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गर्मी व लू से बचाव के लिए एहतियात बरतें जिलावासी : डीसी
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डीसी उत्तम सिंह ने की अपील, कहा- आम नागरिक लू से बचाव के लिए एडवाइजरी की करें अनुपालना
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनहित में लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। इसकी सभी को पालना करते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा बनाए रखने की भी हिदायत दी गई है। जिला आपदा एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं डीसी उत्तम सिंह ने कहा कि गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर धूप में घूमने वालों, खिलाडिय़ों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है।
उन्होंने कहा कि लू लगने के बाद उसका इलाज करने से बेहतर है कि हम लू से बचे रहें। यानी बचाव इलाज से बेहतर है। डीसी ने आमजन से आह्वान किया कि प्रशासन की ओर से जारी की गई एडवाइजरी की पालना करें और लू से बचे रहें। उन्होंने बताया कि लू से बचाव के लिए स्थानीय मौसम संबंधी खबरों के लिए रेडियो सुनें, टीवी देखें, समाचार पत्र पढ़ें। गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें। अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट या छतरी का उपयोग करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं-भले ही प्यास न लगी हो, ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड) नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन कर तरोताजा रहें।
बच्चों को वाहनों में छोडक़र न जाएं उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है, नंगे पांव बाहर न जाएं, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास रखें, काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम लें, खेत खलीहान में काम कर रहे हैं तो समय-समय पर पेड़ या छाया में ही आसरा लें। गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन न करें। ताजे फल, सलाद तथा घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12 बजे से सायं 3 बजे के बीच धूप में सीधे न जाए। यदि बच्चे को चक्कर आए, उल्टी घबराहट अथवा तेज सिरदर्द हो, सीने में दर्द हो अथवा सांस लेने में कठिनाई हो तो चिकित्सक को दिखाएं। डीसी ने बताया कि बढ़ती गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों की खास देखभाल करें। तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों, तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी दें। अपने पालतू जानवर का खाना धूप में न रखें।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला प्रशासन तथा स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनहित में लू से बचाव के लिए एडवाइजरी जारी की गई है। इसकी सभी को पालना करते हुए स्वास्थ्य सुरक्षा बनाए रखने की भी हिदायत दी गई है। जिला आपदा एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं डीसी उत्तम सिंह ने कहा कि गर्मी के मौसम में हवा के गर्म थपेड़ों और बढ़े हुए तापमान से लू लगने का खतरा बढ़ जाता है। खासकर धूप में घूमने वालों, खिलाडिय़ों, बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को लू लगने का डर ज्यादा रहता है।
उन्होंने कहा कि लू लगने के बाद उसका इलाज करने से बेहतर है कि हम लू से बचे रहें। यानी बचाव इलाज से बेहतर है। डीसी ने आमजन से आह्वान किया कि प्रशासन की ओर से जारी की गई एडवाइजरी की पालना करें और लू से बचे रहें। उन्होंने बताया कि लू से बचाव के लिए स्थानीय मौसम संबंधी खबरों के लिए रेडियो सुनें, टीवी देखें, समाचार पत्र पढ़ें। गर्मी में हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें। अपना सिर ढककर रखें, कपड़े, हैट या छतरी का उपयोग करें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं-भले ही प्यास न लगी हो, ओआरएस (ओरल रीहाइड्रेशन सॉल्यूशन), घर में बने पेय जैसे लस्सी, तोरानी (चावल का मांड) नींबू पानी, छाछ आदि का सेवन कर तरोताजा रहें।
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बच्चों को वाहनों में छोडक़र न जाएं उन्हें लू लगने का खतरा हो सकता है, नंगे पांव बाहर न जाएं, गर्मी से राहत के लिए हाथ का पंखा अपने पास रखें, काम के बीच में थोड़ा-थोड़ा विश्राम लें, खेत खलीहान में काम कर रहे हैं तो समय-समय पर पेड़ या छाया में ही आसरा लें। गर्मी के मौसम में जंक फूड का सेवन न करें। ताजे फल, सलाद तथा घर में बना खाना खाएं। खासतौर से दोपहर 12 बजे से सायं 3 बजे के बीच धूप में सीधे न जाए। यदि बच्चे को चक्कर आए, उल्टी घबराहट अथवा तेज सिरदर्द हो, सीने में दर्द हो अथवा सांस लेने में कठिनाई हो तो चिकित्सक को दिखाएं। डीसी ने बताया कि बढ़ती गर्मी में वृद्ध एवं कमजोर व्यक्तियों की खास देखभाल करें। तेज गर्मी, खासतौर से जब वे अकेले हों, तो कम से कम दिन में दो बार उनकी जांच करें। जानवरों को छाया में रखें और उन्हें पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी दें। अपने पालतू जानवर का खाना धूप में न रखें।
