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दिल्ली के मकान मालिकों को बड़ा लाभ: इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज में सरकार ने दी राहत, 90% मालिकों को मिलेगा फायदा

आदित्य पाण्डेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Akash Dubey Updated Fri, 22 May 2026 02:40 PM IST
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सार

 दिल्ली सरकार ने पानी और सीवर के ढांचागत शुल्क नियमों में बदलाव किया है। अब 200 वर्गमीटर तक के मकानों को शुल्क से छूट मिलेगी, जिससे लाखों लोगों को राहत मिलेगी।

Major relief in infrastructure charges in Delhi 90% of homeowners will benefit
सीएम रेखा गुप्ता - फोटो : @gupta_rekha
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विस्तार

दिल्ली सरकार ने पानी और सीवर कनेक्शन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज (आईएफसी) नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए राजधानी के लाखों लोगों को राहत दी है। नई व्यवस्था के तहत अब केवल 200 वर्गमीटर से बड़े निर्माण पर ही इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज लगेगा। सरकार का दावा है कि इससे दिल्ली की करीब 90 फीसदी आबादी को फायदा मिलेगा।

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मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शुक्रवार को दिल्ली सचिवालय में जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस नई व्यवस्था की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी दिल्ली में नया निर्माण होता है और जल बोर्ड से पानी-सीवर कनेक्शन के लिए एनओसी ली जाती है, तब वन टाइम इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज देना पड़ता है। पहले यह शुल्क पूरे क्षेत्रफल के आधार पर लिया जाता था, जिससे लोगों पर ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ता था। अब सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए केवल जरूरत और वास्तविक निर्माण के आधार पर शुल्क लेने का फैसला किया है।

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200 वर्गमीटर तक के मकानों पर शुल्क नहीं 
नई व्यवस्था के तहत अब केवल 200 वर्गमीटर से बड़े निर्माण पर ही इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज लगेगा। 200 वर्गमीटर तक के मकानों को इस शुल्क से पूरी तरह बाहर रखा गया है। इसके अलावा नॉन-एफएआर यानी खुले क्षेत्र को चार्ज की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली सरकार के समय पानी के बढ़े हुए बिल और आईएफसी शुल्क को लेकर लगातार शिकायतें आती थीं, लेकिन सुनवाई नहीं होती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि उस व्यवस्था में गड़बड़ियां थीं और लोग अधिकारियों के साथ मिलकर अलग-अलग तरीके अपनाने को मजबूर थे। अब सरकार ने पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और न्यायसंगत बनाया है।

जी एंड एच श्रेणी की कॉलोनियों को छूट
सरकार ने अलग-अलग श्रेणी की कॉलोनियों के लिए भी राहत का प्रावधान किया है। जी और एच श्रेणी की कॉलोनियों को 70 फीसदी तक छूट मिलेगी। धार्मिक संस्थानों को 50 फीसदी की राहत दी गई है। सरकार के अनुसार यदि किसी धार्मिक स्थल का 300 एफएआर वाला चार मंजिला भवन है, तो उसे करीब 8 लाख रुपये तक की छूट मिल सकती है। ई और एफ श्रेणी की कॉलोनियों में भी शुल्क में भारी कमी की गई है। पहले जहां लोगों को लगभग 16 लाख रुपये तक इंफ्रास्ट्रक्चर चार्ज देना पड़ता था, वहीं अब संशोधित व्यवस्था के बाद यह घटकर करीब 4.5 लाख रुपये रह जाएगा।

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भाजपा के संकल्प पत्र को पूरा किया - प्रवेश साहिब सिंह 
जल मंत्री ने कहा कि दो दिन पहले हुई दिल्ली जल बोर्ड की बैठक में सरकार ने संकल्प पत्र के वादों के अनुसार आईएफसी व्यवस्था को न्यायसंगत बनाने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार पानी और सीवर व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।

ए, बी और सी श्रेणी की कॉलोनियों को कम लाभ
सरकार का कहना है कि ए, बी और सी श्रेणी की कॉलोनियों को अपेक्षाकृत कम राहत मिलेगी, जबकि डी, ई, एफ, जी और एच श्रेणी की कॉलोनियों को ज्यादा लाभ पहुंचेगा। नई नीति लागू होने के बाद आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम होगा और भवन निर्माण से जुड़ी प्रक्रिया भी आसान बनेगी।

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