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Noida News: ईडी ने उप निबंधक से तीन घंटे तक की पूछताछ
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- महर्षि आश्रम से जुडे ट्रस्ट की भूमि धोखाधड़ी से बेचने के मामले की ईडी कर रही है जांच
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। महर्षि आश्रम से जुड़ी ट्रस्ट की जमीन फर्जी तरीके से बेचने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोएडा के सर्किल तीन की उप निबंधक शैली से तीन घंटे पूछताछ कर बयान दर्ज किए। यह पूछताछ कई बार में हुई। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित शासन की निगरानी में समिति को भी तीन महीने में जांच कर रिपोर्ट देनी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब ईडी भी इस मामले में जांच कर रही है।
एसएमआरएफ ट्रस्ट की गेझा तिलपताबाद और भंगेल में 3.36 हेक्टेयर भूमि ट्रस्ट के फर्जी पदाधिकारी और दस्तावेज तैयार कर बेची गई। इसमें अब तक 36 बैनामे सामने आए हैं। निबंधन विभाग की ओर से बैनामों की रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी की जा रही है। मामले में जांच कर रही ईडी ने मंगलवार को उप निबंधक से ट्रस्ट की जमीन के हुए बैनामों पर तीन घंटे पूछताछ की। अलग-अलग सर्किल के दो सब रजिस्ट्रार से पहले ही ईडी पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईडी इस मामले में फिर से पूछताछ के लिए निबंधन विभाग के अधिकारियों को बुला सकती है। फर्जी तरीके से जमीन को बेचने और खरीदने वाले दो आरोपितों को ईडी ने गिरफ्तार कर बैंक खाते फ्रीज और वाहन सीज किए हैं। आरोप है कि फर्जी पदाधिकारी और दस्तावेज बनाकर करीब 33 करोड़ रुपये कीमत की जमीन सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को 16 करोड़ रुपये में बेची गई थी। दिसंबर 2025 में यह मामला सामने आया।
सेक्टर-39 थाने में नामजद सिंहवाहिनी के निदेशक प्रदीप सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, जी. रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में हाईकोर्ट से सुनवाई पूरी होने तक राघवेंद्र की गिरफ्तारी पर रोक लगी थी। महर्षि आश्रम की ओर से श्रीकांत ओझा ने हाईकोर्ट से लगी रोक के बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) दाखिल की थी। एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को जांच के आदेश दिए थे।
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नोएडा। महर्षि आश्रम से जुड़ी ट्रस्ट की जमीन फर्जी तरीके से बेचने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नोएडा के सर्किल तीन की उप निबंधक शैली से तीन घंटे पूछताछ कर बयान दर्ज किए। यह पूछताछ कई बार में हुई। हाईकोर्ट के आदेश पर गठित शासन की निगरानी में समिति को भी तीन महीने में जांच कर रिपोर्ट देनी है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर अब ईडी भी इस मामले में जांच कर रही है।
एसएमआरएफ ट्रस्ट की गेझा तिलपताबाद और भंगेल में 3.36 हेक्टेयर भूमि ट्रस्ट के फर्जी पदाधिकारी और दस्तावेज तैयार कर बेची गई। इसमें अब तक 36 बैनामे सामने आए हैं। निबंधन विभाग की ओर से बैनामों की रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी की जा रही है। मामले में जांच कर रही ईडी ने मंगलवार को उप निबंधक से ट्रस्ट की जमीन के हुए बैनामों पर तीन घंटे पूछताछ की। अलग-अलग सर्किल के दो सब रजिस्ट्रार से पहले ही ईडी पूछताछ कर चुकी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार ईडी इस मामले में फिर से पूछताछ के लिए निबंधन विभाग के अधिकारियों को बुला सकती है। फर्जी तरीके से जमीन को बेचने और खरीदने वाले दो आरोपितों को ईडी ने गिरफ्तार कर बैंक खाते फ्रीज और वाहन सीज किए हैं। आरोप है कि फर्जी पदाधिकारी और दस्तावेज बनाकर करीब 33 करोड़ रुपये कीमत की जमीन सिंहवाहिनी इंफ्रा प्रोजेक्ट्स को 16 करोड़ रुपये में बेची गई थी। दिसंबर 2025 में यह मामला सामने आया।
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सेक्टर-39 थाने में नामजद सिंहवाहिनी के निदेशक प्रदीप सिंह, राघवेंद्र प्रताप सिंह, जी. रामचंद्र मोहन और आकाश मालवीय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले में हाईकोर्ट से सुनवाई पूरी होने तक राघवेंद्र की गिरफ्तारी पर रोक लगी थी। महर्षि आश्रम की ओर से श्रीकांत ओझा ने हाईकोर्ट से लगी रोक के बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) दाखिल की थी। एसएलपी पर सुप्रीम कोर्ट ने ईडी को जांच के आदेश दिए थे।