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दिल्ली-NCR में झूमकर आया सावन: पारा 5.2 से 7.1 डिग्री तक कम रहा, जानें मौसम क्यों है इतना मेहरबान, कल भी अलर्ट

Thu, 06 Aug 2026 08:05 PM IST
Akash Dubey अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Akash Dubey Updated Thu, 06 Aug 2026 08:05 PM IST
सार

बुधवार रात से बृहस्पतिवार शाम तक दिल्ली-एनसीआर में भारी बारिश हुई। इससे बाजारों और सड़कों पर जलभराव हो गया। प्रीत विहार में पेड़ गिरने से तीन कारें दबीं। आईएमडी ने 7 अगस्त के लिए बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।

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Heavy rain lashed Delhi-NCR temperatures remained 5.2 to 7.1 degrees below normal
दिल्ली का मौसम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली समेत एनसीआर में मानसून जमकर बरस रहा है। ऐसे में बुधवार देर रात से शुरू हुई सावन की पहली अच्छी बारिश का दौर बृहस्पतिवार शाम तक भी चला। सुबह से ही झमाझम बारिश हुई। सप्ताह बाद दिल्ली में इस तरह की बारिश हुई। बारिश से गर्मी से राहत तो मिली, लेकिन यही बारिश आफत भी लेकर आई। कुछ देर की बारिश ने दिल्ली को ''स्विमिंग पूल'' सा बना दिया था। बाजारों में घुटनों तक पानी भर गया था। सदर बाजार में संकरी गलियों में घुटनों तक पानी भर गया था। गंदे पानी और तैरते कचरे के बीच लोगों, बच्चों और खरीदारों को पानी से होकर गुजरना पड़ा। कई दुकानों में पानी भी घुस गया।

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सड़कों पर पानी जमा हो गया था। इससे गाड़ियों की रफ्तार धीमी हो गई। वहीं, प्रीत विहार में एक विशालकाय बरगद का पेड़ गिर गया। बारिश के कारण गिरे इस पेड़ के नीचे तीन कारें दब गई हैं। बरगद गिरने से किसी तरह की जनहानि की खबर सामने नहीं आई है। आईएमडी के अनुसार, बृहस्पतिवार शाम 5:30 बजे तक सफदरजंग मानक केंद्र में 56 एमएम बारिश हुई। सुबह 11:30 बजे तक लोधी रोड में सबसे ज्यादा 50.6 मिमी बारिश हुई। रिज में 36.4, फार्मा साइंस रिसर्च में 30, छतरपुर में 27.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। वहीं, 11:30 से 2:30 बजे तक जाफरपुर में 25 बारिश हुई। रिज में 18.0 मिमी, पूसा में 12.5 और लोधी रोड में 9.8 मिमी बारिश हुई। वहीं, 2:30 से 5:30 बजे तक नजफगढ़ में दो, जनकपुरी में एक और केवीके सीआरपीएफ कैंपस में 0.5 मिमी बारिश दर्ज की गई। 

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इन स्टेशनों पर अधिकतम तापमान सामान्य से 5.2 से 7.1 डिग्री तक कम रहा
बारिश के असर से दिल्ली में तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। सफदरजंग में अधिकतम तापमान 27.6 रहा, जो सामान्य से 6.6 डिग्री सेल्सियस कम है। यहां 24 घंटे में तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 25.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.3डिग्री सेल्सियस कम है। साथ ही, पालम में अधिकतम तापमान 27.3 और न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस रहा। यही नहीं, लोदी रोड में अधिकतम तापमान 27.8 और न्यूनतम तापमान 25.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा, रिज में अधिकतम तापमान 27.6 और न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं, आया नगर में अधिकतम तापमान 27.2 और न्यूनतम तापमान 25.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

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दिल्ली में बारिश होने का कारण
आईएमडी के वैज्ञानिक कृष्ण मिश्रा ने बताया कि दिल्ली और आसपास के इलाकों में हो रही बारिश के पीछे कई मौसम प्रणालियां एक साथ सक्रिय हैं। सबसे बड़ा कारण मानसून ट्रफ का दिल्ली के करीब से गुजरना है। फिलहाल यह ट्रफ पंजाब के फिरोजपुर, हरियाणा के रोहतक और उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर व कानपुर से होकर बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है। जब मानसून ट्रफ दिल्ली के पास होती है, तो बारिश की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसके अलावा दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर निचले स्तर पर एक चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इससे आसपास के क्षेत्रों में नमी वाली हवाएं लगातार पहुंच रही हैं, जो बादलों के बनने और बारिश होने में मदद कर रही हैं।

