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संवाद : सेक्टर-57 के 20 हजार निवासी बदहाल सड़कों और कचरे से परेशान
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संवाद कार्यक्रम में मौजूद सेक्टर 57 ने आरडबल्यूए के प्रतिनिधि और स्थानीय निवासी । संवाद स
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- अधूरी री-कार्पेटिंग, बिखरा सीएंडडी वेस्ट और सफाईकर्मियों की कमी से बढ़ी परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। सेक्टर-57 में रहने वाले करीब 20 हजार लोग इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से परेशान हैं। टूटी सड़कें, जगह-जगह फैला सीएंडडी वेस्ट, कचरे के ढेर और नालों की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों में नगर निगम के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। आरडब्ल्यूए की ओर से निगम अधिकारियों को लगातार शिकायतें भेजी जा रही हैं, लेकिन लोगों का आरोप है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार अप्रैल 2025 में सेक्टर की सड़कों की री-कार्पेटिंग का काम शुरू हुआ था और इसे फरवरी 2026 तक पूरा किया जाना था। निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी कई स्थानों पर काम अधूरा है। वहीं, कुछ महीने पहले बनाई गई सड़कें भी बारिश के दौरान उखड़ गईं। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। नालों की सफाई को लेकर भी लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि सफाई के बाद निकाली गई गाद सड़क किनारे छोड़ दी जाती है, जो बारिश में दोबारा नालियों में पहुंच जाती है। कई नाले ऊपर से टूटे हुए हैं, जिससे रात में हादसे का खतरा बना रहता है। खाली प्लॉटों में ट्रैक्टरों से मलबा डाले जाने के कारण धूल और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है। आरडब्ल्यूए के अनुसार वर्ष 2024 से पहले सेक्टर में करीब 69 सफाईकर्मी तैनात थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर 12 से 15 रह गई है। इतने बड़े सेक्टर में सफाई व्यवस्था संभालना मुश्किल हो रहा है। पार्कों के रखरखाव और मालियों के वेतन के लिए निगम की ओर से मिलने वाले फंड में भी पांच-छह महीने की देरी होने की बात कही गई है।
कोट-
लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन मिल रहे हैं। सड़क का काम अब भी अधूरा है। -रोशनलाल, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
नालों की सफाई के बाद गाद सड़क पर छोड़ दी जाती है। टूटे नालों से हादसे का खतरा है। -गोपीचंद, निवासी
खाली प्लॉटों में मलबा डाले जाने से धूल और प्रदूषण बढ़ रहा है। -आरएस राठी, निवासी
हाल में बनी सड़कें बारिश में उखड़ गईं। निर्माण की जांच होनी चाहिए। -एसके मल्होत्रा, निवासी
69 सफाईकर्मियों की जगह अब 12-15 कर्मचारी हैं, इतने बड़े सेक्टर की सफाई मुश्किल है। -अनिल मल्ला, निवासी
पार्कों के मेंटेनेंस का फंड छह-छह महीने रोकने से कर्मचारियों को वेतन देने में देरी होती है। -बीके बजाज, निवासी
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संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। सेक्टर-57 में रहने वाले करीब 20 हजार लोग इन दिनों बुनियादी सुविधाओं की बदहाली से परेशान हैं। टूटी सड़कें, जगह-जगह फैला सीएंडडी वेस्ट, कचरे के ढेर और नालों की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय निवासियों में नगर निगम के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। आरडब्ल्यूए की ओर से निगम अधिकारियों को लगातार शिकायतें भेजी जा रही हैं, लेकिन लोगों का आरोप है कि समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार अप्रैल 2025 में सेक्टर की सड़कों की री-कार्पेटिंग का काम शुरू हुआ था और इसे फरवरी 2026 तक पूरा किया जाना था। निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी कई स्थानों पर काम अधूरा है। वहीं, कुछ महीने पहले बनाई गई सड़कें भी बारिश के दौरान उखड़ गईं। इससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। नालों की सफाई को लेकर भी लोग नाराज हैं। उनका कहना है कि सफाई के बाद निकाली गई गाद सड़क किनारे छोड़ दी जाती है, जो बारिश में दोबारा नालियों में पहुंच जाती है। कई नाले ऊपर से टूटे हुए हैं, जिससे रात में हादसे का खतरा बना रहता है। खाली प्लॉटों में ट्रैक्टरों से मलबा डाले जाने के कारण धूल और प्रदूषण की समस्या भी बढ़ रही है। आरडब्ल्यूए के अनुसार वर्ष 2024 से पहले सेक्टर में करीब 69 सफाईकर्मी तैनात थे, लेकिन अब इनकी संख्या घटकर 12 से 15 रह गई है। इतने बड़े सेक्टर में सफाई व्यवस्था संभालना मुश्किल हो रहा है। पार्कों के रखरखाव और मालियों के वेतन के लिए निगम की ओर से मिलने वाले फंड में भी पांच-छह महीने की देरी होने की बात कही गई है।
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कोट-
लंबे समय से शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन मिल रहे हैं। सड़क का काम अब भी अधूरा है। -रोशनलाल, आरडब्ल्यूए अध्यक्ष
नालों की सफाई के बाद गाद सड़क पर छोड़ दी जाती है। टूटे नालों से हादसे का खतरा है। -गोपीचंद, निवासी
खाली प्लॉटों में मलबा डाले जाने से धूल और प्रदूषण बढ़ रहा है। -आरएस राठी, निवासी
हाल में बनी सड़कें बारिश में उखड़ गईं। निर्माण की जांच होनी चाहिए। -एसके मल्होत्रा, निवासी
69 सफाईकर्मियों की जगह अब 12-15 कर्मचारी हैं, इतने बड़े सेक्टर की सफाई मुश्किल है। -अनिल मल्ला, निवासी
पार्कों के मेंटेनेंस का फंड छह-छह महीने रोकने से कर्मचारियों को वेतन देने में देरी होती है। -बीके बजाज, निवासी