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Noida News: यमुना एक्सप्रेसवे के छोटे टोल पर फास्टैग सुविधा नहीं, आमजन हो रहे परेशान
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यमुना एक्सप्रेस वे के छोटे टोल पर फास्टैग के बजाय कैश और यूपीआई के जरिए वसूले जा रहे हैं रुपये
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-टोल कर्मी यात्रियों से लेते हैं नकद या ऑनलाइन भुगतान
-फास्टैग रीचार्ज होने के बाद भी राहगीरों को उठानी पड़ रही है परेशानी
पुनीत कुमार
यमुना सिटी। सरकार एक ओर डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा दे रही है और विभिन्न सेवाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। परिवहन व्यवस्था में भी डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फास्टैग व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन यमुना एक्सप्रेसवे से जेवर क्षेत्र के फलैदा कट पर यात्रियों को अभी इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे से फलैदा कट पर उतरने के लिए बने टोल बूथ पर फास्टैग से टोल शुल्क वसूलने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। फास्टैग का उद्देश्य वाहनों को बिना रुके तेज और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना था, लेकिन इस टोल बूथ पर भुगतान प्रक्रिया में समय लगने से कई बार वाहनों की कतार भी बनने लगती है।
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- फलैदा कट टोल पर स्थायी निर्माण नहीं
फलैदा कट स्थित टोल बूथ का अभी तक स्थायी रूप से निर्माण नहीं किया गया है। यहां केवल अस्थायी व्यवस्था के तहत टीन लगाकर टोल संचालन किया जा रहा है, जबकि यह मार्ग लगातार उपयोग में रहता है और यहां वाहनों की आवाजाही भी बनी रहती है। इसके साथ ही अन्य टोल प्लाजा पर शुल्क जमा होने या फास्टैग से भुगतान होने के बाद बैरियर अपने आप खुल जाता है, जिससे वाहन बिना अधिक समय लिए आगे निकल जाते हैं। लेकिन इस टोल बूथ पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण टोल कर्मियों को मैनुअल तरीके से बैरिकेड हटाकर और वापस लगाकर वाहनों की आवाजाही करानी पड़ती है, जिससे कई बार वाहनों की कतार लग जाती है और यात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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-नकद या यूपीआई न हो तो आगे नहीं जाने देते टोल कर्मी
कई वाहन चालक टोल भुगतान के लिए पूरी तरह फास्टैग पर निर्भर रहते हैं और अपने साथ नकदी भी नहीं रखते। ऐसे में यदि किसी के पास मौके पर न तो नकद राशि हो और न ही यूपीआई से भुगतान करने की व्यवस्था हो, तो टोल कर्मी वाहन को आगे नहीं जाने देते। ऐसी स्थिति में उन्हें सलाह दी जाती है कि वे आगे स्थित जेवर टोल तक जाएं, वहां फास्टैग के माध्यम से भुगतान करें और फिर एक्सप्रेसवे से उतरकर नीचे वाले मार्ग से वापस अपने गंतव्य तक पहुंचें। इससे यात्रियों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। वहीं बाहर के क्षेत्रों से आने वाले चालकों के लिए वैकल्पिक मार्ग की जानकारी न होने पर भटकने की स्थिति भी बन सकती है, जिससे यात्रा और अधिक असुविधाजनक हो जाती है।
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-फलैदा कट के आसपास स्थित क्षेत्रों में सरकार की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें मेडिकल डिवाइस पार्क, फिल्म सिटी समेत अन्य औद्योगिक परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरी तरह शुरू होने के बाद यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी, अधिकारी और अन्य लोग रोजाना आवागमन करेंगे। ऐसे में जो लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करेंगे, उन्हें रोजाना टोल शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा, जिससे उनके मासिक खर्च पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
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कोट
