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Ghaziabad News: एक महीने में मुकदमों का अंबार, निस्तारण की रफ्तार धीमी

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 26 Jan 2026 01:20 AM IST
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Pile of cases in a month, slow pace of disposal
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गाजियाबाद। जिले की अदालतों में एक महीने के भीतर न्यायिक कामकाज का दबाव साफ तौर पर देखने को मिला। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार बीते एक माह में 70 हजार से अधिक नए मामले अदालतों में दर्ज हुए, जबकि इस दौरान महज 37 हजार मामलों का ही निस्तारण हो सका। मामलों के लगातार बढ़ते बोझ के कारण न्यायिक प्रक्रिया पर असर पड़ता नजर आ रहा है। लंबित प्रकरणों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।
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नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड के अनुसार निस्तारित मामलों में सजा की दर भी चिंता का विषय बनी हुई है। कुल निस्तारित मामलों में से करीब ग्यारह सौ लोगों यानि महज तीन फीसदी को ही दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई जा सकी। शेष 97 फीसदी केसों में अभियुक्तों को आरोपों से बरी कर दिया गया। इस तरह देखा जाए तो सजा की दर बेहद कम रही। बड़ी संख्या में मामले ऐसे रहे जिनमें अभियोजन अपने आरोप साबित नहीं कर पाया।
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पूर्व बार अध्यक्ष योगेंद्र कौशिक कहना है कि साक्ष्यों की कमी, गवाहों का मुकर जाना और लंबी सुनवाई प्रक्रिया इसके प्रमुख कारण हैं। कई मामलों में विवेचना के स्तर पर खामियां रह जाती हैं। इसका असर अदालत में सुनवाई के दौरान दिखाई देता है। इसका सीधा लाभ अभियुक्तों को मिलता है और पीड़ित पक्ष को न्याय मिलने में कठिनाई होती है।

जिला शासकीय अधिवक्ता राजेश चंद्र शर्मा का कहना है कि बीते महीने शीतकालीन अवकाश रहने के कारण अदालतों में कार्य दिवस कम रहे। इसी वजह से मामलों का निस्तारण अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो सका। उन्होंने यह भी बताया कि जैसे ही नियमित कार्य दिवसों की संख्या बढ़ेगी, निस्तारण की गति में भी सुधार आने की संभावना है।
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