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Ghaziabad News: जापानी पुर्जे के इंतजार में खराब पड़ी सीटी स्कैन मशीन
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खुर्जा। सेठ सूरजमल जटिया राजकीय चिकित्सालय (एसएसएम) की सीटी स्कैन मशीन बीते 12 दिनों से खराब पड़ी है। मशीन का पार्ट जापान से मंगवाया जा रहा है। इसके आने में अभी और समय लग सकता है। इससे जिले भर के मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। मजबूरी में गंभीर बीमारी से ग्रस्त मरीजों को निजी लैब में जांच करानी पड़ रही है।
जिला बुलंदशहर में केवल खुर्जा के एसएसएम में ही निशुल्क सीटी स्कैन जांच की सुविधा है। इसी के चलते जिले भर के मरीज खुर्जा में ही जांच कराने आते हैं। रोजाना 100 मरीजों की जांच होती है। मशीन बंद होने से हादसों में घायल, ब्रेन स्ट्रोक, किडनी स्टोन और गंभीर बीमारियों के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अब 1500 से चार हजार रुपए खर्च कर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर जाना पड़ रहा है। इस कारण कई मरीज स्कैन न हो पाने के कारण इलाज से वंचित हैं। खुर्जा के मुरारी नगर मोहल्ला निवासी सागर ने बताया कि उनके पिता के गर्दन में काफी दिनों से दर्द है। करीब 15 दिन पहले जटिया अस्पताल में मौजूद फिजिशियन को दिखाया था। उन्होंने उपचार के लिए सीटी स्कैन का परामर्श दिया।
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उस दिन जांच के लिए नंबर नहीं लग सका और अगले दिन रविवार था। इसके बाद सोमवार को आए तो बिजली नहीं होने के चलते जांच नहीं हो सकी। फिर 26 मई से जांच मशीन ही खराब हो गई। अब वह हर सप्ताह पूछने आ रहे हैं, तो हर बार दो से तीन दिन का आश्वासन देते हैं। यदि पहले स्पष्ट हो जाता कि मशीन ठीक होने में इतना समय लगेगा तो वह निजी लैब में जांच भी करा लेते।
इसके अलावा कई ऐसे मरीज हैं, जो डिबाई, औरंगाबाद, स्याना, छतारी समेत करीब 50 से 60 किलोमीटर दूर से अस्पताल में जांच कराने आ रहे हैं। मशीन खराब होने की जानकारी मिलने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को जिला अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्र पर भी सीटी स्कैन जांच लैब शुरू करनी चाहिए। यदि एक जगह समस्या हो तो दूसरी जगह जांच कराई जा सके।
बुलंदशहर के धमेड़ा गांव निवासी नीरज ने बताया कि उनके पैर में चोट लगी थी। मांसपेशियों में खिंचाव हो गया था। जिला अस्पताल में चिकित्सक ने सीटी स्कैन के लिए परामर्श किया। दो जून को खुर्जा के जटिया अस्पताल गए तो पता चला कि मशीन खराब है, फिर वह लौट गए। चार जून को फिर जानकारी मिली कि मशीन को अभी समय लगेगा। ऐसे में उन्होंने बुलंदशहर के निजी अस्पताल में दो हजार रुपये में जांच कराई। उसके लिए भी उनको कई निजी अस्पताल के चक्कर काटने पड़े।
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प्रतिक्रिया :-
1. सीटी स्कैन जांच शुरू हो जाए तो काफी लाभ मिलेगा। ऐसे में निजी अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दवा और परामर्श के लिए सरकारी अस्पताल आना पड़ रहा है और जांच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।-- अनिल कुमार, निवासी बुलंदशहर
2. कुछ दिनों से गले में दर्द और बोलने में परेशानी हो रही है। निजी चिकित्सक को दिखाया था तो उन्होंने सीटी स्कैन के लिए कहा। इसलिए जांच कराने के लिए जटिया अस्पताल आए। जानकारी मिली कि मशीन ही खराब है।-- रामवती, निवासी सारंगपुर गांव
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कोट :-
मशीन के मुख्य सर्किट बोर्ड में तकनीकी खराबी आ गई है। यह पार्ट भारत में उपलब्ध नहीं है। इसलिए जापान से मंगवाना पड़ा है। शिपमेंट में देरी के कारण पार्ट अभी तक नहीं पहुंचा है। कंपनी के इंजीनियर ने बताया कि पार्ट आते ही 24 घंटे में मशीन शुरू कर दी जाएगी। उम्मीद है कि बुधवार तक मशीन चालू हो जाएगी। - अभिषेक कुमार, प्रभारी, सीटी स्कैन केंद्र
कोट :-