त्रिकोणी मौसमी दशाओं से हो रही बारिश
वैज्ञानिक कृष्ण मिश्रा के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय है। मानसूनी हवाओं और पश्चिमी विक्षोभ के एक साथ असर से बादलों को और मजबूती मिल रही है, जिससे कई इलाकों में अच्छी बारिश हो रही है। हालांकि, उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बना एक चक्रवाती परिसंचरण अब कमजोर पड़ गया है, लेकिन बाकी सक्रिय मौसम प्रणालियां अभी भी दिल्ली-एनसीआर में बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाए हुए हैं। ऐसे में मानसून ट्रफ का दिल्ली के पास होना, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बना चक्रवाती सिस्टम और पश्चिमी विक्षोभ इन तीनों के संयुक्त प्रभाव से दिल्ली में बारिश हो रही है। यही कारण है कि आने वाले एक-दो दिनों तक भी रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी रहने की संभावना बनी हुई है।

दिल्ली में मानसून फिर दिखाएगा असर, कल भी बारिश का यलो अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में आसमान में बादल छाए रहेंगे और कई इलाकों में बारिश का दौर देखने को मिलेगा। खासतौर पर 7 अगस्त को दिल्ली में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 7 अगस्त को अधिकतम तापमान 31 से 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 से 24 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। सुबह से दोपहर तक कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ इलाकों में तेज बारिश भी हो सकती है। शाम और रात के समय भी हल्की बारिश की संभावना बनी रहेगी। ऐसे में मौसम विभाग ने बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है। 

8 से 12 अगस्त तक मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं होगा
मौसम विभाग के अनुसार, 8 से 12 अगस्त तक मौसम में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। इस दौरान आसमान में बादलों की मौजूदगी बनी रहेगी और कुछ इलाकों में हल्की या बहुत हल्की बारिश हो सकती है। तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मानसूनी हवाओं की सक्रियता के कारण दिल्लीवासियों को उमस भरी गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि, तेज बारिश की स्थिति में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

इसलिए डूब जाती है दिल्ली
दिल्लीवालों के लिए जरा सी बारिश में पानी भरने की समस्या से दो-चार होना कोई नई बात नहीं है। तेजी से हो रहे शहरीकरण में थोड़ी सी बारिश से जलभराव की परेशानी आम बात है। यहां अभी भी ड्रेनेज का प्लान 50 साल पुराना है। दिल्ली का मौजूदा ड्रेनेज प्लान 1976 में बनाया गया था। तब दिल्ली की आबादी लगभग 60 लाख थी। लेकिन, दिल्ली की आबादी दो करोड़ से ज्यादा हो चुकी है और ड्रेनेज सिस्टम वही पुराना है। दिल्ली का ड्रेनेज मुख्य रूप से तीन प्राकृतिक बेसिन पर टिका है। ये नजफगढ़, बारापुला और ट्रांस-यमुना बेसिन हैं। नजफगढ़ बेसिन दिल्ली का सबसे बड़ा बेसिन है, जो पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के पानी को समेटता है। बारापुला बेसिन दक्षिण और मध्य दिल्ली के पानी की निकासी संभालता है। वहीं, ट्रांस-यमुना बेसिन पूर्वी दिल्ली (यमुना पार के इलाकों) के ड्रेनेज को नियंत्रित करता है।

मानसून के दौरान दिल्ली में बार-बार सामने आने वाली जलभराव की समस्या बताती है कि घटना के बाद की प्रतिक्रिया से आगे बढ़कर रणनीतिक तरीके से जोखिम आधारित शहरी बाढ़ प्रबंधन की योजना बनाने की जरूरत है। भले ही कम समय में तेज बारिश होना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन जल निकासी की सही व्यवस्था न होना, कचरा प्रबंधन की कमी और नदियों के आसपास (खादर) अतिक्रमण के कारण स्थिति और बिगड़ जाती है। -डॉ. नितिन बस्सी, फेलो, काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू)

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