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चार हफ्तों में बताएं वृक्ष संरक्षण अधिनियम के लिए क्या कदम उठाए गए : एनजीटी
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30 अक्तूबर को होगी सुनवाई, हरियाणा मुख्य सचिव को हलफनामा देकर बतानी होगी जानकारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हरियाणा के गैर-वन क्षेत्रों में वृक्ष संरक्षण को लेकर उठाए गए कदम के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश के मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है। इसके लिए एनजीटी ने चार हफ्तों का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर 2026 को होगी। यह आदेश एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. अफरोज अहमद, विशेषज्ञ सदस्य की पीठ ने दिया है।
शहरी क्षेत्रों में हो रही अवैध पेड़ों कटाई को लेकर वैशाली राणा ने एनजीटी में शिकायत दी थी। आवेदक ने आरोप लगाया था कि कई पेड़ों को आवश्यक अनुमति के बिना काटा जा रहा है और ऐसे उल्लंघन पर केवल मामूली जुर्माना लगाया जा रहा है। सुनवाई के दौरान आवेदक ने पंजाब भू-संरक्षण अधिनियम, 1900 (पीएलपीए) की धारा 4 के तहत दी गई वृक्ष कटाई की अनुमतियों का उल्लेख किया और कहा कि कुछ अनुमतियां बिना आवश्यक शर्तों के जारी की गई हैं। गुरुग्राम वन प्रभाग द्वारा पिछले एक वर्ष में दी गई वृक्ष कटाई की अनुमतियों के बारे भी बताया गया गया।
गुरुग्राम के प्रभागीय वन अधिकारी ने अधिकरण को बताया कि वर्तमान में निजी भूमि पर वृक्ष कटाई को प्रतिबंधित करने के लिए कोई नियामक प्रावधान नहीं है। नौ सितंबर 2025 को एनजीटी ने एक मामले में प्रदेश द्वारा स्थायी नियामक व्यवस्था स्थापित किए जाने तक अंतरिम नियामक व्यवस्था स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे। पीठ ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री में पाया कि अंतरिम नियामक व्यवस्था का भी पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। विशेष रूप से, रिकॉर्ड में ऐसे मामले सामने आए जिनमें वृक्ष कटाई की अनुमति के बदले अपेक्षित प्रतिपूरक पौधरोपण नहीं किया गया।
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हरियाणा सरकार ने एनजीटी में बताया कि राज्य के गैर-वन क्षेत्रों में वृक्ष कटाई को विनियमित करने के लिए प्रस्तावित हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 2026 के संबंध में बैठक, जो पहले 4 अगस्त 2026 को निर्धारित थी, अब 12 अगस्त 2026 को पुनर्निर्धारित की गई है।
अधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें प्रस्तावित वृक्ष संरक्षण अधिनियम के संबंध में उठाए गए कदमों और लिए गए निर्णयों का विवरण दिया जाए।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। हरियाणा के गैर-वन क्षेत्रों में वृक्ष संरक्षण को लेकर उठाए गए कदम के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश के मुख्य सचिव से हलफनामा मांगा है। इसके लिए एनजीटी ने चार हफ्तों का समय दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर 2026 को होगी। यह आदेश एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और डॉ. अफरोज अहमद, विशेषज्ञ सदस्य की पीठ ने दिया है।
शहरी क्षेत्रों में हो रही अवैध पेड़ों कटाई को लेकर वैशाली राणा ने एनजीटी में शिकायत दी थी। आवेदक ने आरोप लगाया था कि कई पेड़ों को आवश्यक अनुमति के बिना काटा जा रहा है और ऐसे उल्लंघन पर केवल मामूली जुर्माना लगाया जा रहा है। सुनवाई के दौरान आवेदक ने पंजाब भू-संरक्षण अधिनियम, 1900 (पीएलपीए) की धारा 4 के तहत दी गई वृक्ष कटाई की अनुमतियों का उल्लेख किया और कहा कि कुछ अनुमतियां बिना आवश्यक शर्तों के जारी की गई हैं। गुरुग्राम वन प्रभाग द्वारा पिछले एक वर्ष में दी गई वृक्ष कटाई की अनुमतियों के बारे भी बताया गया गया।
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गुरुग्राम के प्रभागीय वन अधिकारी ने अधिकरण को बताया कि वर्तमान में निजी भूमि पर वृक्ष कटाई को प्रतिबंधित करने के लिए कोई नियामक प्रावधान नहीं है। नौ सितंबर 2025 को एनजीटी ने एक मामले में प्रदेश द्वारा स्थायी नियामक व्यवस्था स्थापित किए जाने तक अंतरिम नियामक व्यवस्था स्थापित करने के निर्देश दिए गए थे। पीठ ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री में पाया कि अंतरिम नियामक व्यवस्था का भी पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा है। विशेष रूप से, रिकॉर्ड में ऐसे मामले सामने आए जिनमें वृक्ष कटाई की अनुमति के बदले अपेक्षित प्रतिपूरक पौधरोपण नहीं किया गया।
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हरियाणा सरकार ने एनजीटी में बताया कि राज्य के गैर-वन क्षेत्रों में वृक्ष कटाई को विनियमित करने के लिए प्रस्तावित हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 2026 के संबंध में बैठक, जो पहले 4 अगस्त 2026 को निर्धारित थी, अब 12 अगस्त 2026 को पुनर्निर्धारित की गई है।
अधिकरण ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को चार सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें प्रस्तावित वृक्ष संरक्षण अधिनियम के संबंध में उठाए गए कदमों और लिए गए निर्णयों का विवरण दिया जाए।