मशीन खराब होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। इस संबंध में केंद्र प्रभारी पर दबाव बनाया जा रहा है कि जल्द से जल्द मशीन को ठीक कराएं। साथ ही चिकित्सकों से कहा गया है कि अभी किसी मरीज को अस्पताल में होने वाली सीटी स्कैन जांच का परामर्श न दें। - डॉ. दिनेश कुमार, सीएमएस, एसएसएम जटिया राजकीय चिकित्सालय
जिला बुलंदशहर में केवल खुर्जा के एसएसएम में ही निशुल्क सीटी स्कैन जांच की सुविधा है। इसी के चलते जिले भर के मरीज खुर्जा में ही जांच कराने आते हैं। रोजाना 100 मरीजों की जांच होती है। मशीन बंद होने से हादसों में घायल, ब्रेन स्ट्रोक, किडनी स्टोन और गंभीर बीमारियों के मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
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आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को अब 1500 से चार हजार रुपए खर्च कर निजी डायग्नोस्टिक सेंटर जाना पड़ रहा है। इस कारण कई मरीज स्कैन न हो पाने के कारण इलाज से वंचित हैं। खुर्जा के मुरारी नगर मोहल्ला निवासी सागर ने बताया कि उनके पिता के गर्दन में काफी दिनों से दर्द है। करीब 15 दिन पहले जटिया अस्पताल में मौजूद फिजिशियन को दिखाया था। उन्होंने उपचार के लिए सीटी स्कैन का परामर्श दिया।
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उस दिन जांच के लिए नंबर नहीं लग सका और अगले दिन रविवार था। इसके बाद सोमवार को आए तो बिजली नहीं होने के चलते जांच नहीं हो सकी। फिर 26 मई से जांच मशीन ही खराब हो गई। अब वह हर सप्ताह पूछने आ रहे हैं, तो हर बार दो से तीन दिन का आश्वासन देते हैं। यदि पहले स्पष्ट हो जाता कि मशीन ठीक होने में इतना समय लगेगा तो वह निजी लैब में जांच भी करा लेते।
इसके अलावा कई ऐसे मरीज हैं, जो डिबाई, औरंगाबाद, स्याना, छतारी समेत करीब 50 से 60 किलोमीटर दूर से अस्पताल में जांच कराने आ रहे हैं। मशीन खराब होने की जानकारी मिलने पर उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है। मरीजों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को जिला अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्र पर भी सीटी स्कैन जांच लैब शुरू करनी चाहिए। यदि एक जगह समस्या हो तो दूसरी जगह जांच कराई जा सके।
बुलंदशहर के धमेड़ा गांव निवासी नीरज ने बताया कि उनके पैर में चोट लगी थी। मांसपेशियों में खिंचाव हो गया था। जिला अस्पताल में चिकित्सक ने सीटी स्कैन के लिए परामर्श किया। दो जून को खुर्जा के जटिया अस्पताल गए तो पता चला कि मशीन खराब है, फिर वह लौट गए। चार जून को फिर जानकारी मिली कि मशीन को अभी समय लगेगा। ऐसे में उन्होंने बुलंदशहर के निजी अस्पताल में दो हजार रुपये में जांच कराई। उसके लिए भी उनको कई निजी अस्पताल के चक्कर काटने पड़े।
प्रतिक्रिया :-
1. सीटी स्कैन जांच शुरू हो जाए तो काफी लाभ मिलेगा। ऐसे में निजी अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। दवा और परामर्श के लिए सरकारी अस्पताल आना पड़ रहा है और जांच के लिए बाहर जाना पड़ रहा है।
2. कुछ दिनों से गले में दर्द और बोलने में परेशानी हो रही है। निजी चिकित्सक को दिखाया था तो उन्होंने सीटी स्कैन के लिए कहा। इसलिए जांच कराने के लिए जटिया अस्पताल आए। जानकारी मिली कि मशीन ही खराब है।
कोट :-
मशीन के मुख्य सर्किट बोर्ड में तकनीकी खराबी आ गई है। यह पार्ट भारत में उपलब्ध नहीं है। इसलिए जापान से मंगवाना पड़ा है। शिपमेंट में देरी के कारण पार्ट अभी तक नहीं पहुंचा है। कंपनी के इंजीनियर ने बताया कि पार्ट आते ही 24 घंटे में मशीन शुरू कर दी जाएगी। उम्मीद है कि बुधवार तक मशीन चालू हो जाएगी। - अभिषेक कुमार, प्रभारी, सीटी स्कैन केंद्र
कोट :-
मशीन खराब होने के कारण मरीजों को काफी परेशानी हो रही है। इस संबंध में केंद्र प्रभारी पर दबाव बनाया जा रहा है कि जल्द से जल्द मशीन को ठीक कराएं। साथ ही चिकित्सकों से कहा गया है कि अभी किसी मरीज को अस्पताल में होने वाली सीटी स्कैन जांच का परामर्श न दें। - डॉ. दिनेश कुमार, सीएमएस, एसएसएम जटिया राजकीय चिकित्सालय