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Ghaziabad News: अमेरिकी राष्ट्रपति की बयानबाजी...अब रिश्तों में भी बन रही रोड़ा
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अनिल त्यागी
गाजियाबाद। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी न सिर्फ देश के व्यापार पर असर डाल रही है, बल्कि इससे रिश्तों की डोर भी कमजोर हाेती दिख रही है। जिले में कई परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अमेरिकन कंपनी में कार्यरत युवा से बेटी का रिश्ता तो तय कर दिया लेकिन अस्थिरता की स्थिति के बीच वह शादी को टाल रहे हैं। शादी की टालमटोल से एक रिश्ता तो टूट भी गया है। लोगों को खतरा है कि जो स्थितियां फिलहाल चल रही हैं, उसमें नौकरी सुरक्षित रह सकेेगी या नहीं।
-केस-1
राजनगर एक्सटेंशन की वीआईपी सोसायटी में रहने वाले परिवार की बेटी एमबीए करने के बाद नामचीन कंपनी में कार्यरत है। करीब एक साल पहले मेटरीमोनियल साइट के जरिये पंजाब के परिवार से संपर्क हुआ। उनका बेटा अमेरिका की आईटी कंपनी में कार्यरत है। एक करोड़ से अधिक का पैकेज है। अगस्त में वह भारत आया तो रिश्ता भी तय हो गया। शादी भी अप्रैल में करने की सहमति बन गई थी। लड़की के पिता ने बताया कि जो हालात अभी बन रहे हैं, उसमें बेटी ने शादी करने से मना कर दिया। लड़के पक्ष के रोजाना फोन आ रहे हैं। अब समझ नहीं आ रहा क्या जवाब दें।
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-जवाब नहीं दिया तो तोड़ दिया रिश्ता : मुरादनगर की एक कॉलोनी में रहने वाले पंजाबी परिवार का बेटा अमेरिकी कंपनी के बंगलूरू स्थित कार्यालय में कार्यरत है। पिछले महीने उसका रिश्ता गुड़गांव की कंपनी में कार्यरत युवती से तय हो गया था। लड़के के चाचा ने बताया कि शादी की बात पर लड़की पक्ष स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा था। बिचौलिए से बात की गई तो उसने बताया कि लड़की वाले अमेरिकी कंपनी का कोई भरोसा न होने की बात कह रहे हैं। इसके बाद दो दिन पहले रिश्ता तोड़ दिया गया। अब नए रिश्ते की तलाश शुरू की गई है।
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-अब अमेरीका जाने का मन नहीं : कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद बीते दो साल से बंगलूरू की आईटी कंपनी में नौकरी कर रहे कमल प्रजापति ने बताया कि छह माह पहले अमेरिका की आईटी कंपनी में दोगुने पैकेज पर नौकरी का ऑफर आया। चयन भी हो गया लेकिन जिस तरह का माहौल वैश्विक स्तर पर बना, उससे मन में एक डर बना हुआ है। इसी वजह से अमेरिका जाने का मन नहीं है। देश में रहकर यहीं पर काम करना ज्यादा सुरक्षित लग रहा है।
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-करीब 300-360 युवाओं का चयन अमेरिकन कंपनियों में होता था : शिक्षाविद अंकुर नेहरा ने कहते हैं कि जिले के करीब 20 कॉलेजों से करीब 15 हजार युवा बीटेक करके निकलते हैं। इसमें मोटे तौर पर 2500-3000 छात्रों का चयन कैंपस प्लेसमेंट के जरिये होता है। खास बात यह है कि 300-360 युवाओं का चयन अमेरिकन कंपनियों में होता था लेकिन अब युवा अमेरिकन कंपनियों में जाने से परहेज कर रहे हैं। इस साल यह आंकड़ा 100 के नीचे है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए उनके अभिभावक भी उनको इस मामले में सोच समझकर निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन के लिए भी यह एक चुनौती बनता जा रहा है। इस स्थिति में उनकी अपनी अलग चिंता है। उनको बीटेक कंप्यूटर साइंस में दाखिले कम होने का खतरा सता रहा है।
