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Gurugram News: वायु प्रदूषण नियंत्रक उपकरणों के बदलनेे के आदेश से परेशानी
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा तय कंपनियों से ही लगवाने हैं उपकरण, अतिरिक्त आर्थिक बोझ से उद्यमियों परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योगों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में कदम उठाया है। उन्हें वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाले उपकरणों को बदलने या उनकी क्षमता बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं, ताकि हवा कम प्रदूषित हो। पहले से युद्ध संकट और मजदूरी दर बढ़ने के कारण परेशान उद्यमियों को ये नए आदेश चिंतित कर रहे हैं, उद्यमियों ने नए उपकरण को लगाने के लिए तय पैनल की कंपनियों की संख्या बढ़ाने और इसके लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के अनुसार, 50 माइक्रोन प्रति क्यूबिक मीटर क्षमता वाले वायु प्रदूषण नियंत्रक उपकरण लगाने या पुराने को अपग्रेड करने के आदेश हैं। अबतक इस उपकरण की अधिकतम सीमा 80 माइक्रोन प्रति क्यूबिक मीटर निर्धारित थी।
इस आदेश के अनुसार, उद्योगों को सरकार द्वारा तय एजेंसियों से ही ये उपकरण लगवाने या अपग्रेड करवाने हैं। छोटे उद्योगों के लिए इस आदेश के पालन की समय सीमा 20 सितंबर रखी गई है जबकि बड़े उद्योगों के लिए यह समय सीमा एक अगस्त तक रखी गई है।
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मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश गुप्ता कहते हैं कि उद्योगों से ज्यादा धूल और वाहन से प्रदूषण हो रहा है। उद्योगाें से होने वाला प्रदूषण काफी कम है, गुरुग्राम और मानेसर में रेड जोन वाले उद्योग नहीं हैं। ऐसे में इतने कम समय में नए डिवाइस लगाने के आदेश सही नहीं है। सभी उद्योगों को इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय अधिकारी आकांक्षा ने बताया कि यह आदेश कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) के निर्देश के पर जारी किया गया है। बॉयोमास का प्रयोग कर रही फैक्टरियों को ऐसे आदेश दिए गए हैं। बिजली और पीएनजी का प्रयोग करने वाली फैक्ट्रियों के लिए यह नहीं है। इस आदेश का पालन नहीं करने वाली फैक्ट्रियों पर दंड लगाया जाएगा या उसे बंद किया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उद्योगों से होने वाले वायु प्रदूषण को कम करने की दिशा में कदम उठाया है। उन्हें वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लगाए जाने वाले उपकरणों को बदलने या उनकी क्षमता बढ़ाने के आदेश दिए गए हैं, ताकि हवा कम प्रदूषित हो। पहले से युद्ध संकट और मजदूरी दर बढ़ने के कारण परेशान उद्यमियों को ये नए आदेश चिंतित कर रहे हैं, उद्यमियों ने नए उपकरण को लगाने के लिए तय पैनल की कंपनियों की संख्या बढ़ाने और इसके लिए समय सीमा बढ़ाने की मांग की है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आदेश के अनुसार, 50 माइक्रोन प्रति क्यूबिक मीटर क्षमता वाले वायु प्रदूषण नियंत्रक उपकरण लगाने या पुराने को अपग्रेड करने के आदेश हैं। अबतक इस उपकरण की अधिकतम सीमा 80 माइक्रोन प्रति क्यूबिक मीटर निर्धारित थी।
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इस आदेश के अनुसार, उद्योगों को सरकार द्वारा तय एजेंसियों से ही ये उपकरण लगवाने या अपग्रेड करवाने हैं। छोटे उद्योगों के लिए इस आदेश के पालन की समय सीमा 20 सितंबर रखी गई है जबकि बड़े उद्योगों के लिए यह समय सीमा एक अगस्त तक रखी गई है।
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मानेसर इंडस्ट्रीज वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश गुप्ता कहते हैं कि उद्योगों से ज्यादा धूल और वाहन से प्रदूषण हो रहा है। उद्योगाें से होने वाला प्रदूषण काफी कम है, गुरुग्राम और मानेसर में रेड जोन वाले उद्योग नहीं हैं। ऐसे में इतने कम समय में नए डिवाइस लगाने के आदेश सही नहीं है। सभी उद्योगों को इस संबंध में आदेश जारी किए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की क्षेत्रीय अधिकारी आकांक्षा ने बताया कि यह आदेश कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (सीएक्यूएम) के निर्देश के पर जारी किया गया है। बॉयोमास का प्रयोग कर रही फैक्टरियों को ऐसे आदेश दिए गए हैं। बिजली और पीएनजी का प्रयोग करने वाली फैक्ट्रियों के लिए यह नहीं है। इस आदेश का पालन नहीं करने वाली फैक्ट्रियों पर दंड लगाया जाएगा या उसे बंद किया जाएगा।