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Master Plan 2047: अगले 20 साल में बदलेगा दिल्ली के आवासीय ढांचे का स्वरूप; गरीबों के लिए भी गुलाबी तस्वीर
Sat, 15 Aug 2026 03:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 15 Aug 2026 03:14 AM IST
सार
मास्टर प्लान के इन प्रावधानों से दिल्ली में आवासीय विकास का स्वरूप केवल नए मकानों के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हाई डेंसिटी कॉरिडोर, ग्रामीण विकास, झुग्गी पुनर्वास, ईडब्ल्यूएस आवास और किराये के किफायती मकानों को एक व्यापक शहरी आवास नीति से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
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- फोटो : Freepik
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विस्तार
मास्टर प्लान-2047 में दिल्ली के आवासीय विकास को लेकर व्यापक बदलाव का खाका तैयार किया गया है। इसमें एक तरफ यूईआर-दो के आसपास करीब 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में हाई डेंसिटी कॉरिडोर विकसित कर आवास, वाणिज्यिक गतिविधियों, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स को एक साथ बढ़ावा देने की योजना है, वहीं दिल्ली के 47 ग्रामीण क्षेत्रों में कम घनत्व वाला विकास कर गांवों के मौजूदा चरित्र को बनाए रखने पर जोर दिया गया है। इसमें ईडब्ल्यूएस आवास और किफायती किराये के मकानों के लिए भी नए प्रावधान किए गए हैं।
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मास्टर प्लान के इन प्रावधानों से दिल्ली में आवासीय विकास का स्वरूप केवल नए मकानों के निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हाई डेंसिटी कॉरिडोर, ग्रामीण विकास, झुग्गी पुनर्वास, ईडब्ल्यूएस आवास और किराये के किफायती मकानों को एक व्यापक शहरी आवास नीति से जोड़ने का प्रयास किया गया है। अब इन प्रावधानों का वास्तविक असर इनके क्रियान्वयन, जमीन की उपलब्धता और संबंधित एजेंसियों की क्षमता पर निर्भर करेगा।
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यूईआर-दो के आसपास बनेगा हाई डेंसिटी कॉरिडोर
यूईआर-दो के विकसित हिस्से के आसपास करीब 20 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को हाई डेंसिटी कॉरिडोर के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। यहां सामान्य आवासीय विकास के बजाय मिश्रित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। आवास के साथ कॉमर्शियल, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स गतिविधियां विकसित हो सकेंगी। भविष्य में यूईआर के विकसित होने वाले अन्य हिस्सों पर भी ऐसे प्रावधान लागू किए जा सकते हैं। हालांकि अधिक घनत्व वाले विकास के लिए सड़क, सार्वजनिक परिवहन, पानी, सीवर, ड्रेनेज और बिजली जैसी सुविधाओं को भी समान रूप से मजबूत करना होगा।
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ईडब्ल्यूएस के लिए अतिरिक्त एफएआर
ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और कम्युनिटी सर्विस पर्सनल के लिए अनुमत एफएआर से ऊपर कम से कम 15 प्रतिशत अतिरिक्त एफएआर का इस्तेमाल करना होगा। ईडब्ल्यूएस आवास का कारपेट एरिया 25 से 30 वर्गमीटर रखा गया है। ग्रुप हाउसिंग के लिए न्यूनतम प्लॉट क्षेत्रफल 3000 वर्गमीटर और न्यूनतम सड़क आरओडब्ल्यू 18 मीटर निर्धारित है। वहीं लाल डोरा और एक्सटेंडेड लाल डोरा में न्यूनतम प्लॉट क्षेत्रफल 2000 वर्गमीटर और सड़क की आरओडब्ल्यू कम से कम 12 मीटर होगी। अधिकतम एफएआर 200 और अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग के लिए 300 तक एफएआर का प्रावधान है।
प्रवासियों के लिए सस्ते किराये के मकान
मास्टर प्लान में किफ़ायती किराये के आवास परिसर यानी एआरएससी को भी बढ़ावा दिया गया है। इसका लक्ष्य शहरी प्रवासियों, ईडब्ल्यूएस और एलआईसी वर्ग को सस्ती और सुरक्षित किराये की आवासीय सुविधा उपलब्ध कराना है। सरकारी, निजी और पीपीपी मॉडल के जरिए ऐसे प्रोजेक्ट विकसित किए जा सकेंगे।
32 वर्गमीटर के प्लॉट पर भी आवासीय विकास
प्लॉटेड हाउसिंग के लिए न्यूनतम 32 वर्गमीटर के प्लॉट पर भी आवासीय विकास की अनुमति का प्रावधान किया गया है। सामान्य स्थिति में अधिकतम ऊंचाई 15 मीटर और स्टिल्ट पार्किंग के साथ 17.5 मीटर तक ऊंचाई रखी जा सकती है। 100 से 750 वर्गमीटर के प्लॉट में स्टिल्ट पार्किंग का प्रावधान है। बड़े प्लॉट के साथ सेटबैक भी बढ़ेंगे। वहीं 10,000 वर्गमीटर से बड़े प्लॉट में फ्रंट सेटबैक 15 मीटर, रियर 9 मीटर और दोनों तरफ 9-9 मीटर तक रखने का प्रावधान है।
47 गांवों में कम घनत्व वाला विकास
ग्रामीण दिल्ली के लिए मास्टर प्लान में अलग रणनीति अपनाई गई है। पेरिफेरल गांवों और लो डेंसिटी रेजिडेंशियल क्षेत्रों में नियंत्रित घनत्व के साथ विकास की अवधारणा रखी गई है। कृषि और पारिस्थितिक संपत्तियों को बचाने के साथ सड़क, पानी, सीवर, ड्रेनेज और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर है। ग्रामीण उद्यम और स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाने की भी योजना है।