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Gurugram News: शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी फर्जीवाड़े में ईडी ने कई ठिकानों पर की रेड
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गुरुग्राम के अलावा दिल्ली व फरीदाबाद में कई ठिकानों पर मारा छापा
सुशांत लोक थाना में दर्ज प्राथमिकी पर ईडी ने शुरू की हुई है जांच
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी फर्जीवाड़े में ईडी गुरुग्राम की टीम ने कई ठिकानों पर रेड की है। बृहस्पतिवार को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत मंगल सैन मित्तल, अनिल शर्मा और उनके सहयोगियों तथा दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम में स्थित व्यावसायिक संस्थाओं के आठ आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में ईडी ने तलाशी अभियान चलाया।
शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड (एसजीएचएस) के सदस्यों को कथित तौर पर धोखा देने के आरोप में अनिल शर्मा, अरुण शर्मा, मंगल सैन मित्तल और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस स्टेशन सुशांत लोक, गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। आरोपियों पर शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के सदस्यों को धोखा देने का आरोप है। जांच में पता चला कि मंगल सैन (उस समय सोसाइटी के अध्यक्ष) ने अनिल शर्मा और अरुण शर्मा (मिस कॉनोइसर इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड/सीआईपीएल के निदेशक) के साथ मिलकर धोखाधड़ी से सोसाइटी पर कब्जा कर लिया। सदस्यों के धन का दुरुपयोग किया, फर्जी सदस्यों को भर्ती किया, आधिकारिक रिकॉर्ड छुपाए और बड़ी मात्रा में धन एकत्र करने के बाद आवास परियोजना को बीच में ही छोड़ दिया।
जांच और तलाशी अभियान के दौरान पता चला कि स्वीकृत सदस्यता की सीमा 98 के मुकाबले अनिल शर्मा और मंगल सैन ने अवैध रूप से 34 अनधिकृत सदस्यताएं बेचीं। आरोपियों ने फ्लैटों (जिनकी कीमत 3,500 रुपये से 4,000 रुपये प्रति वर्ग फुट थी) की बिक्री और वसूली के लिए दोहरी भुगतान प्रणाली का संचालन किया। इसमें आधिकारिक बैंक खातों और नकद दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। अब तक की जांच से पता चला है कि कुल लगभग 90.50 करोड़ रुपये की वसूली हुई है, जिसमें बैंकिंग माध्यमों और नकद दोनों से प्राप्त राशि शामिल है।
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जांच में यह भी पता चला कि सोसाइटी की धनराशि को आरोपियों द्वारा नियंत्रित व्यावसायिक संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया था। बैंक खातों की जांच से इन निधियों के बाद के हेरफेर और हेरफेर का पता चलता है, जिसमें मेसर्स कॉनोइसर इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड और अनिल शर्मा के खातों में जमा 12 करोड़ रुपये नकद भी शामिल हैं। तलाशी अभियान के दौरान विभिन्न डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, धन के गबन से संबंधित जानकारी आदि बरामद कर जब्त किए गए। इसके अलावा, तलाशी के दौरान ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 6.63 करोड़ रुपये है। इसमें 55 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी, 1.85 करोड़ रुपये का सोना, 1.95 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण और लगभग 100 किलोग्राम चांदी (2.28 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इस कार्यवाही के दौरान आरोपियों के कई संबंधित बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए गए।
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सुशांत लोक थाना में दर्ज प्राथमिकी पर ईडी ने शुरू की हुई है जांच
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी फर्जीवाड़े में ईडी गुरुग्राम की टीम ने कई ठिकानों पर रेड की है। बृहस्पतिवार को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत मंगल सैन मित्तल, अनिल शर्मा और उनके सहयोगियों तथा दिल्ली, फरीदाबाद और गुरुग्राम में स्थित व्यावसायिक संस्थाओं के आठ आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में ईडी ने तलाशी अभियान चलाया।
शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड (एसजीएचएस) के सदस्यों को कथित तौर पर धोखा देने के आरोप में अनिल शर्मा, अरुण शर्मा, मंगल सैन मित्तल और अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत पुलिस स्टेशन सुशांत लोक, गुरुग्राम में दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने जांच शुरू की। आरोपियों पर शांति निकेतन को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी लिमिटेड के सदस्यों को धोखा देने का आरोप है। जांच में पता चला कि मंगल सैन (उस समय सोसाइटी के अध्यक्ष) ने अनिल शर्मा और अरुण शर्मा (मिस कॉनोइसर इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड/सीआईपीएल के निदेशक) के साथ मिलकर धोखाधड़ी से सोसाइटी पर कब्जा कर लिया। सदस्यों के धन का दुरुपयोग किया, फर्जी सदस्यों को भर्ती किया, आधिकारिक रिकॉर्ड छुपाए और बड़ी मात्रा में धन एकत्र करने के बाद आवास परियोजना को बीच में ही छोड़ दिया।
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जांच और तलाशी अभियान के दौरान पता चला कि स्वीकृत सदस्यता की सीमा 98 के मुकाबले अनिल शर्मा और मंगल सैन ने अवैध रूप से 34 अनधिकृत सदस्यताएं बेचीं। आरोपियों ने फ्लैटों (जिनकी कीमत 3,500 रुपये से 4,000 रुपये प्रति वर्ग फुट थी) की बिक्री और वसूली के लिए दोहरी भुगतान प्रणाली का संचालन किया। इसमें आधिकारिक बैंक खातों और नकद दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किया गया। अब तक की जांच से पता चला है कि कुल लगभग 90.50 करोड़ रुपये की वसूली हुई है, जिसमें बैंकिंग माध्यमों और नकद दोनों से प्राप्त राशि शामिल है।
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जांच में यह भी पता चला कि सोसाइटी की धनराशि को आरोपियों द्वारा नियंत्रित व्यावसायिक संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया था। बैंक खातों की जांच से इन निधियों के बाद के हेरफेर और हेरफेर का पता चलता है, जिसमें मेसर्स कॉनोइसर इंफ्राबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड और अनिल शर्मा के खातों में जमा 12 करोड़ रुपये नकद भी शामिल हैं। तलाशी अभियान के दौरान विभिन्न डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज, संपत्ति संबंधी दस्तावेज, धन के गबन से संबंधित जानकारी आदि बरामद कर जब्त किए गए। इसके अलावा, तलाशी के दौरान ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 6.63 करोड़ रुपये है। इसमें 55 लाख रुपये की बेहिसाब नकदी, 1.85 करोड़ रुपये का सोना, 1.95 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण और लगभग 100 किलोग्राम चांदी (2.28 करोड़ रुपये) शामिल हैं। इस कार्यवाही के दौरान आरोपियों के कई संबंधित बैंक खाते भी फ्रीज कर दिए गए।