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Delhi: गर्मी से पहले संकट की आहट, जल बोर्ड पहुंचा NGT के दरवाजे, बाढ़ क्षेत्र में बोरवेल चलाने की मांगी अनुमति

अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 24 Mar 2026 05:27 AM IST
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सार

गर्मी की दस्तक से पहले राजधानी में जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से यमुना के बाढ़ क्षेत्र (ओ-जोन) में लगे 100 से अधिक बोरवेल चालू करने की अनुमति मांगी है। 

Looming Crisis Ahead of Summer Water Board Approaches NGT Seeks Permission to Operate Borewells in Floodplains
मंत्री प्रवेश साहिब सिंह - फोटो : पीटीआई
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विस्तार

गर्मी की दस्तक से पहले राजधानी में जल संकट की आहट सुनाई देने लगी है। बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) से यमुना के बाढ़ क्षेत्र (ओ-जोन) में लगे 100 से अधिक बोरवेल चालू करने की अनुमति मांगी है। 

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अभी दिल्ली में पानी की मांग लगभग 1,260 एमजीडी (मिलियन गैलन प्रतिदिन) तक पहुंचती है, जबकि उपलब्ध सप्लाई करीब 1,000 एमजीडी ही है। इस अंतर से हर साल गर्मियों में जल संकट गहरा जाता है। दिल्ली के जल मंत्री  प्रवेश वर्मा के अनुसार, यह प्रस्ताव पर्यावरण नियमों का पालन करते  हुए राष्ट्रीय हरित अधिकरण को भेजा गया है। उन्होंने बताया कि मंजूरी मिलने के बाद इन बोरवेल से रोजाना 30 से 40 मिलियन गैलन अतिरिक्त पानी की सप्लाई की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी राज्यों से अतिरिक्त पानी की व्यवस्था करने का भी प्रयास किया जा रहा है। 
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41 फीसदी भूजल अति-शोषित श्रेणी में
हालांकि, प्रस्ताव को लेकर पर्यावरण विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (सीजीडब्ल्यूबी) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली का लगभग 41 फीसदी भूजल क्षेत्र पहले ही अति-शोषित श्रेणी में आ चुका है। ऐसे में भूजल पर ज्यादा निर्भरता भविष्य में और बड़े संकट को जन्म दे सकती है। पर्यावरणविद् दीवान सिंह का कहना है कि लगातार भूजल दोहन से एक्विफर दूषित हो सकते हैं।

पेड़ों की अवैध छंटाई मामले में कार्रवाई का निर्देश
एनजीटी ने नरेला में पेड़ों की अवैध कटाई पर अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। एनजीटी अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेष सदस्य डॉ. अफरोज अहमद शामिल ने मामले की सुनवाई की। पीठ ने उत्तर दिल्ली के उप वन संरक्षक की रिपोर्ट पर भरोसा जताया और मामले को बंद कर दिया। उप वन संरक्षक (उत्तर) को  दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। 


दिल्ली हाई कोर्ट के स्टे के कारण नहीं हो पा रहे कुछ काम
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने जसोला डिस्ट्रिक्ट सेंटर के प्लॉट नंबर-2 पर हो रही कचरा डंपिंग की शिकायत के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में पक्ष रखा है।डीडीए का कहना है कि वह नियमित सफाई कर रहा है, लेकिन दिल्ली हाई कोर्ट के स्टे के कारण कुछ काम नहीं हो पा रहे हैं। डीडीए ने अपने हलफनामे में बताया कि प्लॉट का मालिकाना हक अभी कोर्ट में विवादित है और 2019 से उस पर स्टे लगा हुआ है। यह शिकायत स्प्लेंडर लैंडबेस कंपनी और अन्य लोगों ने की थी। उनका आरोप है कि जसोला मेट्रो स्टेशन से अपोलो अस्पताल तक की सड़क और संबंधित प्लॉट पर रोजाना अवैध रूप से कचरा और मलबा फेंका जाता है। डीडीए ने कहा कि कई बार स्थानीय लोग स्टाफ को काम नहीं करने के लिए रोकते हैं। इसको देखते हुए सरिता विहार थाने और डीसीपी को पत्र लिखकर बीट कांस्टेबल की तैनाती, रात में निगरानी और कचरा फेंकने वालों पर कार्रवाई की मांग की गई है।  

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