{"_id":"6adbc3fd668f4a3cc00ffdf4","slug":"lax-oversight-on-the-sale-of-firecrackers-everything-is-out-in-the-open-in-old-delhi-2026-10-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"लापरवाही: बिगड़ती हवा के बीच पटाखों की बिक्री पर निगरानी में नरमी, पुरानी दिल्ली में सब कुछ खुलेआम... सड़क पर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लापरवाही: बिगड़ती हवा के बीच पटाखों की बिक्री पर निगरानी में नरमी, पुरानी दिल्ली में सब कुछ खुलेआम... सड़क पर
Sat, 24 Oct 2026 03:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा
सनी सिंह, नई दिल्ली
सनी सिंह, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 24 Oct 2026 03:27 AM IST
सार
चांदनी चौक, जामा मस्जिद, लाल किला और सदर बाजार के आसपास पटाखे खुलेआम बिकते मिले। कई पैकेटों पर ग्रीन पटाखे और प्रदूषण मुक्त उत्सव के दावे थे, लेकिन उनकी प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था नजर नहीं आई।
विज्ञापन
सड़क पर सजी एक दुकान
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली की हवा दिवाली से पहले ही खराब होने लगी है। 21 अक्तूबर को औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 245 पहुंचने के बाद ग्रेप-1 लागू हो गया। इसके बावजूद चांदनी चौक, जामा मस्जिद, लाल किला और सदर बाजार के आसपास पटाखे खुलेआम बिकते मिले। कई पैकेटों पर ग्रीन पटाखे और प्रदूषण मुक्त उत्सव के दावे थे, लेकिन उनकी प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था नजर नहीं आई। भीड़भाड़ वाले बाजारों में दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ तक पटाखे रखे मिले। अग्नि सुरक्षा के इंतजाम भी दिखाई नहीं दिए।
विज्ञापन
जामा मस्जिद के गेट नंबर तीन के बाहर करीब 15 ठेलों पर पटाखे बिक रहे थे। ज्यादातर पैकेटों पर क्यूआर कोड नहीं मिला। एक डिब्बे पर कोड था, लेकिन कई बार कोशिश के बाद भी स्कैन नहीं हुआ। ऐसे में ग्राहक कैसे सुनिश्चित करें कि पैकेट पर ग्रीन पटाखा लिखे होने का दावा सही है?
विज्ञापन
चांदनी चौक के भागीरथ पैलेस में बीड़ी बम, मिसाइल बम, लड़ियां, लंबे बम, रॉकेट, स्पिनर और फाउंटेन बम बिकते मिले। यहां खरीदारी करने आए संदीप ने बताया कि उन्हें पटाखों पर प्रतिबंध की जानकारी नहीं थी। वह घूमने आए थे और बिक्री होती देखकर पटाखे खरीद लिए। उन्होंने 120 रुपये के बीड़ी बम, 150 रुपये के मिसाइल बम, 300 रुपये की लड़ी, 350 रुपये के लंबे बम, 320 रुपये में 10 रॉकेट, 800 रुपये के चार पैकेट स्पिनर और 450 रुपये के दो पैकेट फाउंटेन बम खरीदे।
विज्ञापन
भागीरथ पैलेस में रेहड़ी लगाने वाले जावेद की दुकान पर भी कई पैकेटों पर ग्रीन पटाखा लिखा था। वह इन्हें कम प्रदूषण वाला बताकर बेच रहे थे। हालांकि, सिर्फ पैकेट पर लिखा दावा उत्पाद की प्रमाणिकता का प्रमाण नहीं है।
सड़क तक पटाखे, सुरक्षा पर सवाल
बाजारों में दुकानों के बाहर तक पटाखे रखे मिले। भीड़ के बीच इनकी बिक्री के बावजूद आग लगने की स्थिति से निपटने के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आए। ऐसे में दुकानों के लाइसेंस, स्टॉक, भंडारण और अग्नि सुरक्षा की जांच जरूरी है।दिल्ली पुलिस ने 15 अक्तूबर को अवैध पटाखों की बड़ी खेप पकड़ी थी।
वहीं, 19 अक्तूबर को नंद नगरी थाना पुलिस ने तीन कथित अवैध आपूर्तिकर्ताओं को पकड़कर करीब 98 किलो पटाखे बरामद किए। उधर, दशहरे के बाद एक्यूआई मंगलवार शाम चार बजे 179 से बढ़कर बुधवार शाम चार बजे 245 पहुंच गया। अवैध पटाखा बिक्री पर एक पुलिस अफसर ने कहा कि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। जो भी अवैध पटाखों की बिक्री करते पाया गया, उस पर सख्त कार्रवाई करने के साथ उसके सभी पटाखे जब्त कर लिए जाएंगे।
स्थायी अनुमति की मांग
दिल्ली फायरवर्क्स शॉपकीपर्स एसोसिएशन ने 22 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर स्थायी लाइसेंसधारी कारोबारियों को अधिकृत ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति मांगी है। एसोसिएशन ने केंद्र और दिल्ली सरकार को भी पत्र भेजा है। अगली सुनवाई 29 अक्तूबर को होगी।
दिल्ली के बाजारों में रेहड़ी-पटरी वाले पटाखे बेच रहे हैं। ये पटाखे हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि इलाकों से लाकर बेचे जा रहे हैं। दिल्ली में पटाखों पर बैन है, इसके बावजूद इस तरह की बिक्री चिंता का विषय है।
-नरेंद्र गुप्ता, अध्यक्ष, फायर वेलफेयर ट्रेडर्स एसोसिएशन, सदर बाजार
यदि दिल्ली में स्थायी लाइसेंसधारी दुकानदारों को ग्रीन पटाखे बेचने की अनुमति मिलती है तो ग्राहकों को अधिकृत दुकानों से पटाखे मिल सकेंगे। इससे दूसरे राज्यों से गैर-अधिकृत पटाखे लाने की जरूरत भी खत्म होगी। 29 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने की उम्मीद है।
-सुनील जैन, दिल्ली फायरवर्क्स शॉपकीपर्स एसोसिएशन
सिस्टम से सवाल
- ग्रीन पटाखों की प्रामाणिकता जांचने की व्यवस्था कहां है?
- बिना क्यूआर कोड वाले पटाखों की बिक्री पर निगरानी कौन कर रहा है?
- सड़क और फुटपाथ तक पटाखे रखने की अनुमति किसने दी?
- बाजारों में अग्नि सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं हैं?