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Noida News: डिग्री से आगे, उम्मीदों को मिली नई उड़ान
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- 26 तरह की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे 24,899 विद्यार्थियों ने एनआईओएस से पूरी की 10वीं-12वीं की पढ़ाई
नेहा शर्मा
नोएडा। किसी के चेहरे पर एसिड अटैक के निशान हैं, कोई ऑटिज्म या सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहा है, तो कोई थैलेसीमिया, हीमोफीलिया या अन्य गंभीर बीमारियों के साथ जीवन की कठिन राह तय कर रहा है। लेकिन इन चुनौतियों के बीच भी हजारों विद्यार्थियों ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) ऐसे छात्रों के लिए शिक्षा का सहारा बनकर सामने आया है, जिसने उन्हें डिग्री ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और नई जिंदगी की उम्मीद भी दी। वर्ष 2021 से 2025 के बीच 26 प्रकार की गंभीर बीमारियों और विशेष आवश्यकताओं वाले 24,899 विद्यार्थियों ने एनआईओएस के माध्यम से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। नियमित विद्यालयों में पढ़ाई करने में असमर्थ इन छात्रों के लिए लचीली शिक्षा प्रणाली ने नई राह खोली।
सफलता की इस यात्रा का हिस्सा बने-
संस्थान के अनुसार इस अवधि में 11 एसिड अटैक पीड़ित, 1,838 ऑटिज्म से प्रभावित, 895 सेरेब्रल पाल्सी, 4,440 श्रवण बाधित, 3,872 बौद्धिक दिव्यांग, 4,066 लर्निंग डिसेबिलिटी, 2,637 लोकोमोटर डिसेबिलिटी, 1,318 दृष्टिबाधित और 1,254 लो विजन वाले विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके अलावा 42 थैलेसीमिया, 61 सिकल सेल, 29 हीमोफीलिया, 244 मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और 30 मल्टीपल स्केलेरोसिस से पीड़ित छात्र भी सफलता की इस यात्रा का हिस्सा बने।
किताबों ने दिया दर्द से लड़ने का हौसला-
सेक्टर-62 निवासी दिव्या तिवारी ने बताया कि हीमोफीलिया के कारण नियमित स्कूल जाना उनके लिए मुश्किल था। छोटी-सी चोट भी गंभीर समस्या बन सकती थी। ऐसे में उन्होंने एनआईओएस से 10वीं की पढ़ाई पूरी की और अब आगे की पढ़ाई भी इसी माध्यम से जारी रखे हुए हैं।
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एनआईओएस के अधिकारियों का कहना है कि कई छात्रों के लिए परीक्षा केवल शैक्षणिक मूल्यांकन नहीं, बल्कि बीमारी और परिस्थितियों से लड़ने का एक और पड़ाव होती है। इलाज, अस्पताल और दवाइयों के बीच भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखकर यह साबित किया कि मजबूत इरादों के सामने कठिनाइयां छोटी पड़ जाती हैं।
हर साल बढ़ा भरोसा-
* 2021 : 4,245
* 2022 : 4,426
* 2023 : 5,214
* 2024 : 4,600
* 2025 : 6,414
वर्जन-
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान केवल शिक्षा उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि प्रत्येक शिक्षार्थी को उसकी परिस्थितियों और क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर भी देता है। समावेशी शिक्षा के माध्यम से विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक भविष्य की दिशा में सशक्त बनाया जा रहा है। -प्रो. अखिलेश मिश्र, अध्यक्ष, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान
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नेहा शर्मा
नोएडा। किसी के चेहरे पर एसिड अटैक के निशान हैं, कोई ऑटिज्म या सेरेब्रल पाल्सी से जूझ रहा है, तो कोई थैलेसीमिया, हीमोफीलिया या अन्य गंभीर बीमारियों के साथ जीवन की कठिन राह तय कर रहा है। लेकिन इन चुनौतियों के बीच भी हजारों विद्यार्थियों ने अपने सपनों को टूटने नहीं दिया। राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) ऐसे छात्रों के लिए शिक्षा का सहारा बनकर सामने आया है, जिसने उन्हें डिग्री ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और नई जिंदगी की उम्मीद भी दी। वर्ष 2021 से 2025 के बीच 26 प्रकार की गंभीर बीमारियों और विशेष आवश्यकताओं वाले 24,899 विद्यार्थियों ने एनआईओएस के माध्यम से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी की। नियमित विद्यालयों में पढ़ाई करने में असमर्थ इन छात्रों के लिए लचीली शिक्षा प्रणाली ने नई राह खोली।
सफलता की इस यात्रा का हिस्सा बने-
संस्थान के अनुसार इस अवधि में 11 एसिड अटैक पीड़ित, 1,838 ऑटिज्म से प्रभावित, 895 सेरेब्रल पाल्सी, 4,440 श्रवण बाधित, 3,872 बौद्धिक दिव्यांग, 4,066 लर्निंग डिसेबिलिटी, 2,637 लोकोमोटर डिसेबिलिटी, 1,318 दृष्टिबाधित और 1,254 लो विजन वाले विद्यार्थियों ने अपनी पढ़ाई पूरी की। इसके अलावा 42 थैलेसीमिया, 61 सिकल सेल, 29 हीमोफीलिया, 244 मस्कुलर डिस्ट्रॉफी और 30 मल्टीपल स्केलेरोसिस से पीड़ित छात्र भी सफलता की इस यात्रा का हिस्सा बने।
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किताबों ने दिया दर्द से लड़ने का हौसला-
सेक्टर-62 निवासी दिव्या तिवारी ने बताया कि हीमोफीलिया के कारण नियमित स्कूल जाना उनके लिए मुश्किल था। छोटी-सी चोट भी गंभीर समस्या बन सकती थी। ऐसे में उन्होंने एनआईओएस से 10वीं की पढ़ाई पूरी की और अब आगे की पढ़ाई भी इसी माध्यम से जारी रखे हुए हैं।
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एनआईओएस के अधिकारियों का कहना है कि कई छात्रों के लिए परीक्षा केवल शैक्षणिक मूल्यांकन नहीं, बल्कि बीमारी और परिस्थितियों से लड़ने का एक और पड़ाव होती है। इलाज, अस्पताल और दवाइयों के बीच भी उन्होंने पढ़ाई जारी रखकर यह साबित किया कि मजबूत इरादों के सामने कठिनाइयां छोटी पड़ जाती हैं।
हर साल बढ़ा भरोसा-
* 2021 : 4,245
* 2022 : 4,426
* 2023 : 5,214
* 2024 : 4,600
* 2025 : 6,414
वर्जन-
राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान केवल शिक्षा उपलब्ध नहीं कराता, बल्कि प्रत्येक शिक्षार्थी को उसकी परिस्थितियों और क्षमताओं के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर भी देता है। समावेशी शिक्षा के माध्यम से विशेष आवश्यकताओं वाले विद्यार्थियों को आत्मनिर्भर और सम्मानजनक भविष्य की दिशा में सशक्त बनाया जा रहा है। -प्रो. अखिलेश मिश्र, अध्यक्ष, राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान