दिल्ली-NCR में हटा ग्रेप-3: प्रदूषण में गिरावट के बाद सीएक्यूएम ने लिया फैसला, जानिए कौन से प्रतिबंध हटे
गुरुवार दोपहर दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 322 दर्ज किया गया है, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है। वायु प्रदूषण में कमी देख सीएक्यूएम ने यह फैसला लिया है। विस्तार से पढ़ें खबर-
विस्तार
वायु गुणवत्ता में सुधार के बाद गुरुवार को दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप-3 की पाबंदियों को हटा दिया गया है। वायु प्रदूषण में गिरावट देख वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने यह फैसला लिया है। हालांकि ग्रेप-1 और ग्रेप-2 के तहत आने वाले प्रतिबंध लागू रहेंगे। एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम फॉर दिल्ली द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार दोपहर दिल्ली का (एक्यूआई) 322 दर्ज किया गया है, जो 'बहुत खराब' श्रेणी में आता है।
ग्रेप तीन हटने से होगा ये बड़ा बदलाव
ग्रेप-3 हटने के बाद दिल्ली और आसपास के इलाकों में बीएस-तीन पेट्रोल और बीएस-चार डीजल वाहनों पर प्रतिबंध हट गया है। इससे ये वाहन बिना रोक-टोक के जा सकेंगे।
क्या होता है ग्रेप फार्मूला?
ग्रेप को दिल्ली एनसीआर में प्रतिकूल वायु गुणवत्ता के चार अलग-अलग चरण के हिसाब से बांटा गया गया है। ग्रेप का चरण-1 उस वक्त लागू होता है, जब दिल्ली में AQI का स्तर 201-300 के बीच होता है। मौजूदा समय में दिल्ली में ग्रेप का चरण-1 ही प्रभावी था। ग्रेप का दूसरा चरण उस परिस्थिति में प्रभावी होता है, जब राजधानी में वायु गुणवत्ता सूचकांक 301-400 के बीच 'बहुत खराब' मापा जाता है। चरण-3 'गंभीर' वायु गुणवत्ता के बीच लागू किया जाता है। इस वक्त दिल्ली में एक्यूआई 401-450 के बीच होता है। वहीं ग्रेप कार्य योजना का अंतिम और चरण-4 'गंभीर +' वायु गुणवत्ता की परिस्थिति में लागू किया जाता है।
ग्रेप-3 के तहत इन कार्य पर थी पाबंदी
-पूरे एनसीआर में धूल पैदा करने वाली व वायु प्रदूषण फैलाने वाली सीएंडडी गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध था।
-बोरिंग और ड्रिलिंग कार्यों सहित खोदाई और भराई के लिए मिट्टी का काम।
-पाइलिंग कार्य, सभी विध्वंस कार्य।
-ओपन ट्रेंच सिस्टम द्वारा सीवर लाइन, पानी की लाइन, ड्रेनेज और इलेक्ट्रिक केबलिंग आदि बिछाना।
-ईंट/चिनाई कार्य।
-प्रमुख वेल्डिंग और गैस-कटिंग कार्य, हालांकि, एमईपी (मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और प्लंबिंग) कार्यों के लिए छोटी वेल्डिंग गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी।
-सड़क निर्माण गतिविधियां और प्रमुख मरम्मत।
-परियोजना स्थलों के भीतर व बाहर कहीं भी सीमेंट, फ्लाई-ऐश, ईंट, रेत, पत्थर आदि जैसी धूल पैदा करने वाली सामग्रियों का स्थानांतरण, लोडिंग/अनलोडिंग।
-कच्ची सड़कों पर निर्माण सामग्री ले जाने वाले वाहनों की आवाजाही।
-विध्वंस अपशिष्ट का कोई भी परिवहन।
कब-कब लागू होते हैं ग्रेप के नियम
- 201 से 300 (खराब)- ग्रेप-1
- 301-400 (बहुत खराब)- ग्रेप-2
- 401 से 450 (गंभीर)- ग्रेप-3
- 450 से ऊपर (अति गंभीर)- ग्रेप- 4