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गाजियाबाद। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी न सिर्फ देश के व्यापार पर असर डाल रही है, बल्कि इससे रिश्तों की डोर भी कमजोर हाेती दिख रही है। जिले में कई परिवार ऐसे हैं, जिन्होंने अमेरिकन कंपनी में कार्यरत युवा से बेटी का रिश्ता तो तय कर दिया लेकिन अस्थिरता की स्थिति के बीच वह शादी को टाल रहे हैं। शादी की टालमटोल से एक रिश्ता तो टूट भी गया है। लोगों को खतरा है कि जो स्थितियां फिलहाल चल रही हैं, उसमें नौकरी सुरक्षित रह सकेेगी या नहीं।
-केस-1
राजनगर एक्सटेंशन की वीआईपी सोसायटी में रहने वाले परिवार की बेटी एमबीए करने के बाद नामचीन कंपनी में कार्यरत है। करीब एक साल पहले मेटरीमोनियल साइट के जरिये पंजाब के परिवार से संपर्क हुआ। उनका बेटा अमेरिका की आईटी कंपनी में कार्यरत है। एक करोड़ से अधिक का पैकेज है। अगस्त में वह भारत आया तो रिश्ता भी तय हो गया। शादी भी अप्रैल में करने की सहमति बन गई थी। लड़की के पिता ने बताया कि जो हालात अभी बन रहे हैं, उसमें बेटी ने शादी करने से मना कर दिया। लड़के पक्ष के रोजाना फोन आ रहे हैं। अब समझ नहीं आ रहा क्या जवाब दें।
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-जवाब नहीं दिया तो तोड़ दिया रिश्ता : मुरादनगर की एक कॉलोनी में रहने वाले पंजाबी परिवार का बेटा अमेरिकी कंपनी के बंगलूरू स्थित कार्यालय में कार्यरत है। पिछले महीने उसका रिश्ता गुड़गांव की कंपनी में कार्यरत युवती से तय हो गया था। लड़के के चाचा ने बताया कि शादी की बात पर लड़की पक्ष स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा था। बिचौलिए से बात की गई तो उसने बताया कि लड़की वाले अमेरिकी कंपनी का कोई भरोसा न होने की बात कह रहे हैं। इसके बाद दो दिन पहले रिश्ता तोड़ दिया गया। अब नए रिश्ते की तलाश शुरू की गई है।
-अब अमेरीका जाने का मन नहीं : कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद बीते दो साल से बंगलूरू की आईटी कंपनी में नौकरी कर रहे कमल प्रजापति ने बताया कि छह माह पहले अमेरिका की आईटी कंपनी में दोगुने पैकेज पर नौकरी का ऑफर आया। चयन भी हो गया लेकिन जिस तरह का माहौल वैश्विक स्तर पर बना, उससे मन में एक डर बना हुआ है। इसी वजह से अमेरिका जाने का मन नहीं है। देश में रहकर यहीं पर काम करना ज्यादा सुरक्षित लग रहा है।
-करीब 300-360 युवाओं का चयन अमेरिकन कंपनियों में होता था : शिक्षाविद अंकुर नेहरा ने कहते हैं कि जिले के करीब 20 कॉलेजों से करीब 15 हजार युवा बीटेक करके निकलते हैं। इसमें मोटे तौर पर 2500-3000 छात्रों का चयन कैंपस प्लेसमेंट के जरिये होता है। खास बात यह है कि 300-360 युवाओं का चयन अमेरिकन कंपनियों में होता था लेकिन अब युवा अमेरिकन कंपनियों में जाने से परहेज कर रहे हैं। इस साल यह आंकड़ा 100 के नीचे है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए उनके अभिभावक भी उनको इस मामले में सोच समझकर निर्णय लेने की सलाह दे रहे हैं। कॉलेज प्रबंधन के लिए भी यह एक चुनौती बनता जा रहा है। इस स्थिति में उनकी अपनी अलग चिंता है। उनको बीटेक कंप्यूटर साइंस में दाखिले कम होने का खतरा सता रहा है।