपिंग के कारण सामने आई। करीब एक घंटे तक पर्चा बनना प्रभावित रहा, जिससे मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। गर्मी के मौसम में लाइन में खड़े लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी और इलाज में भी देरी हुई। इसके अलावा डॉक्टर को दिखाने, दवा लेने और खून की जांच कराने के लिए भी मरीजों को अलग-अलग कतारों में 30 से 35 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज शर्मा ने बताया कि सोमवार को 118 मरीजों को भर्ती किया गया, जबकि 139 मरीजों का इलाज इमरजेंसी में किया गया। पैथोलॉजी विभाग में भी भारी दबाव रहा और कुल 4924 जांचें की गईं। सुबह करीब 6:20 बजे राजनगर में हुए सड़क हादसे में घायल दो सगे भाइयों त्रिलोक और हर्षित को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। उपचार के दौरान छोटे भाई हर्षित की मौत हो गई, जबकि त्रिलोक का इलाज जारी है।
दवाई काउंटर पर कई बार मरीजों में बहस
अस्पताल में बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षा और व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम के 20 गार्ड और पुलिस प्रशासन के दो होमगार्ड तैनात किए गए थे, लेकिन दवा काउंटर पर स्थिति अनियंत्रित हो गई। इस दौरान दो पुरुष और दो महिलाएं आपस में भिड़ गए। करीब 15 मिनट तक विवाद चलता रहा, लेकिन कोई भी गार्ड मौके पर नहीं पहुंचा। इससे आसपास खड़े अन्य मरीजों को भी काफी परेशानी हुई।
स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने मामले को संज्ञान में लिया। उन्होंने गार्डों को तुरंत सक्रिय होकर भीड़ नियंत्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी न हो।
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सोमवार को सुबह से ही मरीजों का दबाव बढ़ गया। सुबह होते ही दवा काउंटर, रजिस्ट्रेशन काउंटर और ओपीडी के बाहर लंबी कतारें लग गईं। दो बजे तक 2287 नए मरीजों ने इलाज कराया, जिनमें 1060 महिलाएं, 811 पुरुष और 416 बच्चे शामिल रहे। जबकि लगभग 1100 पुराने मरीज इलाज के लिए पहुंचे।
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बार-बार बिजली ट्रिपिंग से हुई परेशानी
मरीजों और तीमारदारों की भीड़ के बीच सबसे बड़ी समस्या रजिस्ट्रेशन काउंटर पर बार-बार बिजली की ट्रिपिंग के कारण सामने आई। करीब एक घंटे तक पर्चा बनना प्रभावित रहा, जिससे मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ा। गर्मी के मौसम में लाइन में खड़े लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी और इलाज में भी देरी हुई। इसके अलावा डॉक्टर को दिखाने, दवा लेने और खून की जांच कराने के लिए भी मरीजों को अलग-अलग कतारों में 30 से 35 मिनट तक इंतजार करना पड़ा।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. पंकज शर्मा ने बताया कि सोमवार को 118 मरीजों को भर्ती किया गया, जबकि 139 मरीजों का इलाज इमरजेंसी में किया गया। पैथोलॉजी विभाग में भी भारी दबाव रहा और कुल 4924 जांचें की गईं। सुबह करीब 6:20 बजे राजनगर में हुए सड़क हादसे में घायल दो सगे भाइयों त्रिलोक और हर्षित को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया। उपचार के दौरान छोटे भाई हर्षित की मौत हो गई, जबकि त्रिलोक का इलाज जारी है।
दवाई काउंटर पर कई बार मरीजों में बहस
अस्पताल में बढ़ती भीड़ के बीच सुरक्षा और व्यवस्था भी सवालों के घेरे में रही। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए नगर निगम के 20 गार्ड और पुलिस प्रशासन के दो होमगार्ड तैनात किए गए थे, लेकिन दवा काउंटर पर स्थिति अनियंत्रित हो गई। इस दौरान दो पुरुष और दो महिलाएं आपस में भिड़ गए। करीब 15 मिनट तक विवाद चलता रहा, लेकिन कोई भी गार्ड मौके पर नहीं पहुंचा। इससे आसपास खड़े अन्य मरीजों को भी काफी परेशानी हुई।
स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल के सीएमएस डॉ. राकेश कुमार ने मामले को संज्ञान में लिया। उन्होंने गार्डों को तुरंत सक्रिय होकर भीड़ नियंत्रित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को बेहतर सुविधा देने के लिए व्यवस्था को और सुदृढ़ किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी न हो।