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Gurugram News: राज्य रजिस्ट्रार के आदेश के बाद भी जिला रजिस्ट्रार सुस्त, कार्रवाई न होने से निवासियों में रोष
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आरडी सिटी में निवसियों ने आरडब्ल्यूए के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं, वसूली और दुर्व्यवहार के लगाए गंभीर आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। सेक्टर-52 स्थित आरडी सिटी में आरडब्ल्यूए गवर्निंग बॉडी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं, वसूली और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों को लेकर घमासान मचा हुआ है। निवासियों ने आरोप लगाया है कि राज्य रजिस्ट्रार की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी होने के बावजूद जिला रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मामले के अनुसार आरडी सिटी के निवासी भूपेंद्र सिंह जादौन, विक्रमजीत सिंह और अन्य नागरिकों ने जनवरी 2026 में आरडी सिटी आरडब्ल्यूए गवर्निंग बॉडी के खिलाफ फाइनेंसियल मिसमैनेजमेंट और अनाधिकृत गतिविधियों की एक औपचारिक शिकायत स्टेट रजिस्ट्रार को सौंपी थी। इस शिकायत का कड़ा संज्ञान लेते हुए स्टेट रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज ने 5 फरवरी 2026 को गुरुग्राम के रजिस्ट्रार अमित मान एचसीएस को मामले की जांच कर हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ सोसायटीज एक्ट के तहत उचित कानूनी कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए थे।
इसके बाद जिला रजिस्ट्रार कार्यालय ने 22 अप्रैल 2026 को आरडब्ल्यूए को एक नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा था लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई। निवासियों का आरोप है कि आरडी सिटी को नगर निगम द्वारा पूरी तरह टेकओवर किए जाने के मुख्यमंत्री के पुराने आदेशों के बावजूद आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी सरकारी कार्यों और निगम के ठेकेदारों के काम में लगातार बाधा डाल रहे हैं।
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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक ओपन सेक्टर होने के बावजूद निवासियों से मेंटेनेंस शुल्क वसूला जा रहा है। इसके अलावा निगम की तरफ से पार्कों के रख-रखाव के लिए आवंटित करीब 16 लाख रुपये के सरकारी फंड के दुरुपयोग स्क्रैप व कचरा ठेकेदारों से मिलने वाली नकदी के ब्योरे में हेरफेर और बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर मैन्युअल मीटर रीडिंग फ्रॉड करने जैसे गंभीर आरोप भी आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों पर लगाए गए हैं। कार्रवाई में देरी होने के चलते निवासियों ने अब जिला उपायुक्त का दरवाजा खटखटाया है। शिकायतकर्ता विक्रमजीत सिंह ने ईमेल के जरिए जिला उपायुक्त से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला रजिस्ट्रार पर तुरंत कार्रवाही की जाए और किसी अन्य निष्पक्ष वैकल्पिक अधिकारी को नियुक्त कर आरडब्ल्यूए का पुनर्गठन किया जाए।
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। सेक्टर-52 स्थित आरडी सिटी में आरडब्ल्यूए गवर्निंग बॉडी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं, वसूली और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोपों को लेकर घमासान मचा हुआ है। निवासियों ने आरोप लगाया है कि राज्य रजिस्ट्रार की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी होने के बावजूद जिला रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
मामले के अनुसार आरडी सिटी के निवासी भूपेंद्र सिंह जादौन, विक्रमजीत सिंह और अन्य नागरिकों ने जनवरी 2026 में आरडी सिटी आरडब्ल्यूए गवर्निंग बॉडी के खिलाफ फाइनेंसियल मिसमैनेजमेंट और अनाधिकृत गतिविधियों की एक औपचारिक शिकायत स्टेट रजिस्ट्रार को सौंपी थी। इस शिकायत का कड़ा संज्ञान लेते हुए स्टेट रजिस्ट्रार ऑफ सोसायटीज ने 5 फरवरी 2026 को गुरुग्राम के रजिस्ट्रार अमित मान एचसीएस को मामले की जांच कर हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ सोसायटीज एक्ट के तहत उचित कानूनी कार्रवाई करने के सख्त निर्देश दिए थे।
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इसके बाद जिला रजिस्ट्रार कार्यालय ने 22 अप्रैल 2026 को आरडब्ल्यूए को एक नोटिस जारी कर 7 दिनों के भीतर जवाब मांगा था लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई। निवासियों का आरोप है कि आरडी सिटी को नगर निगम द्वारा पूरी तरह टेकओवर किए जाने के मुख्यमंत्री के पुराने आदेशों के बावजूद आरडब्ल्यूए के पदाधिकारी सरकारी कार्यों और निगम के ठेकेदारों के काम में लगातार बाधा डाल रहे हैं।
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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि एक ओपन सेक्टर होने के बावजूद निवासियों से मेंटेनेंस शुल्क वसूला जा रहा है। इसके अलावा निगम की तरफ से पार्कों के रख-रखाव के लिए आवंटित करीब 16 लाख रुपये के सरकारी फंड के दुरुपयोग स्क्रैप व कचरा ठेकेदारों से मिलने वाली नकदी के ब्योरे में हेरफेर और बिजली विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर मैन्युअल मीटर रीडिंग फ्रॉड करने जैसे गंभीर आरोप भी आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों पर लगाए गए हैं। कार्रवाई में देरी होने के चलते निवासियों ने अब जिला उपायुक्त का दरवाजा खटखटाया है। शिकायतकर्ता विक्रमजीत सिंह ने ईमेल के जरिए जिला उपायुक्त से मांग की है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला रजिस्ट्रार पर तुरंत कार्रवाही की जाए और किसी अन्य निष्पक्ष वैकल्पिक अधिकारी को नियुक्त कर आरडब्ल्यूए का पुनर्गठन किया जाए।