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Noida News: जिले में विसरा जांच नहीं, मौत के राज के लिए गाजियाबाद पर निर्भरता
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- विसरा रिपोर्ट के इंतजार में अटक जाता है मौत का राज
(नोटः खबर को ऑनलाइन नहीं चलाएं)
-गौतमबुद्धनगर में विसरा जांच की लैब नहीं, गाजियाबाद भेजे जा रहे सैंपल, तीन से छह माह तक अटकती है जांच
-रिपोर्ट आने तक पुलिस जांच और कोर्ट की कार्रवाई पर असर, हत्या-आत्महत्या के मामलों में बढ़ती है मुश्किल
मोहम्मद बिलाल
ग्रेटर नोएडा। मौत संदिग्ध है, पोस्टमॉर्टम में कारण साफ नहीं है और इसलिए विसरा सुरक्षित कर लिया है। विसरा जांच रिपोर्ट कब तक आएगी कुछ कह नहीं सकते है। यह शब्द उन परिजन से कहे जाते हैं, जिनके अपनों की मौत कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं हो पाता है। विसरा से मौत का सच जानने के लिए परिजन को तीन से छह माह का इंतजार करना पड़ता है।
प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले गौतमबुद्धनगर में विसरा जांच की सुविधा नहीं होने के कारण सैंपल गाजियाबाद की फॉरेंसिक लैब भेजने पड़ते हैं। यहां से रिपोर्ट आने में तीन से छह माह तक का समय लगता है। इसका सीधा असर पुलिस की विवेचना और अदालत में चलने वाली कार्रवाई पर पड़ता है। खासकर हत्या, आत्महत्या और संदिग्ध मौत के मामलों में विसरा रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाती है कि मृतक के शरीर में जहर, नशीला पदार्थ, दवा या कोई अन्य रासायनिक पदार्थ मौजूद था या नहीं। पोस्टमॉर्टम के दौरान जब चिकित्सक को मौत का कारण स्पष्ट नहीं मिलता या किसी जहरीले पदार्थ, दवा और रासायनिक तत्व के सेवन की आशंका होती है। तब मृतक के शरीर के आंतरिक अंगों के नमूने सुरक्षित किए जाते हैं। इन्हें ही सामान्य तौर पर विसरा कहा जाता है। इस जांच से पता चल सकता है कि मृतक के शरीर में जहर, शराब, नशीला पदार्थ, दवा की अधिक मात्रा या कोई अन्य विषैला रसायन मौजूद था या नहीं।
जांच और कोर्ट के लिए क्यों महत्वपूर्ण : हत्या के मामलों में आरोपी यह दावा कर सकता है कि मौत जहर या किसी अन्य पदार्थ से हुई, जबकि पुलिस के सामने हत्या की दूसरी आशंका होती है। इसी तरह आत्महत्या के मामले में भी यह पता लगाना जरूरी होता है कि मृतक ने वास्तव में कोई जहरीला पदार्थ खाया था या नहीं। दुर्घटना, संदिग्ध मौत और मेडिकल लापरवाही के मामलों में भी विसरा रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है। मगर रिपोर्ट आने में महीनों लगने से विवेचना पूरी करने में देरी होती है।
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लैब बने तो घटेगा इंतजार : गौतमबुद्धनगर में प्रतिमाह संदिग्ध मौत, दुर्घटना और अपराध के मामले सामने आते हैं। ऐसे में विसरा जांच के लिए दूसरे जिले की लैब पर निर्भरता कम करना जरूरी है। जिले में फोरेंसिक विसरा जांच की सुविधा उपलब्ध होने पर सैंपल भेजने और रिपोर्ट हासिल करने का समय कम होगा। पुलिस को विवेचना पूरी करने में तेजी आएगी और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर अदालत के सामने रखे जा सकेंगे।
केस-1 :
फरवरी-2026ः दनकौर क्षेत्र के रीलखा गांव निवासी छह वर्षीय गर्व कसाना उर्फ चीकू की एमआरआई जांच से पहले एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद मौत हो गई थी। परिजनों ने एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा दिए जाने का आरोप लगाया। पोस्टमॉर्टम में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आने पर पुलिस ने विसरा सुरक्षित कराया और जांच के लिए एफएसएल भेजा था।
केस-2 :
जनवरी-2026- ईकोटेक-3 क्षेत्र के सादुल्लापुर गांव में श्रवण कुमार और उनकी गर्भवती पत्नी नीलम घर में मृत मिले थे। उनके तीन बच्चों की तबीयत भी खराब थी और कमरे में उल्टी के निशान मिले थे। शुरुआती जांच में जहरीला पदार्थ खाने की आशंका जताई गई। पोस्टमॉर्टम के बाद विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया था।
पहले लैब लखनऊ में थी। सैंपल वहीं भेजना पड़ता था। अब जोनल स्तर पर फॉरेंसिक लैब है। विसरा सैंपल लेकर जांच के लिए गाजियाबाद भेजा जाता है।
- राजीव नारायण मिश्र, अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था
विसरा रिपोर्ट के इंतजार में अटक जाता है मौत का राज
मौत संदिग्ध, सच का इंतजार छह माह तक
पोस्टमॉर्टम नहीं बता पाया मौत का राज, विसरा रिपोर्ट का लंबा इंतजार
तीन से छह माह में खुलेगा मौत का राज, गौतमबुद्धनगर में नहीं विसरा जांच की सुविधा
