वर्तमान समय में बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है। उनके सर्वांगीण विकास के लिए अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्यों और मानवीय गुणों की शिक्षा देना भी बेहद जरूरी है। यदि विद्यालयों में प्रतिदिन नैतिक शिक्षा की कक्षाएं नियमित रूप से संचालित हों, तो बच्चों के व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलते हैं। नैतिक शिक्षा के माध्यम से बच्चों में ईमानदारी, अनुशासन, सम्मान, सहयोग, जिम्मेदारी, सहनशीलता और करुणा जैसे गुण विकसित होते हैं। इससे वे सही और गलत के बीच अंतर करना सीखते हैं तथा परिवार, विद्यालय और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को बेहतर ढंग से निभाने के लिए प्रेरित होते हैं। ऐसे मूल्य उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने और सही निर्णय लेने में भी मदद करते हैं। आज के प्रतिस्पर्धात्मक दौर में जहां बच्चों पर पढ़ाई का दबाव बढ़ रहा है, वहीं उनके नैतिक और चारित्रिक विकास पर भी समान रूप से ध्यान देने की आवश्यकता है। शिक्षक और अभिभावक यदि मिलकर बच्चों को अच्छे संस्कार दें, तो वे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में सफल होंगे, बल्कि एक संवेदनशील, जिम्मेदार और आदर्श नागरिक भी बनेंगे।
- अनीता रानी, सहायक अध्यापक, प्राथमिक विद्यालय नगला बंजारा, जेवर