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डायबिटीज दवाओं पर कार्रवाई में देरी: दिल्ली हाईकोर्ट का सीडीएससीओ को नोटिस, चार हफ्ते में मांगा जवाब
नई दिल्ली, आईएएनएस
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Tue, 17 Mar 2026 09:45 PM IST
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सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने सीडीएससीओ के खिलाफ अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया है। अदालत ने डायबिटीज दवाओं के वजन घटाने में उपयोग पर पहले दिए आदेश के पालन न होने पर डीसीजीआई और स्वास्थ्य सचिव से चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
दिल्ली हाईकोर्ट, Delhi High Court
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अवमानना याचिका पर नोटिस जारी किया है। यह याचिका सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (सीडीएससीओ) के खिलाफ दायर की गई है। आरोप है कि सीडीएससीओ ने अदालत के पहले दिए गए आदेश का पालन नहीं किया। यह आदेश वजन घटाने के लिए कुछ डायबिटीज दवाओं के उपयोग से जुड़े सुरक्षा और नियामकीय मुद्दों की जांच से संबंधित था।
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न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की एकल पीठ ने ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) और केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुन्या सलीला श्रीवास्तव से जवाब मांगा है। उन्हें चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का समय दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 21 मई को सूचीबद्ध की गई है। अधिवक्ता रोहित कुमार के माध्यम से यह अवमानना याचिका दायर की गई है।
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याचिका में आरोप है कि संबंधित प्राधिकरणों ने दिल्ली हाईकोर्ट के जुलाई 2025 के उस आदेश का पालन नहीं किया। उस आदेश में जीएलपी-1 रिसेप्टर एगोनिस्ट दवाओं के वजन प्रबंधन और सौंदर्य उपचार में उपयोग को लेकर उठाए गए नियामकीय मुद्दों पर निर्णय लेने का निर्देश था। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र उपाध्याय और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने पहले याचिकाकर्ता को प्रासंगिक सामग्री के साथ पूरक प्रतिवेदन दाखिल करने की अनुमति दी थी। सक्षम प्राधिकरण को कानून के अनुसार उस पर विचार करने, विशेषज्ञों और हितधारकों से परामर्श करने तथा प्रस्तुतिकरण के तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था।
निर्देशों की अवहेलना
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि स्पष्ट न्यायिक निर्देशों के बावजूद कई महीनों तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। यह भी कहा गया कि 13 जुलाई 2025 को पूरक प्रतिवेदन दाखिल किए जाने के बावजूद प्राधिकरणों ने निर्धारित तीन महीने की अवधि के भीतर उस पर कार्रवाई नहीं की। याचिका में कहा गया है कि प्रतिवेदन दाखिल किए जाने के लगभग आठ महीने बीत जाने के बावजूद कोई कार्रवाई न होना, दिल्ली हाईकोर्ट के बाध्यकारी निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना है।
उठाए गए प्रमुख मुद्दे
अवमानना याचिका में कई महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए गए थे। इनमें भारत-विशिष्ट क्लिनिकल ट्रायल में छूट शामिल है। नए ड्रग्स और क्लिनिकल ट्रायल नियम, 2019 के तहत कमियां भी बताई गई हैं। फार्माकोविजिलेंस सुरक्षा उपायों में कथित खामियां भी एक मुद्दा है। नियामकीय असंगतियां और आक्रामक मार्केटिंग प्रथाएं भी इसमें शामिल थीं।
प्राधिकरणों की निष्क्रियता
याचिका में यह भी जोड़ा गया कि 29 जनवरी 2026 को भेजे गए ईमेल सहित कई याद दिलाने वाले संदेशों के बावजूद प्राधिकरणों से कोई जवाब नहीं मिला। याचिका में कहा गया है कि 2 जुलाई 2025 को पारित आदेश में सीडीएससीओ को तीन महीने के भीतर निर्णय लेने का स्पष्ट और समयबद्ध दायित्व दिया गया था। सिर्फ आंतरिक प्रक्रिया या यह कहना कि मामला विचाराधीन है, बाध्यकारी न्यायिक निर्देश का पालन नहीं माना जा सकता।