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Delhi NCR News: स्वदेशी एचपीवी टेस्ट से होगी सर्वाइकल कैंसर की सस्ती और प्रभावी जांच
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-एम्स दिल्ली सहित कई दूसरे संस्थानों ने मिलकर किया अध्ययन
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान के लिए स्वदेशी पॉइंट ऑफ केयर (पीओसी) एचपीवी टेस्ट एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है। एक नए अध्ययन में सामने आया कि देश में विकसित कुछ एचपीवी डीएनए परीक्षण प्लेटफॉर्म कम लागत पर प्रभावी स्क्रीनिंग की क्षमता रखते हैं और इनको राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जा सकता है।
यह अध्ययन एम्स नई दिल्ली, आईसीएमआर राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीआर), आईसीएमआर प्रजनन और बाल स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय संस्थान और फ्रांस स्थित इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के सहयोग से हुआ। अध्ययन के दौरान चार स्वदेशी पीओसी एचपीवी परीक्षणों का मूल्यांकन किया गया। जिनमें से दो राष्ट्रीय कार्यक्रम में उपयोग के लिए उपयुक्त पाए गए। अंतरराष्ट्रीय जर्नल इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार कैंसरकारी एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है।
एचपीवी के आठ प्रकारों की हो सकेगी जांच : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए एचपीवी परीक्षण को सबसे प्रभावी रणनीति माना है। अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता और समन्वयक एम्स दिल्ली के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की पूर्व प्रमुख और एनसीआई की प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. नीरजा भाटला ने कहा कि यह अध्ययन भारत में विकसित एचपीवी परीक्षणों के मूल्यांकन के लिए शुरुआती अध्ययनों में से एक है। शोधकर्ताओं ने सर्वाइकल कैंसर में सबसे अधिक पाए जाने वाले आठ एचपीवी प्रकारों को लक्षित करने वाले ऐसे परीक्षण विकसित करने का सुझाव दिया जिन्हें जिला और उप जिला स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में न्यूनतम प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के साथ संचालित किया जा सके।
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केवल दो बार करानी होगी जांच : वर्तमान में अधिकांश एचपीवी परीक्षण उच्च आय वाले देशों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। वह एचपीवी के अधिक प्रकारों की जांच करते हैं। जिससे उनकी लागत और जटिलता बढ़ जाती है। लेकिन कम लागत पर भी सर्वाइकल कैंसर के आठ एचपीवी प्रकारों की पहचान की जा सकती है। इसके लिए बार-बार स्क्रीनिंग करने की जरूरत भी नहीं है। महिलाओं को 30-35 साल की उम्र में स्क्रीनिंग करानी होगी। रिपोर्ट के निगेटिव आने पर फिर दस साल बाद जांच करवा सकेंगी।
सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन रणनीति का अहम हिस्सा : आईसीएमआर-एनआईसीपीआर की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह ने कहा कि 35 और 45 वर्ष की आयु में एचपीवी डीएनए परीक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन महंगे परीक्षणों के कारण निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इसका व्यापक क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा है।
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौती बने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान के लिए स्वदेशी पॉइंट ऑफ केयर (पीओसी) एचपीवी टेस्ट एक बड़ी उम्मीद बनकर उभरी है। एक नए अध्ययन में सामने आया कि देश में विकसित कुछ एचपीवी डीएनए परीक्षण प्लेटफॉर्म कम लागत पर प्रभावी स्क्रीनिंग की क्षमता रखते हैं और इनको राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया जा सकता है।
यह अध्ययन एम्स नई दिल्ली, आईसीएमआर राष्ट्रीय कैंसर रोकथाम एवं अनुसंधान संस्थान (एनआईसीपीआर), आईसीएमआर प्रजनन और बाल स्वास्थ्य अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय संस्थान और फ्रांस स्थित इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के सहयोग से हुआ। अध्ययन के दौरान चार स्वदेशी पीओसी एचपीवी परीक्षणों का मूल्यांकन किया गया। जिनमें से दो राष्ट्रीय कार्यक्रम में उपयोग के लिए उपयुक्त पाए गए। अंतरराष्ट्रीय जर्नल इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार कैंसरकारी एचपीवी संक्रमण सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण है।
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एचपीवी के आठ प्रकारों की हो सकेगी जांच : विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन के लिए एचपीवी परीक्षण को सबसे प्रभावी रणनीति माना है। अध्ययन की प्रमुख शोधकर्ता और समन्वयक एम्स दिल्ली के प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की पूर्व प्रमुख और एनसीआई की प्रोफेसर एमेरिटस डॉ. नीरजा भाटला ने कहा कि यह अध्ययन भारत में विकसित एचपीवी परीक्षणों के मूल्यांकन के लिए शुरुआती अध्ययनों में से एक है। शोधकर्ताओं ने सर्वाइकल कैंसर में सबसे अधिक पाए जाने वाले आठ एचपीवी प्रकारों को लक्षित करने वाले ऐसे परीक्षण विकसित करने का सुझाव दिया जिन्हें जिला और उप जिला स्तर की स्वास्थ्य सुविधाओं में न्यूनतम प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के साथ संचालित किया जा सके।
केवल दो बार करानी होगी जांच : वर्तमान में अधिकांश एचपीवी परीक्षण उच्च आय वाले देशों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किए गए हैं। वह एचपीवी के अधिक प्रकारों की जांच करते हैं। जिससे उनकी लागत और जटिलता बढ़ जाती है। लेकिन कम लागत पर भी सर्वाइकल कैंसर के आठ एचपीवी प्रकारों की पहचान की जा सकती है। इसके लिए बार-बार स्क्रीनिंग करने की जरूरत भी नहीं है। महिलाओं को 30-35 साल की उम्र में स्क्रीनिंग करानी होगी। रिपोर्ट के निगेटिव आने पर फिर दस साल बाद जांच करवा सकेंगी।
सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन रणनीति का अहम हिस्सा : आईसीएमआर-एनआईसीपीआर की निदेशक डॉ. शालिनी सिंह ने कहा कि 35 और 45 वर्ष की आयु में एचपीवी डीएनए परीक्षण विश्व स्वास्थ्य संगठन की सर्वाइकल कैंसर उन्मूलन रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लेकिन महंगे परीक्षणों के कारण निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इसका व्यापक क्रियान्वयन चुनौतीपूर्ण रहा है।