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Ghaziabad News: प्रमुख सचिव ने संचारी नेस्ट सहकारी समिति पर बैठाई जांच, एक माह में देनी होगी रिपोर्ट
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साहिबाबाद। संचारी नेस्ट सहकारी समिति पर गबन करने, समय पर कब्जा न देने और फ्लैट दूसरों को बेचने के तमाम आरोपों की जांच के लिए आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव पी गुरुप्रसाद ने जांच समिति गठित की है। उन्होंने डीएम गाजियाबाद की अध्यक्षता में उप आवास आयुक्त, सहायक आवास आयुक्त एवं सहकारी अधिकारी समेत चार सदस्यीय कमेटी को एक माह में जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। यह पत्र शासन की ओर से इसी सप्ताह जिलाधिकारी को भेजा गया है।
शासन ने यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति की 28 जुलाई 2026 को आयोजित साक्ष्य बैठक में प्रस्तुत आख्या के आधार पर की गई है। समिति के कुछ सदस्यों ने ही समिति सचिव व अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया कि समिति के प्रबंध तंत्र ने सदस्यों से धनराशि लेने के बावजूद कब्जा नहीं दिया और बिना अनुमति सदस्यों की यूनिट दूसरे लोगों को बेच दी। समय-समय पर दर भी बढ़ाई गईं। इस मामले में शिकायतकर्ता और आरोपी पक्ष की सुनवाई करने और दस्तावेजों की जांच के बाद प्रमुख सचिव ने समिति गठित की है।
पहले भी बैठाई जा चुकी है जांच
सहकारी समिति के खिलाफ पहली बार वर्ष 2024 में आवास विकास परिषद में शिकायत के आधार पर उप आवास आयुक्त मेरठ जोन ने जांच बैठाई थी। इसमें पाया कि 30 दिसंबर 2025 तक 33 लोगों की सदस्यता निरस्त कर उनके प्लॉट दूसरे लोगों को आवंटित किए गए। 8 फरवरी 2026 को सामान्य निकाय की बैठक में इन्हीं सदस्यों की सदस्यता एवं प्लॉट निरस्तीकरण पर विचार किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश विधान परिषद की मांग समिति एवं सामाजिक संस्थान समिति ने भी मामले का संज्ञान लिया। समिति के निर्देश पर 29 मई 2026 को हुई बैठक में सदस्यता सूची एवं फ्लैट मालिकों की सूची में विसंगतियां मिलने पर आवंटित 200 फ्लैटों की जांच का निर्णय लिया गया। 24 जून 2026 की बैठक में वास्तविक सदस्यों के सत्यापन के लिए समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। बता दें कि इसी जांच में पूर्व सहकारी अधिकारी निलंबित भी किए जा चुके हैं।
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यह है मामला
वर्ष 2009 में इस सहकारी समिति का गठन करते हुए 350 सदस्य शामिल किए गए। इनसे 1600 प्रति स्क्वायर फिट की दर से भुगतान कराया गया। इसके बाद वर्ष 2012 में इस दर को बढ़ाकर 1800 प्रति स्क्वायर फिट कर दिया गया। सदस्यों को 2015 में फ्लैटों का पजेशन देने में भी समिति असफल रही। कुछ लोगों को वर्ष 2022 में पजेशन दिया गया, लेकिन बाद में सबसे दोबारा भूमि की दर बढ़ा दी गई। उस समय तक काफी लोग 50 फीसदी रकम जमा कर चुके थे और वहीं विवाद शुरू हुआ।
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शासन ने यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश विधान परिषद की संसदीय एवं सामाजिक सद्भाव समिति की 28 जुलाई 2026 को आयोजित साक्ष्य बैठक में प्रस्तुत आख्या के आधार पर की गई है। समिति के कुछ सदस्यों ने ही समिति सचिव व अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया कि समिति के प्रबंध तंत्र ने सदस्यों से धनराशि लेने के बावजूद कब्जा नहीं दिया और बिना अनुमति सदस्यों की यूनिट दूसरे लोगों को बेच दी। समय-समय पर दर भी बढ़ाई गईं। इस मामले में शिकायतकर्ता और आरोपी पक्ष की सुनवाई करने और दस्तावेजों की जांच के बाद प्रमुख सचिव ने समिति गठित की है।
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पहले भी बैठाई जा चुकी है जांच
सहकारी समिति के खिलाफ पहली बार वर्ष 2024 में आवास विकास परिषद में शिकायत के आधार पर उप आवास आयुक्त मेरठ जोन ने जांच बैठाई थी। इसमें पाया कि 30 दिसंबर 2025 तक 33 लोगों की सदस्यता निरस्त कर उनके प्लॉट दूसरे लोगों को आवंटित किए गए। 8 फरवरी 2026 को सामान्य निकाय की बैठक में इन्हीं सदस्यों की सदस्यता एवं प्लॉट निरस्तीकरण पर विचार किया गया। इसके बाद उत्तर प्रदेश विधान परिषद की मांग समिति एवं सामाजिक संस्थान समिति ने भी मामले का संज्ञान लिया। समिति के निर्देश पर 29 मई 2026 को हुई बैठक में सदस्यता सूची एवं फ्लैट मालिकों की सूची में विसंगतियां मिलने पर आवंटित 200 फ्लैटों की जांच का निर्णय लिया गया। 24 जून 2026 की बैठक में वास्तविक सदस्यों के सत्यापन के लिए समिति गठित करने का प्रस्ताव भी रखा गया। बता दें कि इसी जांच में पूर्व सहकारी अधिकारी निलंबित भी किए जा चुके हैं।
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यह है मामला
वर्ष 2009 में इस सहकारी समिति का गठन करते हुए 350 सदस्य शामिल किए गए। इनसे 1600 प्रति स्क्वायर फिट की दर से भुगतान कराया गया। इसके बाद वर्ष 2012 में इस दर को बढ़ाकर 1800 प्रति स्क्वायर फिट कर दिया गया। सदस्यों को 2015 में फ्लैटों का पजेशन देने में भी समिति असफल रही। कुछ लोगों को वर्ष 2022 में पजेशन दिया गया, लेकिन बाद में सबसे दोबारा भूमि की दर बढ़ा दी गई। उस समय तक काफी लोग 50 फीसदी रकम जमा कर चुके थे और वहीं विवाद शुरू हुआ।