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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Government may take over private school in Vikas Puri; seeks response

Delhi NCR News: विकास पुरी के निजी स्कूल का अधिग्रहण कर सकती है सरकार, मांगा जवाब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 30 Jul 2026 07:06 PM IST
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- बिना एनओसी के 43 कक्षाएं चलाने पर स्कूल को कारण बताओ नोटिस जारी, जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया
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-रियायती दर पर आवंटित भूमि की लीज रद्द करने के लिए डीडीए को भी सिफारिश करने की तैयारी

अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। दिल्ली सरकार विकासपुरी के एक निजी स्कूल का अधिग्रहण कर सकती है। सरकार ने स्कूल के खिलाफ गंभीर अनियमितताओं खासकर 43 कक्षाओं का संचालन बिना अग्नि सुरक्षा करने के आरोप में कारण बताओ नोटिस जारी किया है। स्कूल प्रबंधन को सात दिनों के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर सरकार अधिग्रहण की प्रक्रिया को शुरू कर सकती है। साथ ही रियायती दर पर आवंटित भूमि की लीज रद्द करने के लिए डीडीए को भी सिफारिश करने की तैयारी की गई है।

शिक्षा निदेशालय ने हाल ही में स्कूल का औचक निरीक्षण किया। उसमें सामने आया कि स्कूल 43 कक्षाओं का संचालन बिना अग्नि सुरक्षा स्वीकृति (फायर एनओसी) के कर रहा था। इसके अलावा अवैध निर्माण, बिना अनुमति भूजल दोहन, शिक्षकों के शोषण और फीस में मनमानी बढ़ोतरी, बिना वैध मान्यता के वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं के संचालन सहित कई गंभीर अनियमितताएं भी पाई गई।
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शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रबंधन ने बिना अग्निशमन विभाग की मंजूरी के 43 अतिरिक्त कक्षाओं का संचालन कर हजारों छात्रों की जान जोखिम में डाली। ऐसे मामलों में सरकार सबसे कड़ी कार्रवाई करने के लिए प्रतिबद्ध है। उसके बाद उन्होंने विद्यालय प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
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निरीक्षण में पाया गया कि स्कूल के पास केवल 39 कमरों के लिए फायर एनओसी थी, जबकि परिसर में कुल 82 कमरे संचालित किए जा रहे थे। यानी 43 कक्षाएं बिना किसी अग्नि सुरक्षा स्वीकृति के चलाई जा रही थीं। जांच में सामने आया कि विद्यालय परिसर में बिना अनुमति 30 कमरों का टिन-शेड, एक अवैध बेसमेंट और तीसरी मंजिल का निर्माण किया गया है। कई कक्षाओं में केवल एक निकास गेट था तथा अग्निशमन वाहनों के लिए तय रास्ता भी अवरुद्ध पाया गया।


शिक्षा निदेशालय ने पाया कि स्कूल की वरिष्ठ माध्यमिक स्तर की अस्थायी मान्यता 31 मार्च 2023 को समाप्त हो चुकी थी, लेकिन पिछले तीन वर्षों से वरिष्ठ माध्यमिक कक्षाओं का संचालन जारी रखा गया। साथ ही कोविड-19 अवधि में 20 से 25 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने और स्मार्ट क्लासरूम शुल्क के नाम पर अतिरिक्त वसूली करने के आरोप भी सामने आए हैं। शिक्षकों को सरकारी वेतनमान के अनुरूप वेतन नहीं दिया गया तथा कई मामलों में चार-चार महीने तक वेतन लंबित रखा गया।
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