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Delhi NCR News: यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध डेयरियों पर एनजीटी सख्त, छह सप्ताह में कार्रवाई रिपोर्ट तलब
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निरीक्षण में मिले अस्थायी पशु आश्रय, गोबर के ढेर और 50-60 गोवंश; 25 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध डेयरियों और अतिक्रमण के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उसके पूर्व आदेशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं हुआ है। अधिकरण ने संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हुए एमसीडी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) से छह सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
सुनवाई के दौरान डीपीसीसी ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में बताया कि निरीक्षण के समय कोई स्थायी डेयरी नहीं मिली, लेकिन कई स्थानों पर अस्थायी पशु आश्रय, चारा, गोबर के ढेर और करीब 50 से 60 गोवंश खुले में चरते मिले। मयूर नेचर पार्क, डीएनडी फ्लाईवे के नीचे और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के निकट भी अस्थायी पशु आश्रय पाए गए।
एनजीटी ने कहा कि निरीक्षण से स्पष्ट है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध पशुपालन और अतिक्रमण अब भी जारी है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अधिकरण को बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन हटाए जाने के बाद लोग दोबारा उसी स्थान या फ्लाईओवर के नीचे पशु रखने लगते हैं।
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डीडीए ने कहा कि ऐसे पशुओं को जब्त करने की जिम्मेदारी एमसीडी के पशुपालन विभाग की है। अधिकरण ने निर्देश दिया कि यदि डेयरी संचालन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मानकों का उल्लंघन करता है तो डीपीसीसी संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करे और आवश्यकता होने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी लगाए। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध डेयरियों और अतिक्रमण के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उसके पूर्व आदेशों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं हुआ है। अधिकरण ने संबंधित विभागों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हुए एमसीडी और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) से छह सप्ताह के भीतर अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
सुनवाई के दौरान डीपीसीसी ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में बताया कि निरीक्षण के समय कोई स्थायी डेयरी नहीं मिली, लेकिन कई स्थानों पर अस्थायी पशु आश्रय, चारा, गोबर के ढेर और करीब 50 से 60 गोवंश खुले में चरते मिले। मयूर नेचर पार्क, डीएनडी फ्लाईवे के नीचे और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी के निकट भी अस्थायी पशु आश्रय पाए गए।
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एनजीटी ने कहा कि निरीक्षण से स्पष्ट है कि यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध पशुपालन और अतिक्रमण अब भी जारी है। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने अधिकरण को बताया कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नियमित रूप से की जा रही है, लेकिन हटाए जाने के बाद लोग दोबारा उसी स्थान या फ्लाईओवर के नीचे पशु रखने लगते हैं।
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डीडीए ने कहा कि ऐसे पशुओं को जब्त करने की जिम्मेदारी एमसीडी के पशुपालन विभाग की है। अधिकरण ने निर्देश दिया कि यदि डेयरी संचालन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के मानकों का उल्लंघन करता है तो डीपीसीसी संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करे और आवश्यकता होने पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी लगाए। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।