{"_id":"69f75b84b4d3c37164038c73","slug":"33-of-children-in-private-and-18-of-children-in-government-schools-did-not-have-apaar-ids-grnoida-news-c-23-1-lko1064-93876-2026-05-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"Noida News: निजी में 33 व सरकारी स्कूलों में 18 प्रतिशत बच्चों की नहीं बनी अपार आईडी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Noida News: निजी में 33 व सरकारी स्कूलों में 18 प्रतिशत बच्चों की नहीं बनी अपार आईडी
विज्ञापन
विज्ञापन
- जनपद के 1,200 से अधिक स्कूलों में सात लाख छात्र हैं नामांकित
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। कोई भी बच्चा पढ़ाई के सिस्टम से बाहर न रहे। इसके लिए हर बच्चे की यूनिक अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट) आईडी बनाई जा रही है। जनपद के 1,200 स्कूलों में पढ़ने वाले सात लाख बच्चों की आईडी बनने का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। नोएडा व ग्रेटर नोएडा के निजी स्कूलों के 33 प्रतिशत और सरकारी स्कूलों के 18 प्रतिशत बच्चों की अपार अभी तक नहीं बनी है। इस आईडी के माध्यम से बच्चों की पूरी शैक्षणिक जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होनी है। जिससे हर छात्र को एक यूनिक आईडी दी जा सके। इसके माध्यम से छात्र की पढ़ाई, उपस्थिति और प्रगति पर सीधी नजर रखी जाती है।
इसके माध्यम से न तो किसी बच्चे का रिकॉर्ड खोएगा और न ही कोई छात्र व्यवस्था से बाहर रह पाएगा। यह व्यवस्था सरकारी विद्यालयों के साथ-साथ सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी लागू की गई है। हर जनपद में अपार आईडी बनाने की प्रगति काफी तेज है, लेकिन गौतमबुद्ध नगर में निजी स्कूल आईडी बनाने में रुचि नहीं दिखा रहे है। इसका असर छात्रों की शैक्षणिक जानकारी नहीं होने पर पड़ रहा है। इस प्रणाली से ड्रॉपआउट और फर्जी नामांकन की पहचान आसान होती है, वहीं सरकार को रियल-टाइम डेटा के आधार पर प्रभावी मॉनिटरिंग और नीति निर्माण में सहायता मिलती है।
छात्रों का डेटा प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित
अपार व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जाती है, जिसके माध्यम से उसकी नामांकन, उपस्थिति, कक्षा प्रगति, परीक्षा परिणाम और उपलब्धियों सहित पूरी शैक्षणिक प्रोफाइल एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रूप से दर्ज हो जाती है। आधार से लिंक होने के कारण यह आईडी छात्र की पहचान को प्रमाणित करती है और स्कूल परिवर्तन की स्थिति में उसका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड अपने आप स्थानांतरित हो जाता है, जिससे डेटा की निरंतरता बनी रहती है।
आधार कार्ड में गलत डेटा के कारण हो रही समस्या
कई छात्रों के विद्यालय के अभिलेख में माता-पिता दोनों के नाम और उनके आधार कार्ड के नाम में अंतर होने के कारण अपार आईडी जेनरेट नहीं हो पा रही है। दूसरे विद्यालय से आए गए छात्रों की डिटेल आधार की डिटेल से अलग है, ऐसी स्थिति में अपार आईडी जेनरेट नहीं हो रही है। वहीं विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों और विद्यालय के यू डायस पर प्रदर्शित हो रहे हैं। उन विद्यालयों के प्रधानाचार्य के द्वारा उन्हें ड्रॉप आउट बॉक्स में न डालने के कारण उनका इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में उन छात्रों की अपार आईडी जेनरेट कर पाना शिक्षकों के स्तर से संभव नहीं हो पा रहा है।
निजी स्कूलों के प्रबंधकों को कार्यालय में बुलाकर अपार आईडी बनवाने के लिए कहा गया है। वहीं सरकारी स्कूलों में भी तेजी से सुधार हुआ है। -राहुल पंवार, बीएसए
Trending Videos
अंकुर त्रिपाठी
ग्रेटर नोएडा। कोई भी बच्चा पढ़ाई के सिस्टम से बाहर न रहे। इसके लिए हर बच्चे की यूनिक अपार (ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट) आईडी बनाई जा रही है। जनपद के 1,200 स्कूलों में पढ़ने वाले सात लाख बच्चों की आईडी बनने का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। नोएडा व ग्रेटर नोएडा के निजी स्कूलों के 33 प्रतिशत और सरकारी स्कूलों के 18 प्रतिशत बच्चों की अपार अभी तक नहीं बनी है। इस आईडी के माध्यम से बच्चों की पूरी शैक्षणिक जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होनी है। जिससे हर छात्र को एक यूनिक आईडी दी जा सके। इसके माध्यम से छात्र की पढ़ाई, उपस्थिति और प्रगति पर सीधी नजर रखी जाती है।
इसके माध्यम से न तो किसी बच्चे का रिकॉर्ड खोएगा और न ही कोई छात्र व्यवस्था से बाहर रह पाएगा। यह व्यवस्था सरकारी विद्यालयों के साथ-साथ सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी लागू की गई है। हर जनपद में अपार आईडी बनाने की प्रगति काफी तेज है, लेकिन गौतमबुद्ध नगर में निजी स्कूल आईडी बनाने में रुचि नहीं दिखा रहे है। इसका असर छात्रों की शैक्षणिक जानकारी नहीं होने पर पड़ रहा है। इस प्रणाली से ड्रॉपआउट और फर्जी नामांकन की पहचान आसान होती है, वहीं सरकार को रियल-टाइम डेटा के आधार पर प्रभावी मॉनिटरिंग और नीति निर्माण में सहायता मिलती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
छात्रों का डेटा प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित
अपार व्यवस्था के अंतर्गत प्रत्येक छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जाती है, जिसके माध्यम से उसकी नामांकन, उपस्थिति, कक्षा प्रगति, परीक्षा परिणाम और उपलब्धियों सहित पूरी शैक्षणिक प्रोफाइल एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रूप से दर्ज हो जाती है। आधार से लिंक होने के कारण यह आईडी छात्र की पहचान को प्रमाणित करती है और स्कूल परिवर्तन की स्थिति में उसका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड अपने आप स्थानांतरित हो जाता है, जिससे डेटा की निरंतरता बनी रहती है।
आधार कार्ड में गलत डेटा के कारण हो रही समस्या
कई छात्रों के विद्यालय के अभिलेख में माता-पिता दोनों के नाम और उनके आधार कार्ड के नाम में अंतर होने के कारण अपार आईडी जेनरेट नहीं हो पा रही है। दूसरे विद्यालय से आए गए छात्रों की डिटेल आधार की डिटेल से अलग है, ऐसी स्थिति में अपार आईडी जेनरेट नहीं हो रही है। वहीं विद्यालय में पढ़ रहे छात्रों और विद्यालय के यू डायस पर प्रदर्शित हो रहे हैं। उन विद्यालयों के प्रधानाचार्य के द्वारा उन्हें ड्रॉप आउट बॉक्स में न डालने के कारण उनका इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में उन छात्रों की अपार आईडी जेनरेट कर पाना शिक्षकों के स्तर से संभव नहीं हो पा रहा है।
निजी स्कूलों के प्रबंधकों को कार्यालय में बुलाकर अपार आईडी बनवाने के लिए कहा गया है। वहीं सरकारी स्कूलों में भी तेजी से सुधार हुआ है। -राहुल पंवार, बीएसए
