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Ghaziabad News: मोतियाबिंद ऑपरेशन में सरकारी अस्पताल पीछे, निजी और एनजीओ सेक्टर ने संभाली कमान
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गाजियाबाद। सरकारी अस्पतालों में मोतियाबिंद के ऑपरेशन की आधुनिक सुविधाएं नहीं होने से लोग ऑपरेशन कराने से कतराते हैं, यही कारण है कि सरकारी से अधिक निजी अस्पतालों में लोग ऑपरेशन को तवज्जो दे रहे हैं।
जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक कुल 63,074 मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष में अब तक 42,206 ऑपरेशन ही हो सके हैं। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन करने में निजी अस्पताल और एनजीओ सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया है। जबकि सरकारी अस्पतालों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
आंकड़ों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों को 12,615 ऑपरेशन का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन वे केवल 2,922 ऑपरेशन ही कर पाए। वहीं निजी अस्पतालों ने 37,844 के लक्ष्य के मुकाबले 22,598 ऑपरेशन किए। एनजीओ सेक्टर ने 12,615 के लक्ष्य के सापेक्ष 16,686 ऑपरेशन कर बेहतर प्रदर्शन किया और लक्ष्य से अधिक कार्य पूरा किया।
सबसे अधिक डॉ. अनीता ने किया ऑपरेशन
सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो डॉ. अनीता सिंह ने सबसे अधिक 850 ऑपरेशन किए। इसके बाद डॉ. नरेन्द्र कुमार ने 578, डॉ. स्वाति खोखर ने 507, डॉ. प्रताप सिंह ने 369 और डॉ. सुचिता ने 351 ऑपरेशन किए। अन्य चिकित्सकों में डॉ. मदन लाल ने 89, डॉ. नदीम ने 88, डॉ. अतुल आनंद ने 48 और डॉ. हर्ष वर्धन ने सबसे कम सिर्फ 42 ऑपरेशन किए हैं।
संयुक्त अस्पताल के पूर्व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण लक्ष्य पूरा करने में बाधा आ रही है, जबकि निजी और एनजीओ सेक्टर ने बेहतर प्रबंधन के चलते अधिक मरीजों को लाभ पहुंचाया है।
इस मामले में कार्यवाहक सीएमओ डॉ. अमित विक्रम का कहना है कि जिन चिकित्सकों के ऑपरेशन कम हुए हैं, उन्हें नोटिस जारी कर कारण पूछा जाएगा। इसके साथ ही ऑपरेशन को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
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जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में पेश की गई रिपोर्ट के अनुसार जिले में अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक कुल 63,074 मोतियाबिंद ऑपरेशन का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके सापेक्ष में अब तक 42,206 ऑपरेशन ही हो सके हैं। सरकारी रिपोर्ट के अनुसार ऑपरेशन करने में निजी अस्पताल और एनजीओ सेक्टर ने बेहतर प्रदर्शन किया है। जबकि सरकारी अस्पतालों की प्रगति अपेक्षाकृत धीमी रही है।
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आंकड़ों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों को 12,615 ऑपरेशन का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन वे केवल 2,922 ऑपरेशन ही कर पाए। वहीं निजी अस्पतालों ने 37,844 के लक्ष्य के मुकाबले 22,598 ऑपरेशन किए। एनजीओ सेक्टर ने 12,615 के लक्ष्य के सापेक्ष 16,686 ऑपरेशन कर बेहतर प्रदर्शन किया और लक्ष्य से अधिक कार्य पूरा किया।
सबसे अधिक डॉ. अनीता ने किया ऑपरेशन
सरकारी अस्पतालों के चिकित्सकों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो डॉ. अनीता सिंह ने सबसे अधिक 850 ऑपरेशन किए। इसके बाद डॉ. नरेन्द्र कुमार ने 578, डॉ. स्वाति खोखर ने 507, डॉ. प्रताप सिंह ने 369 और डॉ. सुचिता ने 351 ऑपरेशन किए। अन्य चिकित्सकों में डॉ. मदन लाल ने 89, डॉ. नदीम ने 88, डॉ. अतुल आनंद ने 48 और डॉ. हर्ष वर्धन ने सबसे कम सिर्फ 42 ऑपरेशन किए हैं।
संयुक्त अस्पताल के पूर्व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में संसाधनों और स्टाफ की कमी के कारण लक्ष्य पूरा करने में बाधा आ रही है, जबकि निजी और एनजीओ सेक्टर ने बेहतर प्रबंधन के चलते अधिक मरीजों को लाभ पहुंचाया है।
इस मामले में कार्यवाहक सीएमओ डॉ. अमित विक्रम का कहना है कि जिन चिकित्सकों के ऑपरेशन कम हुए हैं, उन्हें नोटिस जारी कर कारण पूछा जाएगा। इसके साथ ही ऑपरेशन को बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।