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Noida News: सुल्तानपुर की मूंज ग्रास कला को डिजिटल पहचान दिलाने में जुटीं रागिनी
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सुल्तानपुर की मूंज ग्रास कला को डिजिटल पहचान दिलाने में जुटीं रागिनी शुक्ला
माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सुल्तानपुर की मूंज ग्रास कला (सरपत) को बढ़ावा देने के लिए छात्रा रागिनी शुक्ला एक खास डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है। इस प्लेटफाॅर्म से महिलाएं अपने उत्पाद आसानी से ऑनलाइन बेच सकेंगी। खास बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के लिए महिलाओं को किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ेगा। रागिनी सेक्टर- 62 स्थित उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन से मास्टर की पढ़ाई कर रहीं हैं।
रागिनी शुक्ला ने अपने प्रोजेक्ट के तहत सुल्तानपुर के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) मूंज ग्रास को नई पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को तकनीक की ज्यादा जानकारी नहीं होती, इसलिए प्लेटफॉर्म को बेहद आसान बनाया जा रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है, जिससे महिलाएं सिर्फ एप्लिकेशन पर जाकर अपने प्रोडक्ट के बारे में बोलेंगी और एप अपने आप उसकी पूरी जानकारी तैयार कर देगा। रागिनी ने बताया कि प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है और वह अगले सप्ताह सुल्तानपुर जाकर स्थानीय महिलाओं के साथ संवाद करेंगी, ताकि उनकी जरूरतों को समझकर प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाया जा सके।
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माई सिटी रिपोर्टर
नोएडा। सुल्तानपुर की मूंज ग्रास कला (सरपत) को बढ़ावा देने के लिए छात्रा रागिनी शुक्ला एक खास डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार कर रही है। इस प्लेटफाॅर्म से महिलाएं अपने उत्पाद आसानी से ऑनलाइन बेच सकेंगी। खास बात यह है कि इस प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल के लिए महिलाओं को किसी भी तरह का शुल्क नहीं देना पड़ेगा। रागिनी सेक्टर- 62 स्थित उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन से मास्टर की पढ़ाई कर रहीं हैं।
रागिनी शुक्ला ने अपने प्रोजेक्ट के तहत सुल्तानपुर के वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) मूंज ग्रास को नई पहचान दिलाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण महिलाओं को तकनीक की ज्यादा जानकारी नहीं होती, इसलिए प्लेटफॉर्म को बेहद आसान बनाया जा रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया जा रहा है, जिससे महिलाएं सिर्फ एप्लिकेशन पर जाकर अपने प्रोडक्ट के बारे में बोलेंगी और एप अपने आप उसकी पूरी जानकारी तैयार कर देगा। रागिनी ने बताया कि प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो चुका है और वह अगले सप्ताह सुल्तानपुर जाकर स्थानीय महिलाओं के साथ संवाद करेंगी, ताकि उनकी जरूरतों को समझकर प्लेटफॉर्म को और बेहतर बनाया जा सके।
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