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Master Plan 2047: भूकंप आने पर दिल्ली को बचाने की तैयारी, आपदा में एक्शन का खाका पूरा; अब करना है जमीनी काम

Thu, 20 Aug 2026 06:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा संतोष कुमार, नई दिल्ली
संतोष कुमार, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 20 Aug 2026 06:43 AM IST
सार

स्टर प्लान-2047 में राजधानी की इमारतों के सुरक्षा ऑडिट के साथ कमजोर मकानों की रेट्रोफिटिंग करनी होगी। वहीं, घनी आबादी वाले इलाकों में सेफ जोन बनाए जाएंगे। इसमें खास जोर भीड़भाड़ वाले इलाकों पर है।

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Master Plan 2047: Preparations to safeguard Delhi in the event of an earthquake
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद

विस्तार

भूकंप के लिहाज से संवेदनशील दिल्ली में आपदा से पहले की तैयारियों का खाका तैयार है। मास्टर प्लान-2047 में राजधानी की इमारतों के सुरक्षा ऑडिट के साथ कमजोर मकानों की रेट्रोफिटिंग करनी होगी। वहीं, घनी आबादी वाले इलाकों में सेफ जोन बनाए जाएंगे। इसमें खास जोर भीड़भाड़ वाले इलाकों पर है। यहां बने अस्पतालों, अग्निशमन केंद्रों, पुलिस परिसरों, इंटीग्रेटेड कंट्रोल सेंटर समेत दूसरे अहम बुनियादी ढांचे का ऑडिट प्राथमिकता से कराया जाना है।

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मास्टर प्लान के मुताबिक, दिल्ली में बनने वाली इमारतों के डिजाइन में भूकंपरोधी मानकों का पालन करना होगा।

इसके बगैर इमारत के डिजाइन का नक्शा मंजूर नहीं होगा। वहीं, मौजूदा कमजोर इमारतों को सुरक्षित बनाने के लिए रेट्रोफिटिंग या जरूरत पड़ने पर पुनर्निर्माण का विकल्प अपनाया जाएगा। दूसरी तरफ सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी भूकंप के झटकों से सुरक्षित रखने की तैयारी है। परिवहन, जलापूर्ति और ईंधन जैसी आवश्यक सेवाओं में बेस आइसोलेशन, हाइड्रोलिक डैम्पनर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि भूकंप के बाद भी जरूरी सेवाएं जल्द बहाल की जा सकें।
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अस्पतालों व ऊंची इमारतों पर एयर एंबुलेंस के लिए हेलीपैड
सभी सेवा प्रदाता एजेंसियों को अपनी आपातकालीन प्रतिक्रिया योजना तैयार करनी होगी। बड़े अस्पतालों और ऊंची इमारतों की छतों पर एयर एंबुलेंस के लिए हेलीपैड विकसित करने का भी प्रावधान किया गया है। इससे आपदा के दौरान बिजली, पानी, स्वास्थ्य, पुलिस, अग्निशमन और अन्य जरूरी सेवाओं पर कम से कम असर पड़े। दिल्ली आपदा प्रबंधन योजना और जिला आपदा प्रबंधन योजनाओं में विभिन्न प्राकृतिक और मानवजनित आपदाओं से निपटने के लिए एजेंसियों की जिम्मेदारियां और समय सीमा तय की गई हैं। क्षेत्रीय योजनाओं, लेआउट प्लान और नए निर्माण में भी इन प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
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भूकंप के लिहाज से दिल्ली संवदेनशील
राजधानी भूकंपीय जोन-4 में आती है। भूकंप की मथुरा, सोहना तथा दिल्ली-मुरादाबाद फॉल्ट लाइन दिल्ली में मौजूद हैं। ऐसे में बड़े भूकंप की स्थिति में जानमाल के नुकसान को कम करने के लिए भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा जांच, कमजोर इमारतों की रेट्रोफिटिंग और घनी आबादी वाले इलाकों में सुरक्षित निकासी स्थल विकसित करने की योजना बनाई गई है।

पार्क बनेंगे लोगों की पहली सुरक्षित जगह
घनी आबादी वाले इलाकों में आपदा के समय लोगों को सुरक्षित निकालना बड़ी चुनौती होती है। इसे देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों में **खुले स्थानों की निकासी स्थल के रूप में पहचान की जाएगी। पार्क, बहुउद्देश्यीय मैदान और अन्य खुले स्थान भूकंप या आग जैसी आपदा के समय लोगों के एकत्र होने के लिए इस्तेमाल किए जा सकेंगे।

औद्योगिक इलाकों में भी विशेष सुरक्षा इंतजाम
औद्योगिक क्षेत्रों में भी आपदा सुरक्षा को अनिवार्य किया गया है। न्यूनतम 30 मीटर चौड़ी सड़क पर ही नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित होंगे। इसकी परिधीय सड़कों के किनारे कम से कम 10 मीटर का ग्रीन बफर रखना होगा। आग, विस्फोट, गैस रिसाव, भूकंप और बाढ़ जैसी आपदाओं से निपटने के लिए विशेष सुरक्षा इंतजाम करने होंगे। मास्टर प्लान बताता है कि पूरी कवायद का मकसद आपदा आने का इंतजार करने के बजाय दिल्ली को आपदा से पहले ही तैयार और सुरक्षित बनाना है।


दिल्ली-2047 का खाका, आज जारी होगी अधिसूचना
दिल्ली के अगले दो दशकों के सुनियोजित विकास का आधार मास्टर प्लान-2047 बृहस्पतिवार को अधिसूचित होगा। केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर इसकी विस्तृत जानकारी देंगे। डीडीए बोर्ड से मंजूरी के बाद यमुना फ्लड प्लेन और लैंड पूलिंग नीति में संशोधन किए गए हैं। योजना में बढ़ती आबादी के लिए आवास, रोजगार और परिवहन सुविधाओं के विस्तार के साथ पानी, सीवर, बिजली और कचरा प्रबंधन पर जोर है। सार्वजनिक परिवहन, पैदल और साइकिल मार्गों को बढ़ावा देने तथा यमुना और हरित क्षेत्रों के संरक्षण के प्रावधान हैं। अनधिकृत कॉलोनियों, झुग्गियों और कमजोर वर्गों की आवास जरूरतों को भी योजना में शामिल किया गया है।

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