विसरा जांच की सुस्त रफ्तार से अटकी मौत की गुत्थी
मौत का सच जानने में छह माह तक का इंतजार
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(नोटः खबर को ऑनलाइन नहीं चलाएं)
-गौतमबुद्धनगर में विसरा जांच की लैब नहीं, गाजियाबाद भेजे जा रहे सैंपल, तीन से छह माह तक अटकती है जांच
-रिपोर्ट आने तक पुलिस जांच और कोर्ट की कार्रवाई पर असर, हत्या-आत्महत्या के मामलों में बढ़ती है मुश्किल
मोहम्मद बिलाल
ग्रेटर नोएडा। मौत संदिग्ध है, पोस्टमॉर्टम में कारण साफ नहीं है और इसलिए विसरा सुरक्षित कर लिया है। विसरा जांच रिपोर्ट कब तक आएगी कुछ कह नहीं सकते है। यह शब्द उन परिजन से कहे जाते हैं, जिनके अपनों की मौत कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं हो पाता है। विसरा से मौत का सच जानने के लिए परिजन को तीन से छह माह का इंतजार करना पड़ता है।
प्रदेश को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले गौतमबुद्धनगर में विसरा जांच की सुविधा नहीं होने के कारण सैंपल गाजियाबाद की फॉरेंसिक लैब भेजने पड़ते हैं। यहां से रिपोर्ट आने में तीन से छह माह तक का समय लगता है। इसका सीधा असर पुलिस की विवेचना और अदालत में चलने वाली कार्रवाई पर पड़ता है। खासकर हत्या, आत्महत्या और संदिग्ध मौत के मामलों में विसरा रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाती है कि मृतक के शरीर में जहर, नशीला पदार्थ, दवा या कोई अन्य रासायनिक पदार्थ मौजूद था या नहीं। पोस्टमॉर्टम के दौरान जब चिकित्सक को मौत का कारण स्पष्ट नहीं मिलता या किसी जहरीले पदार्थ, दवा और रासायनिक तत्व के सेवन की आशंका होती है। तब मृतक के शरीर के आंतरिक अंगों के नमूने सुरक्षित किए जाते हैं। इन्हें ही सामान्य तौर पर विसरा कहा जाता है। इस जांच से पता चल सकता है कि मृतक के शरीर में जहर, शराब, नशीला पदार्थ, दवा की अधिक मात्रा या कोई अन्य विषैला रसायन मौजूद था या नहीं।
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जांच और कोर्ट के लिए क्यों महत्वपूर्ण : हत्या के मामलों में आरोपी यह दावा कर सकता है कि मौत जहर या किसी अन्य पदार्थ से हुई, जबकि पुलिस के सामने हत्या की दूसरी आशंका होती है। इसी तरह आत्महत्या के मामले में भी यह पता लगाना जरूरी होता है कि मृतक ने वास्तव में कोई जहरीला पदार्थ खाया था या नहीं। दुर्घटना, संदिग्ध मौत और मेडिकल लापरवाही के मामलों में भी विसरा रिपोर्ट महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है। मगर रिपोर्ट आने में महीनों लगने से विवेचना पूरी करने में देरी होती है।
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लैब बने तो घटेगा इंतजार : गौतमबुद्धनगर में प्रतिमाह संदिग्ध मौत, दुर्घटना और अपराध के मामले सामने आते हैं। ऐसे में विसरा जांच के लिए दूसरे जिले की लैब पर निर्भरता कम करना जरूरी है। जिले में फोरेंसिक विसरा जांच की सुविधा उपलब्ध होने पर सैंपल भेजने और रिपोर्ट हासिल करने का समय कम होगा। पुलिस को विवेचना पूरी करने में तेजी आएगी और वैज्ञानिक साक्ष्य समय पर अदालत के सामने रखे जा सकेंगे।
केस-1 :
फरवरी-2026ः दनकौर क्षेत्र के रीलखा गांव निवासी छह वर्षीय गर्व कसाना उर्फ चीकू की एमआरआई जांच से पहले एनेस्थीसिया दिए जाने के बाद मौत हो गई थी। परिजनों ने एनेस्थीसिया की अधिक मात्रा दिए जाने का आरोप लगाया। पोस्टमॉर्टम में मौत का स्पष्ट कारण सामने नहीं आने पर पुलिस ने विसरा सुरक्षित कराया और जांच के लिए एफएसएल भेजा था।
केस-2 :
जनवरी-2026- ईकोटेक-3 क्षेत्र के सादुल्लापुर गांव में श्रवण कुमार और उनकी गर्भवती पत्नी नीलम घर में मृत मिले थे। उनके तीन बच्चों की तबीयत भी खराब थी और कमरे में उल्टी के निशान मिले थे। शुरुआती जांच में जहरीला पदार्थ खाने की आशंका जताई गई। पोस्टमॉर्टम के बाद विसरा सुरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया था।
पहले लैब लखनऊ में थी। सैंपल वहीं भेजना पड़ता था। अब जोनल स्तर पर फॉरेंसिक लैब है। विसरा सैंपल लेकर जांच के लिए गाजियाबाद भेजा जाता है।
- राजीव नारायण मिश्र, अपर पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था
विसरा रिपोर्ट के इंतजार में अटक जाता है मौत का राज
मौत संदिग्ध, सच का इंतजार छह माह तक
पोस्टमॉर्टम नहीं बता पाया मौत का राज, विसरा रिपोर्ट का लंबा इंतजार
तीन से छह माह में खुलेगा मौत का राज, गौतमबुद्धनगर में नहीं विसरा जांच की सुविधा
विसरा जांच की सुस्त रफ्तार से अटकी मौत की गुत्थी
मौत का सच जानने में छह माह तक का इंतजार