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पहाड़ों पर कुदरत का कहर: उत्तराखंड में 91 सड़कें बंद, कश्मीर में क्लाउडबर्स्ट; हिमाचल में भारी बारिश का अलर्ट

Sun, 12 Jul 2026 06:16 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरानू/जम्मू/शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरानू/जम्मू/शिमला Published by: विकास कुमार Updated Sun, 12 Jul 2026 06:16 PM IST
सार

मौसम विभाग और तीनों राज्यों के स्थानीय प्रशासनों ने भारी बारिश वाले क्षेत्रों में स्थानीय भूस्खलन, जलभराव, फिसलन भरी सड़कों और कम दृश्यता के प्रति आगाह किया है।

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Monsoon 91 roads closed in Uttarakhand cloudburst in Kashmir heavy rain alert for Himachal
पहाड़ों पर बारिश से बिगड़े हालात - फोटो : अमर उजाला/AI

विस्तार

उत्तर भारत के पहाड़ी राज्य इस समय मानसून और प्राकृतिक आपदाओं की दोहरी मार झेल रहे हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर (घाटी) में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। नदियां उफान पर हैं, मुख्य हाईवे से लेकर सैकड़ों लिंक रोड बंद हैं और लोग लगातार मलबे व भूस्खलन के डर के साये में जीने को मजबूर हैं। बिगड़ते हालातों को देखते हुए मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

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1. कश्मीर: अनंतनाग और पहलगाम में बादल फटने से तबाही, प्रशासन हाई अलर्ट पर
दक्षिण कश्मीर में प्रकृति का रौद्र रूप देखने को मिला है, जहां दो अलग-अलग प्रसिद्ध इलाकों में अचानक बादल फटने से नदी-नालों में भयंकर सैलाब आ गया।

अचानक आई बाढ़
पहली घटना अनंतनाग जिले के चित्रगुल के ऊपरी पर्वतीय इलाकों में हुई, जिससे 'नाला आरपत चित्रगुल शांगस' में अचानक बाढ़ आ गई। इसके तुरंत बाद पर्यटन स्थल पहलगाम के 'नाला आवूरा' में भी बादल फटा, जिससे पानी का स्तर डरावनी तेजी से बढ़ गया।

होटल और पर्यटकों में अफरातफरी
मटमैले पानी के तेज बहाव को देखकर निचले इलाकों और तटों पर कुछ समय के लिए घबराहट का माहौल बन गया। गनीमत रही कि पहलगाम तट पर स्थित प्रमुख होटलों में ठहरे देश-विदेश के सभी पर्यटक सुरक्षित हैं।

प्रशासनिक मुस्तैदी
आपदा प्रबंधन, पुलिस और राजस्व विभागों को पूरी तरह सतर्क मोड पर रखा गया है। संवेदनशील और निचले इलाकों में बचाव और निगरानी टीमें तैनात कर दी गई हैं।

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2. उत्तराखंड: 91 सड़कें बंद, 11 बांध और बैराजों में पानी खतरे के निशान के पास
उत्तराखंड में भूस्खलन के कारण संपर्क मार्ग पूरी तरह टूट चुके हैं। राज्य में एक राष्ट्रीय राजमार्ग और दो स्टेट हाईवे समेत कुल 91 मुख्य मार्ग बंद हैं, जिससे आवाजाही ठप हो गई है।

सबसे प्रभावित जिले
लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) सड़कों को खोलने की कोशिश में जुटा है, लेकिन लगातार गिरते मलबे से बाधा आ रही है। सबसे बदतर हालात पौड़ी गढ़वाल (21 मार्ग बंद) और चमोली (19 मार्ग बंद) में हैं। इसके अलावा टिहरी में 17 और पिथौरागढ़ में 10 सड़कें बंद हैं।

नदियों का बढ़ता जलस्तर
राज्य के 11 बांध और बैराजों में जल स्तर खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंच गया है। उत्तरकाशी में भागीरथी नदी, कोटेश्वर-रुद्रप्रयाग में अलकनंदा (बदरीनाथ के पास) का जलस्तर तेजी से बढ़ा, हालांकि बाद में इसमें मामूली कमी दर्ज की गई है। ऋषिकेश और हरिद्वार में गंगा का जलस्तर फिलहाल घट रहा है, लेकिन खतरा टला नहीं है।

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3. हिमाचल प्रदेश: अगले पांच दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी
हिमाचल प्रदेश में भी मानसून की सक्रियता चरम पर है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में राहत की उम्मीद नहीं है।

12 से 16 जुलाई का पूर्वानुमान
मौसम विभाग ने 12 से 16 जुलाई तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश और मंडी, कुल्लू, कांगड़ा व चंबा जैसे जिलों में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

बिजली गिरने और अंधड़ का अलर्ट
विशेष रूप से गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 30 से 40 किमी/घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। किन्नौर और लाहौल-स्पीति जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी अलर्ट है।

बीते 24 घंटे का हाल
राज्य के जोगिंद्रनगर में सर्वाधिक 6 सेमी, मनाली में 5 सेमी और सराहन में 4 सेमी बारिश दर्ज की गई है। सुंदरनगर में अधिकतम तापमान 33 डिग्री तो कुकुमसेरी में न्यूनतम तापमान 10.1 डिग्री सेल्सियस रहा।

प्रशासन की अपील, अनावश्यक यात्रा से बचें
मौसम विभाग और तीनों राज्यों के स्थानीय प्रशासनों ने भारी बारिश वाले क्षेत्रों में स्थानीय भूस्खलन, जलभराव, फिसलन भरी सड़कों और कम दृश्यता के प्रति आगाह किया है।

-आम जनता और पर्यटकों से सख्त अपील की गई है कि वे नदी-नालों और संवेदनशील पहाड़ी ढलानों से दूर रहें। 
-बहुत जरूरी न होने पर पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा से बचें।
-किसी भी आपात स्थिति से बचने के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

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