जल्दी ही यहां फास्टैग की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए बैंक से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही है, जिससे सीधा भुगतान हो सके। बैंक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फास्टैग से सीधा भुगतान की व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
-जेके शर्मा, टोल प्रबंधक, यमुना एक्सप्रेस-वे
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-टोल कर्मी यात्रियों से लेते हैं नकद या ऑनलाइन भुगतान
-फास्टैग रीचार्ज होने के बाद भी राहगीरों को उठानी पड़ रही है परेशानी
पुनीत कुमार
यमुना सिटी। सरकार एक ओर डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा दे रही है और विभिन्न सेवाओं को डिजिटल माध्यम से संचालित किया जा रहा है। परिवहन व्यवस्था में भी डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फास्टैग व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन यमुना एक्सप्रेसवे से जेवर क्षेत्र के फलैदा कट पर यात्रियों को अभी इस सुविधा का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यमुना एक्सप्रेसवे से फलैदा कट पर उतरने के लिए बने टोल बूथ पर फास्टैग से टोल शुल्क वसूलने की सुविधा उपलब्ध नहीं है। फास्टैग का उद्देश्य वाहनों को बिना रुके तेज और सुविधाजनक आवागमन उपलब्ध कराना था, लेकिन इस टोल बूथ पर भुगतान प्रक्रिया में समय लगने से कई बार वाहनों की कतार भी बनने लगती है।
- फलैदा कट टोल पर स्थायी निर्माण नहीं
फलैदा कट स्थित टोल बूथ का अभी तक स्थायी रूप से निर्माण नहीं किया गया है। यहां केवल अस्थायी व्यवस्था के तहत टीन लगाकर टोल संचालन किया जा रहा है, जबकि यह मार्ग लगातार उपयोग में रहता है और यहां वाहनों की आवाजाही भी बनी रहती है। इसके साथ ही अन्य टोल प्लाजा पर शुल्क जमा होने या फास्टैग से भुगतान होने के बाद बैरियर अपने आप खुल जाता है, जिससे वाहन बिना अधिक समय लिए आगे निकल जाते हैं। लेकिन इस टोल बूथ पर ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण टोल कर्मियों को मैनुअल तरीके से बैरिकेड हटाकर और वापस लगाकर वाहनों की आवाजाही करानी पड़ती है, जिससे कई बार वाहनों की कतार लग जाती है और यात्रियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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-नकद या यूपीआई न हो तो आगे नहीं जाने देते टोल कर्मी
कई वाहन चालक टोल भुगतान के लिए पूरी तरह फास्टैग पर निर्भर रहते हैं और अपने साथ नकदी भी नहीं रखते। ऐसे में यदि किसी के पास मौके पर न तो नकद राशि हो और न ही यूपीआई से भुगतान करने की व्यवस्था हो, तो टोल कर्मी वाहन को आगे नहीं जाने देते। ऐसी स्थिति में उन्हें सलाह दी जाती है कि वे आगे स्थित जेवर टोल तक जाएं, वहां फास्टैग के माध्यम से भुगतान करें और फिर एक्सप्रेसवे से उतरकर नीचे वाले मार्ग से वापस अपने गंतव्य तक पहुंचें। इससे यात्रियों को कई किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ता है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी होती है। वहीं बाहर के क्षेत्रों से आने वाले चालकों के लिए वैकल्पिक मार्ग की जानकारी न होने पर भटकने की स्थिति भी बन सकती है, जिससे यात्रा और अधिक असुविधाजनक हो जाती है।
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-फलैदा कट के आसपास स्थित क्षेत्रों में सरकार की कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं विकसित की जा रही हैं, जिनमें मेडिकल डिवाइस पार्क, फिल्म सिटी समेत अन्य औद्योगिक परियोजनाएं शामिल हैं। इन परियोजनाओं के पूरी तरह शुरू होने के बाद यहां बड़ी संख्या में कर्मचारी, अधिकारी और अन्य लोग रोजाना आवागमन करेंगे। ऐसे में जो लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करेंगे, उन्हें रोजाना टोल शुल्क का भुगतान करना पड़ेगा, जिससे उनके मासिक खर्च पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
कोट
जल्दी ही यहां फास्टैग की सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। इसके लिए बैंक से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी की जा रही है, जिससे सीधा भुगतान हो सके। बैंक की प्रक्रिया पूरी होने के बाद फास्टैग से सीधा भुगतान की व्यवस्था शुरू हो जाएगी।
-जेके शर्मा, टोल प्रबंधक, यमुना एक्सप्रेस-वे